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45 किलो प्राचीन सिक्के गायब: महादेव मंदिर की खुदाई में मटकों में मिला था खजाना, एसडीएम के बयान से आया नया मोड़

संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: Dhirendra Singh Updated Thu, 18 Jun 2026 11:22 AM IST
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सार

फिरोजाबाद के वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में खुदाई के दौरान मिले करीब 40-45 किलो कुषाणकालीन तांबे के सिक्के रहस्यमय ढंग से गायब हो गए हैं। मामले में अब सभी विभाग जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि डीएम ने जांच और दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

45 Kg of Ancient Kushan-Era Coins Go Missing from Temple, Probe Ordered
सिक्के - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

फिरोजाबाद के थाना नारखी क्षेत्र के कोटला गांव स्थित ऐतिहासिक वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में मई 2025 वर्ष खुदाई के दौरान मिले पुरातात्विक महत्व के बहुमूल्य सिक्के गायब होने के मामले में नया मोड़ आ गया है। इस गंभीर प्रकरण पर स्थिति स्पष्ट करते हुए एसडीएम सदर सत्येंद्र सिंह ने साफ कहा है कि इस पूरे मामले में राजस्व विभाग को किसी भी स्तर पर न तो कोई लिखित और न ही कोई मौखिक जानकारी दी गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में राजस्व विभाग के पास एक भी सिक्का मौजूद नहीं है।


 

दरअसल, बीते वर्ष मई 2025 में वनखंडेश्वर महादेव मंदिर में पर्यटन विकास के अंतर्गत जीर्णोद्धार व नींव की खुदाई का कार्य चल रहा था। इसी दौरान मिट्टी के दो मटकों में भारी मात्रा में प्राचीन सिक्के निकले, जिनका वजन करीब 40 से 45 किलोग्राम आंका गया था। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप ने इसकी विधिवत सूचना राज्य पुरातत्व विभाग की आगरा इकाई को दी थी। 22 मई 2025 को पुरातत्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और बताया कि यह उच्च कोटि के तांबे के सिक्के हैं, जो उत्तर कुषाण काल (तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व) के हैं।


 
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लापरवाही की हद: कोठरी में बोरी में भरकर छोड़ दिए थे सिक्के
पुरातत्व विभाग की टीम प्रारंभिक जांच के बाद कुछ नमूने (सिक्के) अपने साथ ले गई, जबकि बाकी सिक्कों को बिना किसी सुरक्षा के मंदिर की एक कोठरी में बोरी में भरकर ट्रस्ट की सुपुर्दगी में छोड़ दिया था। जून 2025 में जब विभाग की टीम दोबारा सिक्के लेने पहुंची, तो पूरी बोरी ही गायब थी।

 
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आखिर किसने की चोरी, सब झाड़ रहे पल्ला
सिक्के गायब होने के बाद अब सभी जिम्मेदार पक्ष और विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष शैलेंद्र प्रताप का कहना है कि सिक्के गायब होने की जानकारी मिलते ही पुलिस को तहरीर दी गई थी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। ग्रामीणों को दिखाने के लिए इसे ठेकेदार की निगरानी में रखा गया था। पुरातत्व विभाग के तत्कालीन अधिकारी कृष्ण मोहन दुबे (वर्तमान में गोरखपुर तैनात) और आगरा इकाई के अधिकारी ज्ञानेंद्र रस्तोगी का कहना है कि उनका काम सिर्फ प्राचीनता बताना था, सिक्कों को संरक्षित करने का काम संग्रहालय का है। उन्होंने उस समय सिक्कों को पुलिस मालखाने में रखवाने को कहा था। नारखी थानाध्यक्ष राकेश गिरी ने बताया कि मामला एक साल से पुराना है। सिक्के पुलिस को नहीं सौंपे गए थे। मंदिर परिसर से गायब होने की सूचना पर संदिग्ध ठेकेदार पवन से पूछताछ की गई थी, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। थाने में कोई तहरीर नहीं आई थी। एसडीएम सदर सतेंद्र सिंह का कहना है कि उन्हें या तहसील के किसी भी अन्य अधिकारी को इस बारे में किसी भी स्तर से कोई लिखित या मौखिक सूचना उस वक्त नहीं दी गई थी।


 

इतिहास की बिखरी कड़ियां जोड़ने का मौका गंवाया
संबंधित जिम्मेदारों ने उस वक्त लापरवाही न बरती होती और इन सिक्कों को समय रहते सुरक्षित कर लिया होता, तो भारतीय संस्कृति के इतिहास की कई बिखरी कड़ियों को जोड़ा जा सकता था। कुषाण काल की संस्कृति, धातु कला और तत्कालीन व्यापारिक इतिहास को समझने का यह एक बड़ा जरिया बन सकते थे। डीएम संतोष कुमार शर्मा ने बताया कि मामला गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी। अगर किसी भी स्तर से लापरवाही या फिर गबन जैसा कोई मामला सीधे तौर पर किसी के खिलाफ सामने आया तो उस पर कार्रवाई के लिए शासन को भी लिखा जाएगा। अगर, किसी अन्य व्यक्ति का दोष पाया गया तो उस पर प्राथमिकी होगी।
 
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