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UP: जमीनों पर 5229 कब्जे, फाइलों में कैद एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स; ये रिपोर्ट देखकर रह जाएंगे हैरान

Wed, 12 Aug 2026 11:33 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 12 Aug 2026 11:33 AM IST
सार

आगरा में वर्ष 2017 से मार्च 2026 तक सरकारी, निजी और धार्मिक संपत्तियों पर कब्जे की 5,229 शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन जिलास्तर पर सिर्फ 40 लोगों को भू-माफिया घोषित किया जा सका। जिलास्तरीय टास्क फोर्स की बैठकें लंबे समय से नहीं हुई हैं और 30 से अधिक संदिग्ध भू-माफियाओं की फाइलें अटकी हैं। प्रशासन के मुताबिक हाईकोर्ट में मामला लंबित होने से कार्रवाई रुकी है।
 

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5,229 Land Encroachment Complaints in Agra, Anti-Land Mafia Task Force Stalled
भू-माफिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में सरकारी, निजी और धार्मिक संपत्तियों पर कब्जों का खेल जारी है। इस साल अब तक 265 शिकायतें आ चुकी हैं। जिले में कुल 5,229 अवैध कब्जों की शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इसके बावजूद संपत्तियों को मुक्त कराने के लिए गठित एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स केवल फाइलों में कैद होकर रह गई है। तहसील, जिला और मंडल से लेकर राज्यस्तरीय एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स की कार्रवाई पूरी तरह से ठप है।
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दरअसल, 2017 में जारी इसके मूल शासनादेश को हाईकोर्ट में चुनौती मिलने से प्रशासन के अभियान पर ब्रेक लग गया है। सदर तहसील स्तर से चिह्नित 30 से अधिक भू-माफियाओं की जिलास्तर पर होने वाली घोषणा भी अधर में लटक गई है।
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नौ साल में 5,229 शिकायतें, केवल 40 घोषित भू-माफिया
योगी के सूबे की कमान संभालते ही भू-माफियाओं के खिलाफ वर्ष 2017 से बुलडोजर गरज रहा था। शुरुआती चार वर्षों में टास्क फोर्स ने रफ्तार पकड़ी थी, लेकिन अब यह अभियान सुस्त पड़ चुका है। जिले के एंटी भू-माफिया पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 से लेकर मार्च 2026 तक जमीन कब्जाने की कुल 5,229 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इन शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए जिलास्तर पर अब तक कुल 40 लोगों को ही भू-माफिया घोषित किया जा सका है।


 

फाइलों में दबीं बैठकें, नए माफियाओं पर फैसला अटका
शासन ने अतिक्रमण मुक्त अभियान की मॉनिटरिंग के लिए बैठकों का जो खाका खींचा था, वह अब केवल कागजों में सिमट गया है। वर्ष 2022-23 के बाद से डीएम की अध्यक्षता में गठित जिलास्तरीय एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स की कोई बैठक आयोजित नहीं की गई है। 2023-24 के बाद से तहसीलस्तरीय टास्क फोर्स की बैठकें भी नहीं हुई हैं। बैठकों के अभाव में शहर के 30 से अधिक ऐसे भू-माफियाओं की फाइलें धूल फांक रही हैं, जिन्हें तहसील स्तर पर तो भू-माफिया घोषित कर दिया गया है, लेकिन जिलास्तर से अंतिम मुहर नहीं लग सकी है। अप्रैल 2017 में तत्कालीन मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने चार स्तरीय (राज्य, मंडल, जिला, तहसील) टास्क फोर्स के गठन का शासनादेश जारी किया था। इसका मुख्य उद्देश्य दो माह के भीतर अवैध कब्जों का चिह्नांकन कर भू-माफियाओं पर प्राथमिकी, गैंगस्टर और गुंडा एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई करना था। साथ ही, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी नकेल कसने का प्रावधान था।


 
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हाईकोर्ट के आदेश का है इंतजार
अभियान के रुकने और बैठकों के स्थगित होने के संबंध में एडीएम (प्रशासन) आजाद भगत सिंह ने बताया कि भू-माफिया संबंधी शासनादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। वर्तमान में यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसी कानूनी अड़चन के कारण टास्क फोर्स की बैठकें फिलहाल स्थगित रखी गई हैं। जब तक न्यायालय से कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी भी नए व्यक्ति को भू-माफिया घोषित नहीं किया जा सकता है।
 
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