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खौफनाक: युवक को चंबल नदी में खींच ले गया मगरमच्छ, दोस्तों ने फिर ऐसे बचाई जान; दृश्य देख कांप गए ग्रामीण
Wed, 05 Aug 2026 01:30 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 05 Aug 2026 01:30 PM IST
सार
बाह के गुढ़ा गांव में चंबल नदी घाट पर हाथ-पैर धो रहे युवक पर मगरमच्छ ने हमला कर उसका पैर जबड़े में जकड़ लिया। युवक के दोस्तों ने डंडे मारकर मगरमच्छ से उसका पैर छुड़ाया, जिसके बाद घायल को बाह सीएचसी से एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा रेफर किया गया।
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युवक को चंबल नदी में खींच ले गया मगरमच्छ
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा के बाह के चंबल नदी में मंगलवार दोपहर को हाथ-पैर धो रहे किसान मंगल सिंह (34) पर मगरमच्छ ने हमला बोल दिया। अपने मजबूत जबड़ों में किसान के पैर को जकड़कर पानी में खींचना शुरू कर दिया। नदी किनारे खड़े किसान के दोस्तों ने यह मंजर देखा तो उनके होश उड़ गए मगर दोनों दोस्तों ने बिना देरी किए मगरमच्छ के सिर पर डंडों से ताबड़तोड़ प्रहार करना शुरू कर दिया। पकड़ ढीली पड़ते ही साथियों ने उसे बचा लिया। हालांकि किसान बुरी तरह जख्मी हो गया।
खेड़ा राठौर क्षेत्र के गुढ़ा गांव स्थित चंबल नदी में बुधवार की दोपहर करीब 12:30 बजे गांव का मंगल सिंह हाथ-पैर धोने गए थे। उनके साथी रामप्रवेश और सत्यवीर नदी के किनारे पर खड़े थे। इसी दरम्यान मगरमच्छ ने मंगल सिंह का एक पैर अपने मजबूत जबड़ों में जकड़ लिया। मगरमच्छ मंगल को तेजी से नदी की गहराई में खींच रहा था। यह देखकर रामप्रवेश और सत्यवीर को पहले तो कुछ नहीं सूझा मगर तभी उन्होंने ककोड़े तोड़ने वाले डंडों को उठाकर मगरमच्छ के सिर पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। अचानक हमले से घबराए मगरमच्छ की पकड़ ढीली हो गई और वह पैर छोड़कर पानी में घुस गया। इसके बाद दोनों युवक मंगल को बाहर निकालकर लाए। मगरमच्छ ने मंगल के पैर का मांस नोच लिया था। बाह सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा भेज दिया गया।
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खेड़ा राठौर क्षेत्र के गुढ़ा गांव स्थित चंबल नदी में बुधवार की दोपहर करीब 12:30 बजे गांव का मंगल सिंह हाथ-पैर धोने गए थे। उनके साथी रामप्रवेश और सत्यवीर नदी के किनारे पर खड़े थे। इसी दरम्यान मगरमच्छ ने मंगल सिंह का एक पैर अपने मजबूत जबड़ों में जकड़ लिया। मगरमच्छ मंगल को तेजी से नदी की गहराई में खींच रहा था। यह देखकर रामप्रवेश और सत्यवीर को पहले तो कुछ नहीं सूझा मगर तभी उन्होंने ककोड़े तोड़ने वाले डंडों को उठाकर मगरमच्छ के सिर पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। अचानक हमले से घबराए मगरमच्छ की पकड़ ढीली हो गई और वह पैर छोड़कर पानी में घुस गया। इसके बाद दोनों युवक मंगल को बाहर निकालकर लाए। मगरमच्छ ने मंगल के पैर का मांस नोच लिया था। बाह सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा भेज दिया गया।
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कीचड़भरे रास्ते से निकलने में दो घंटे लगे
चंबल के दूरस्थ बीहड़ में बसे गुढ़ा गांव से सिमराई तक करीब 4 किमी का कच्चा रास्ता है। बारिश के कारण दलदल और फिसलन हो गई है, जिससे पैदल या बाइक से निकलना मुश्किल हो गया है। सिमराई के प्रधान ने बताया कि मगरमच्छ के हमले में घायल को ट्रैक्टर पर बैठाकर बाह तक लाना पड़ा। 4 किमी के बीहड़ के दलदल भरे रास्ते को पार करने में 2 घंटे लगे।
पिछले साल मगरमच्छ से बेटे ने बचाई थी पिता की जान
पिछले साल 25 जुलाई को बासौनी के झरनापुरा गांव के पास चंबल नदी में पानी भरने गए वीरभान सिंह को मगरमच्छ खींचकर ले जा रहा था। बाहर खड़े 9 साल के बेटा अजयराज निषाद अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में कूद गया। बहादुरी के साथ उसने मगरमच्छ के सिर पर पिता को छोड़ने तक डंडों से ताबड़तोड़ प्रहार किया। अजयराज के साहसिक कारनामे की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंची। उनके प्रस्ताव पर 26 दिसंबर, 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अजयराज को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया था। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर ने भी अजयराज के साहस के मुरीद हुए और सम्मानित किया था।
चंबल के दूरस्थ बीहड़ में बसे गुढ़ा गांव से सिमराई तक करीब 4 किमी का कच्चा रास्ता है। बारिश के कारण दलदल और फिसलन हो गई है, जिससे पैदल या बाइक से निकलना मुश्किल हो गया है। सिमराई के प्रधान ने बताया कि मगरमच्छ के हमले में घायल को ट्रैक्टर पर बैठाकर बाह तक लाना पड़ा। 4 किमी के बीहड़ के दलदल भरे रास्ते को पार करने में 2 घंटे लगे।
पिछले साल मगरमच्छ से बेटे ने बचाई थी पिता की जान
पिछले साल 25 जुलाई को बासौनी के झरनापुरा गांव के पास चंबल नदी में पानी भरने गए वीरभान सिंह को मगरमच्छ खींचकर ले जा रहा था। बाहर खड़े 9 साल के बेटा अजयराज निषाद अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में कूद गया। बहादुरी के साथ उसने मगरमच्छ के सिर पर पिता को छोड़ने तक डंडों से ताबड़तोड़ प्रहार किया। अजयराज के साहसिक कारनामे की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंची। उनके प्रस्ताव पर 26 दिसंबर, 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अजयराज को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया था। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर ने भी अजयराज के साहस के मुरीद हुए और सम्मानित किया था।