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Agra News: करोड़ों की कृषि भूमि बेचने का आरोप, तहसील के कातिब समेत सात पर प्राथमिकी
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Sun, 11 Jan 2026 02:45 AM IST
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आगरा। जगदीशपुरा थाना क्षेत्र के कलवारी में मां की मृत्यु के बाद करोड़ोंं रुपये की कृषि भूमि बेचने के बाद बेटे ने तहसील के कातिब के साथ साठगांठ कर फर्जी दाखिला खारिज करा दिया। खतौनी में नाम दर्ज होने के बाद आरोपियाें ने जमीन के कई बैनामे कर दिए। पीड़ित ने न्यायालय के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। न्यायालय के आदेश पर जगदीशपुरा थाना में कातिब समेत सात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पीड़ित कृष्ण कान्त गौतम ने बताया कि उन्होंने और उनके भाई ने कलवारी स्थित खसरा संख्या 60 व 61 की 1.019 हेक्टेयर भूमि का 26 मई 2022 को 2.95 करोड़ रुपये में बैनामा कराया था। यह भूमि सरला रानी बंसल के नाम दर्ज थी। उनके निधन के बाद उनके बेटे फ्रीगंज के चिम्मन लाल रोड के निवासी शरद चन्द बंसल और मिलन कुमारी वारिस बने। शरद चन्द बंसल ने बहन को विवाहित दर्शाकर अपने नाम फर्जी दाखिल-खारिज करा लिया, जिसे बाद मिलन कुमारी के शिकायत करने पर निरस्त कर 29 मई 2023 को दोनों वारिसों के नाम दर्ज किया गया। मिलन बंसल ने अपने हिस्से का बैनामा उनके पक्ष में कर दिया था और खतौनी में उनका नाम भी दर्ज हो गया। इसके बाद शरद चन्द बंसल, उनके पुत्र पुष्कर बंसल, खरीदार बिल्डर शैलेश अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, धीरज कुमार दीक्षित, रजत तथा तहसील सदर के कातिब गुड्डन ने पूरी जमीन को स्वयं का बताकर कई फर्जी इकरारनामे कर दिए, जबकि सभी को असली मालिक की जानकारी थी। आरोपियों द्वारा जमीन पर जबरन कब्जा करने और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है। पुलिस आयुक्त को 20 दिसंबर 2025 को शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने न्यायालय के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर जगदीशपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की जांच की जा रही है।
अभिलेखगार में हो चुका है फर्जीवाड़ा
- निबंधन भवन के केंद्रीय अभिलेखागार में फर्जीवाड़ा हो चुका है। 100 से अधिक बैनामों का रिकार्ड गायब है। अभिलेखागार में इंडेक्स के पन्ने तक फट चुके हैं। 20 से अधिक स्याहा और इंडेक्स ऐसे हैं जिनमें असली पन्ने फाड़कर उनसे मिलते-जुलते पन्ने जोड़ दिए गए। इस मामले में एक दर्जन से अधिक लोग जेल जा चुके हैं। अभिलेखागार के कर्मचारी के विरुद्ध भी मुकदमा दर्ज है। इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है।
फर्जी वसीयत से लेकर बैनामों तक खेल
- अरबों रुपये की बेशकीमती जमीनों पर कब्जा के लिए भूमाफिया सक्रिय है। रजिस्ट्री दफ्तर से लेकर तहसील के रिकार्ड तक में सेंध ला चुके हैं। मरणोपरांत कई फर्जी वसीयत पंजीकृत हो चुकी है। इस मामले में मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंची है। इसके अलावा पॉवर ऑफ अर्टार्नी, रजिस्ट्री में भी फर्जीवाड़ा हो चुका है। जमीनों के इस खेल में सब रजिस्ट्रार से लेकर लेखपाल, कानूनगो व अन्य अधिकारियों की भूमिका भी एसआईटी जांच चल रही है।
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पीड़ित कृष्ण कान्त गौतम ने बताया कि उन्होंने और उनके भाई ने कलवारी स्थित खसरा संख्या 60 व 61 की 1.019 हेक्टेयर भूमि का 26 मई 2022 को 2.95 करोड़ रुपये में बैनामा कराया था। यह भूमि सरला रानी बंसल के नाम दर्ज थी। उनके निधन के बाद उनके बेटे फ्रीगंज के चिम्मन लाल रोड के निवासी शरद चन्द बंसल और मिलन कुमारी वारिस बने। शरद चन्द बंसल ने बहन को विवाहित दर्शाकर अपने नाम फर्जी दाखिल-खारिज करा लिया, जिसे बाद मिलन कुमारी के शिकायत करने पर निरस्त कर 29 मई 2023 को दोनों वारिसों के नाम दर्ज किया गया। मिलन बंसल ने अपने हिस्से का बैनामा उनके पक्ष में कर दिया था और खतौनी में उनका नाम भी दर्ज हो गया। इसके बाद शरद चन्द बंसल, उनके पुत्र पुष्कर बंसल, खरीदार बिल्डर शैलेश अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, धीरज कुमार दीक्षित, रजत तथा तहसील सदर के कातिब गुड्डन ने पूरी जमीन को स्वयं का बताकर कई फर्जी इकरारनामे कर दिए, जबकि सभी को असली मालिक की जानकारी थी। आरोपियों द्वारा जमीन पर जबरन कब्जा करने और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है। पुलिस आयुक्त को 20 दिसंबर 2025 को शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने न्यायालय के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर जगदीशपुरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की जांच की जा रही है।
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अभिलेखगार में हो चुका है फर्जीवाड़ा
- निबंधन भवन के केंद्रीय अभिलेखागार में फर्जीवाड़ा हो चुका है। 100 से अधिक बैनामों का रिकार्ड गायब है। अभिलेखागार में इंडेक्स के पन्ने तक फट चुके हैं। 20 से अधिक स्याहा और इंडेक्स ऐसे हैं जिनमें असली पन्ने फाड़कर उनसे मिलते-जुलते पन्ने जोड़ दिए गए। इस मामले में एक दर्जन से अधिक लोग जेल जा चुके हैं। अभिलेखागार के कर्मचारी के विरुद्ध भी मुकदमा दर्ज है। इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है।
फर्जी वसीयत से लेकर बैनामों तक खेल
- अरबों रुपये की बेशकीमती जमीनों पर कब्जा के लिए भूमाफिया सक्रिय है। रजिस्ट्री दफ्तर से लेकर तहसील के रिकार्ड तक में सेंध ला चुके हैं। मरणोपरांत कई फर्जी वसीयत पंजीकृत हो चुकी है। इस मामले में मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंची है। इसके अलावा पॉवर ऑफ अर्टार्नी, रजिस्ट्री में भी फर्जीवाड़ा हो चुका है। जमीनों के इस खेल में सब रजिस्ट्रार से लेकर लेखपाल, कानूनगो व अन्य अधिकारियों की भूमिका भी एसआईटी जांच चल रही है।