फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Affidavit sought within 8 weeks for the expansion of Sur Sarovar's boundaries.

UP: सूर सरोवर पर एनजीटी का बड़ा एक्शन,सरकार ने वापस ली इको सेंसिटिव जोन खत्म करने की अधिसूचना

Tue, 14 Jul 2026 07:42 AM IST
आगरा ब्यूरो अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: आगरा ब्यूरो Updated Tue, 14 Jul 2026 07:42 AM IST
सार

आगरा के सूर सरोवर पक्षी विहार के इको सेंसिटिव जोन को शून्य घोषित करने की अधिसूचना को एनजीटी में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने वापस ले लिया। अब बढ़े हुए क्षेत्र के अनुसार नया इको सेंसिटिव जोन तय करने के लिए सरकार ने आठ सप्ताह का समय मांगा है।

विज्ञापन
Affidavit sought within 8 weeks for the expansion of Sur Sarovar's boundaries.
सूर सरोवर पक्षी विहार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के कीठम स्थित सूर सरोवर पक्षी विहार के सीमा विस्तार और इको सेंसिटिव जोन को शून्य घोषित करने के मामले में सोमवार को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रिंसिपल बेंच में सुनवाई हुई। जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की बेंच में राज्य सरकार ने सूर सरोवर की इको सेंसिटिव जोन सीमा शून्य करने की अधिसूचना को वापस ले लिया। बढ़े हुए 399.50 हेक्टेयर क्षेत्रफल के साथ अब 800 हेक्टेयर में फैले सूर सरोवर का इको सेंसिटिव जोन तय करने के लिए आठ सप्ताह का समय मांगा है।
विज्ञापन


याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने सूर सरोवर पक्षी विहार के इको सेंसिटिव जोन को शून्य घोषित करने के फैसले को चुनौती दी थी। उन्होंने याचिका में कहा है कि सूर सरोवर का इको सेंसिटिव जोन शून्य करने का निर्णय अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर लिया गया और इसकी अधिसूचना पर गलत तरीके से हस्ताक्षर कराए गए। एक ही अधिसूचना में सीमा विस्तार और ईएसजेड कर दिया गया। सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी ने भी इको सेंसिटिव जोन शून्य करने पर सवाल उठाए थे। एनजीटी में राज्य सरकार ने अपनी अधिसूचना वापस ले ली। सूर सरोवर पक्षी विहार के सीमा विस्तार मामले में एनजीटी ने गलत तरीके से अधिसूचना जारी करने पर आपत्ति की। इस पर राज्य सरकार ने गलती सुधारने के लिए आठ सप्ताह का समय मांगा है।
विज्ञापन


सीबीआई जांच हो, किसे मिल रहा फायदा
याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता के मुताबिक इको सेंसिटिव जोन शून्य करने का फैसला राज्य सरकार नहीं ले सकती है। यह केंद्र सरकार का अधिकार क्षेत्र है। इसे शून्य करने से कई लोगों को फायदा पहुंचाया गया है। उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की, जिससे पता चले कि दो साल में कितनी फैक्टरियां, स्कूल, होटल, गोदाम और पेट्रोल पंप खोले गए हैं। एनजीटी ने याचिकाकर्ता से मामले से जुड़े सभी तथ्यों और आपत्तियों को लिखित रूप में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। तब तक सूर सरोवर के चारों ओर 10 किलोमीटर क्षेत्र में इको सेंसिटिव जोन से जुड़े संरक्षण प्रावधान प्रभावी रहेंगे। एनजीटी में डॉ. गुप्ता की तरफ से अधिवक्ता अंशुल गुप्ता व आदित्य तेंगुरिया ने पक्ष रखा। राष्ट्रीय चंबल सेंक्चुअरी प्रोजेक्ट की डीएफओ चांदनी सिंह के तबादले को इस मामले से जोड़ कर देखा जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed