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Health News: यदि आपके बच्चे को भी है मोबाइल की लत, तो उसकी लंबाई रह जाएगी कम; जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 18 May 2026 10:14 AM IST
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सार

आगरा में आयोजित न्यूरोलॉजी कार्यशाला में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि मोबाइल और लैपटॉप के अधिक उपयोग से रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो रही है और कमर दर्द बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं में गलत बैठने की आदत से लंबाई, चाल और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।
 

Excessive Mobile Use Damaging Spine Health, Experts Warn of Posture and Back Problems
मोबाइल में गेम खेलता बच्चा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

आड़े-तिरछे बैठकर घंटों मोबाइल-लैपटॉप देखने से रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो रही है। गर्दन-कमर और कंधों पर दबाव पड़ रहा है। दर्द होने के साथ दो इंच तक ये झुक गए हैं। फतेहाबाद रोड स्थित होटल में आयोजित न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ आगरा और यूपी-यूके न्यूरोसाइंस सोसाइटी की न्यूरोकॉन-2026 कार्यशाला में विशेषज्ञों ने चिंता जताई। इससे बच्चों की लंबाई भी प्रभावित हो रही है।

प्रयागराज के डॉ. मुकुल पांडे ने बताया कि बीते 8-10 साल में मोबाइल और लैपटॉप का उपयोग तेजी से बढ़ा है। आड़े-तिरछे बैठकर, लेटकर और गर्दन झुकाकर घंटों मोबाइल-लैपटॉप के उपयोग से रीढ़ की हड्डी, कमर, कंधों और गर्दन में दर्द हो रहा है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति से रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो रही है। दो इंच तक कंधे-गर्दन भी झुक गए हैं। 8-35 साल की आयु के मरीजों के अध्ययन में 12 फीसदी में ये परेशानी मिल रही है। 8-16 की उम्र वालों की लंबाई प्रभावित मिली। 17-35 की उम्र में कंधे-गर्दन झुकाकर चलने की आदत बन गई है।
 
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नोएडा के डॉ. यशपाल बुंदेला ने बताया कि मोबाइल-लैपटॉप के लंबे समय तक उपयोग से कंधे-कमर और गर्दन में दर्द हर तीसरे व्यक्ति के हो रहा है। बच्चों की लंबाई पर असर पड़ रहा है। चाल भी बिगड़ रही है। लखनऊ के डॉ. अनंत मेहरोत्रा ने बताया कि बच्चों की रीढ़ की हड्डी टेढ़ी होने पर हाथ-पैरों में कमजोरी और मलमूत्र के नियंत्रण भी प्रभावित होता है। ऐसी परेशानी बच्चों में बढ़ रही है।

 

तनाव से लकवा, नौ घंटे में इंजेक्शन से बच रही जान
आरएमएल मेडिकल कॉलेज लखनऊ के न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक कुमार सिंह ने बताया कि लकवा के 20 फीसदी मरीजों की उम्र 50 से कम है। युवाओं में मधुमेह, तनाव, धूम्रपान और उच्च रक्तचाप से लकवा हो रहा है। नौ घंटे में विशेषज्ञ के पास आने पर इंजेक्शन से मरीज की जान बच रही है। पहले 4.30 घंटे का बेहतर समय था। 24 घंटे की स्थिति में मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी विधि से दिमाग तक तार डालकर खून का थक्का निकालते हैं। मोटे बच्चों में बड़े होने पर लकवा का खतरा तीन गुना है। सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. अवधेश कुमार जैसवाल ने बताया कि खोपड़ी-रीढ़ की हड्डी का जोड़ खिसकने पर दूरबीन विधि से नाक के जरिये छोटा चीरा लगाकर सर्जरी कर रहे हैं, पहले दिमाग को खोलकर करना पड़ता था। न्यूरोसर्जन डॉ. आरसी मिश्रा ने बताया कि दिमाग में ऐसे ट्यूमर भी मिल रहे हैं, जो कैंसर के न होकर भी घातक हैं। ये ऐसी जगह बनता है, जहां मरीज की सांस चलती है। ऐसी सर्जरी बेहद जटिल हैं।

 

पैरों में झनझनाहट तो रीढ़ की हड्डी में टीबी का खतरा
आयोजन अध्यक्ष डॉ. अरविंद अग्रवाल, डॉ. संजय गुप्ता और डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि बुखार आने, कमर में दर्द, पैरों में झनझनाहट, रीढ़ की हड्डी की नस में दबाव महसूस करना, कमजोरी तो तत्काल टीबी की जांच कराएं। सचिव डॉ. विनय अग्रवाल ने कहा कि युवाओं में उच्च रक्तचाप से लकवा का खतरा बढ़ रहा है। डॉ. मयंक अग्रवाल और डॉ. मयंक बंसल ने उच्च रक्तचाप नियंत्रित रखने की सलाह दी।

 

देर से सोना और खराब फिटनेस भी वजह
 एसएन के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ. पीके माहेश्वरी ने बताया कि देर से सोना-जागना, देर रात भोजन करना और पैदल न चलने से अनिद्रा, तनाव और उच्च रक्तचाप हो रहा है। ये लकवा की बड़ी वजह हैं। ऐसे में दिनचर्या, खानपान सुधारने और बेहतर फिटनेस से ये बीमारी से बचा जा सकता है।

इन बातों का रखें ध्यान: -
- बच्चों को सिर्फ पढ़ाई के लिए ही मोबाइल-लैपटॉप इस्तेमाल करने दें।
- बच्चों को भागदौड़ वाले खेलों पर जोर दें, फास्टफूड की लत से बचाएं।
- मोबाइल-लैपटॉप का सीधे बैठकर इस्तेमाल करें, बीच में ब्रेक जरूर लें।
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