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UP: तीन साल से फाइलों में कैद हैं अरावली के हजारों साल पुराने शैल चित्र, संरक्षण का प्रस्ताव अब भी अटका
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 24 Jun 2026 11:52 AM IST
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सार
फतेहपुर सीकरी की अरावली पहाड़ियों में स्थित ऐतिहासिक शैल चित्रों के संरक्षण का प्रस्ताव पिछले तीन वर्षों से एएसआई की प्रक्रिया में अटका हुआ है। तकनीकी मूल्यांकन समिति ने क्षेत्र का दोबारा आकलन कर संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा है, जिसके बाद मामला अब भी विचाराधीन है।
अरावली पहाड़ियों में स्थित ऐतिहासिक शैल चित्र
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के फतेहपुर सीकरी में अरावली की पहाड़ियों में बने ऐतिहासिक शैल चित्रों (रॉक पेंटिंग्स) के संरक्षण का प्रस्ताव तीन साल से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास अटका हुआ है। आगरा के एक्टिविस्ट ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत जानकारी मांगी तो बताया गया कि प्रस्ताव तकनीकी मूल्यांकन समिति के पास संरक्षण के लिए भेजा गया था लेकिन समिति ने दोबारा भेजने के लिए कहा है। अभी यह प्रस्ताव समिति के पास ही विचाराधीन है।
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आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से शैल चित्रों के संरक्षण के बारे में सवाल पूछे थे। एएसआई ने बताया कि किरावली तहसील के फतेहपुर सीकरी में रसूलपुर, पतसाल, मदनपुरा (जाजौली) और भदरौली में शैल चित्र मौजूद हैं। एएसआई आगरा मंडल की ओर से 5 अप्रैल 2023 को संरक्षण का प्रस्ताव तैयार कर दिल्ली स्थित महानिदेशक कार्यालय भेजा गया था। इसे तकनीकी मूल्यांकन समिति (टीईसी) के सामने रखा गया।
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समिति ने दो साल बाद 28 अप्रैल 2025 को आयोजित अपनी बैठक में प्रस्ताव की जांच की। समिति ने संरक्षण के लिए प्रस्तावित किए गए क्षेत्र का दोबारा मूल्यांकन करने की सिफारिश की। साथ ही निर्देश दिया कि प्रस्ताव में जरूरी सुधार कर संशोधित प्रस्ताव को फिर से जमा किया जाए। सहायक अधीक्षक पुरातत्वविद डॉ. अक्षत कुमार कौशिक के अनुसार सीकरी के शैल चित्रों को संरक्षित करने का मामला प्रक्रिया में है।
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आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से शैल चित्रों के संरक्षण के बारे में सवाल पूछे थे। एएसआई ने बताया कि किरावली तहसील के फतेहपुर सीकरी में रसूलपुर, पतसाल, मदनपुरा (जाजौली) और भदरौली में शैल चित्र मौजूद हैं। एएसआई आगरा मंडल की ओर से 5 अप्रैल 2023 को संरक्षण का प्रस्ताव तैयार कर दिल्ली स्थित महानिदेशक कार्यालय भेजा गया था। इसे तकनीकी मूल्यांकन समिति (टीईसी) के सामने रखा गया।
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समिति ने दो साल बाद 28 अप्रैल 2025 को आयोजित अपनी बैठक में प्रस्ताव की जांच की। समिति ने संरक्षण के लिए प्रस्तावित किए गए क्षेत्र का दोबारा मूल्यांकन करने की सिफारिश की। साथ ही निर्देश दिया कि प्रस्ताव में जरूरी सुधार कर संशोधित प्रस्ताव को फिर से जमा किया जाए। सहायक अधीक्षक पुरातत्वविद डॉ. अक्षत कुमार कौशिक के अनुसार सीकरी के शैल चित्रों को संरक्षित करने का मामला प्रक्रिया में है।
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