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UP: वेश्यावृत्ति खरीद-फरोख्त है संगीन अपराध, सात साल से आजीवन कारावास तक की सजा; जानें क्या कहता है नया कानून

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 24 Jun 2026 12:00 PM IST
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सार

कानून के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे को वेश्यावृत्ति, अनुचित संभोग या किसी अनैतिक उद्देश्य के लिए बेचना, खरीदना, किराये पर देना या सौंपना गंभीर अपराध है। दोषी पाए जाने पर खरीदने वाले को 7 से 14 वर्ष तक और बेचने वाले को 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तथा जुर्माने की सजा हो सकती है।
 

Buying or Selling a Minor for Prostitution Can Lead to 7 Years to Life Imprisonment
बच्ची सांकेतिक - फोटो : freepik
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विस्तार

किसी बच्ची को वेश्यावृत्ति, अनुचित संभोग या किसी अन्य दुराचारिक उद्देश्य के लिए बेचना, भाड़े पर देना या सौंपना या खरीदना एक गंभीर अपराध है। ऐसा किया और दोषी पाए गए तो बेचने पर 10 साल और खरीदने पर 7 से 14 साल कारावास की सजा के साथ जुर्माने का प्रावधान है।


धारा-98 के तहत 18 वर्ष से कम आयु के पुरुष या स्त्री शिशु पर लागू होती है। इसमें विवाहित और अविवाहित दोनों शामिल हैं। यदि 18 वर्ष से कम आयु की किसी महिला को वेश्या या वेश्याघर चलाने वाले व्यक्ति को बेचा जाता है।
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तब यह माना जाएगा कि उसे वेश्यावृत्ति के लिए ही बेचा गया है। यह तब तक मान्य होगा जब तक कि प्रतिकूल साबित न हो जाए। अनुचित संभोग का अर्थ विवाह से बाहर यौन संबंध है। किसी बालिका को देवदासी के रूप में मंदिर को समर्पित करना भी इस धारा के तहत अपराध माना जाता है।
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