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UP: आगरा के छह शिवालयों का होगा कायाकल्प, लेकिन इस सूची में शामिल नहीं रावली महादेव; क्या है वजह?
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 18 Jun 2026 09:07 AM IST
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सार
उत्तर प्रदेश सरकार आगरा के छह प्रमुख शिव मंदिरों के कायाकल्प और धार्मिक पर्यटन विकास की तैयारी कर रही है, लेकिन ऐतिहासिक रावली महादेव मंदिर इस सूची में शामिल नहीं है। आगरा में स्थित होने के बावजूद मंदिर राजस्थान के देवस्थान विभाग के अधीन होने के कारण विकास योजनाओं से दूर है।
रावली महादेव मंदिर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
उत्तर प्रदेश सरकार जहां छह प्रमुख शिव मंदिरों कैलाश, मनकामेश्वर, बल्केश्वर, बटेश्वर, प्राचीन राजेश्वर व पृथ्वीनाथ मंदिरों का कायाकल्प और धार्मिक पर्यटन विकास की दिशा में तेजी से काम कर रही है। वहीं, शहर का ऐतिहासिक रावली शिव मंदिर आज भी प्रशासनिक और सीमा संबंधी पेचीदगियों के कारण विकास योजनाओं से दूर है।
आगरा में स्थित होने के बावजूद रावली महादेव मंदिर राजस्थान के देवस्थान विभाग की सुपुर्द श्रेणी में शामिल है। यही कारण है कि मंदिर के संरक्षण, सौंदर्यीकरण और विकास को लेकर वर्षों से स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। प्रदेश सरकार की योजनाओं में भी मंदिर को वह स्थान नहीं मिल पाया है, जिसकी मांग लंबे समय से श्रद्धालु करते रहे हैं, जबकि रावली मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मंदिर का प्राचीन शिवलिंग और इससे जुड़ी लोक मान्यताएं इसे ब्रज क्षेत्र के प्रमुख शिव धामों में स्थान दिलाती हैं। सावन महीने और सोमवार के दिनों में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
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राजा मानसिंह से जुड़ा है इतिहास
रावली महादेव मंदिर महंत अर्चना शर्मा ने बताया कि मंदिर का इतिहास जयपुर के राजा मान सिंह से जुड़ा हुआ है। यह मंदिर राजस्थान के देवस्थान विभाग के अंतर्गत आता है। रावली मंदिर का भी विकास होना चाहिए। हालांकि लोगों ने आश्वासन दिया कि जल्द मंदिर के लिए भी बजट की घोषणा कराई जाएगी, जिससे मंदिर का कायाकल्प हो। इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि आगरा के धार्मिक पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी।
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रावली महादेव मंदिर महंत अर्चना शर्मा ने बताया कि मंदिर का इतिहास जयपुर के राजा मान सिंह से जुड़ा हुआ है। यह मंदिर राजस्थान के देवस्थान विभाग के अंतर्गत आता है। रावली मंदिर का भी विकास होना चाहिए। हालांकि लोगों ने आश्वासन दिया कि जल्द मंदिर के लिए भी बजट की घोषणा कराई जाएगी, जिससे मंदिर का कायाकल्प हो। इससे न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि आगरा के धार्मिक पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी।
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सुपुर्द श्रेणी का है मंदिर
देवस्थान विभाग के पूर्व मैनेजर मोहन तिवारी ने बताया कि रावली महादेव मंदिर राजस्थान के देवस्थान विभाग के सुपुर्द श्रेणी का मंदिर है। सुपुर्द श्रेणी के मंदिर में पुजारी को मंदिर संभालने की जिम्मेदारी दी जाती है, लेकिन मंदिर की संपत्ति पुजारी नहीं बेच सकता। रावली महादेव मंदिर की पूरी संपत्ति देवस्थान विभाग की है। राजस्थान के देवस्थान के अंतर्गत 3 तरह के मंदिर आते हैं। आत्मनिर्भर श्रेणी, सुपुर्द श्रेणी, प्रत्यक्ष प्रभार मंदिर।
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देवस्थान विभाग के पूर्व मैनेजर मोहन तिवारी ने बताया कि रावली महादेव मंदिर राजस्थान के देवस्थान विभाग के सुपुर्द श्रेणी का मंदिर है। सुपुर्द श्रेणी के मंदिर में पुजारी को मंदिर संभालने की जिम्मेदारी दी जाती है, लेकिन मंदिर की संपत्ति पुजारी नहीं बेच सकता। रावली महादेव मंदिर की पूरी संपत्ति देवस्थान विभाग की है। राजस्थान के देवस्थान के अंतर्गत 3 तरह के मंदिर आते हैं। आत्मनिर्भर श्रेणी, सुपुर्द श्रेणी, प्रत्यक्ष प्रभार मंदिर।
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