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घर में कुत्ता-बिल्ली हैं तो सावधान: बारिश में बढ़ा खतरा, दो लोगों की हुई माैत; ये लक्षण दिखते ही हो जाएं सतर्क
Fri, 07 Aug 2026 08:08 AM IST
आगरा ब्यूरो
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2026 08:08 AM IST
सार
बारिश के मौसम में संक्रमित जानवरों के यूरिन और दूषित पानी के संपर्क से लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा बढ़ गया है। आगरा में 32 मरीज मिल चुके हैं और दो लोगों की मौत हुई है, जबकि स्क्रब टाइफस के 11 मरीज सामने आए हैं।
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लेप्टोस्पाइरोसिस का अलर्ट
- फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
बारिश में कुत्ता-बिल्ली, चूहा, भेड़-बकरी समेत अन्य जंतुओं के मूत्र से पीलिया हो रहा है। आंखें लाल होने के साथ यकृत को भी नुकसान पहुंच रहा है। इस बीमारी को लेप्टोस्पायरोसिस कहा जाता हैं। इसके मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। लोहामंडी क्षेत्र के दो मरीजों की मौत भी हो चुकी है।
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि बारिश में लेप्टोस्पायरोसिस और स्क्रब टाइफस का खतरा अधिक रहता है। लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमित जंतुओं के मूत्र के संपर्क में आने से हो रही हैं। बीते दो-तीन महीने में लेप्टोस्पायरोसिस के 32 और स्क्रब टाइफस के 11 मरीज मिल चुके हैं। इनमें बीते महीने लोहामंडी क्षेत्र की 35 साल की महिला और 30 साल का युवक की मौत भी हो चुकी है।
इनकी जांच में लेप्टोस्पायरोसिस की पुष्टि हुई। इस पर टीम ने इनके यहां बकरी और चूहे के नमूनों की जांच कराई, जिसमें ये बीमारी से संक्रमित मिले। दिल्ली की राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की टीम भी मामले की जांच कर चुकी है। संचारी रोग के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि बारिश में स्क्रब टाइफस और लेप्टोस्पायरोसिस के खतरे को देखते हुए सीएचसी, जिला अस्पताल में इलाज की व्यवस्था कर दी है। एसएन में भी जांच और इलाज की सुविधा है।
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बीमारी की वजह, लक्षण और बचाव
लेप्टोस्पायरोसिस: ये लेप्टोस्पाइरा कीटाणु से होने वाला संक्रमण है। ये जानवरों से इंसानों में फैलता है। ठंड के साथ तेज बुखार, सिर-मांसपेशियों में तेज दर्द (विशेषकर पिंडली-कमर में) आंखें लाल होना और पीलिया होता है। ये कीटाणु नाले, बारिश में जलभराव के पानी के संपर्क में होने से होता है। ये त्वचा या फोड़े-फुंसी के जरिए या फिर मुंह में पानी जाने से पनपता है। गंदे, बारिश से भरे पानी के संपर्क से बचें। खुले घाव को पानी से बचाने के लिए ढककर रखें।
स्क्रब टाइफस: ये बीमारी संक्रमित घास-झाड़ियों में रहने वाले छोटे कीटों के काटने से होती है। इसके लक्षण भी लेप्टोस्पायरोसिस जैसे ही होते हैं। इसमें काटने वाले स्थान पर काला निशान या पपड़ी पड़ जाती है। शरीर पर लाल चकत्ते, गिल्टी में सूजन हो जाती है। इससे बचने के लिए आसपास की घास, झाड़ियां को साफ करें, त्वचा पर कीट निवारक क्रीम लगाएं और झाड़ियों या घनी घास वाली जगहों पर बैठने से बचें।
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सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि बारिश में लेप्टोस्पायरोसिस और स्क्रब टाइफस का खतरा अधिक रहता है। लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमित जंतुओं के मूत्र के संपर्क में आने से हो रही हैं। बीते दो-तीन महीने में लेप्टोस्पायरोसिस के 32 और स्क्रब टाइफस के 11 मरीज मिल चुके हैं। इनमें बीते महीने लोहामंडी क्षेत्र की 35 साल की महिला और 30 साल का युवक की मौत भी हो चुकी है।
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इनकी जांच में लेप्टोस्पायरोसिस की पुष्टि हुई। इस पर टीम ने इनके यहां बकरी और चूहे के नमूनों की जांच कराई, जिसमें ये बीमारी से संक्रमित मिले। दिल्ली की राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की टीम भी मामले की जांच कर चुकी है। संचारी रोग के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि बारिश में स्क्रब टाइफस और लेप्टोस्पायरोसिस के खतरे को देखते हुए सीएचसी, जिला अस्पताल में इलाज की व्यवस्था कर दी है। एसएन में भी जांच और इलाज की सुविधा है।
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बीमारी की वजह, लक्षण और बचाव
लेप्टोस्पायरोसिस: ये लेप्टोस्पाइरा कीटाणु से होने वाला संक्रमण है। ये जानवरों से इंसानों में फैलता है। ठंड के साथ तेज बुखार, सिर-मांसपेशियों में तेज दर्द (विशेषकर पिंडली-कमर में) आंखें लाल होना और पीलिया होता है। ये कीटाणु नाले, बारिश में जलभराव के पानी के संपर्क में होने से होता है। ये त्वचा या फोड़े-फुंसी के जरिए या फिर मुंह में पानी जाने से पनपता है। गंदे, बारिश से भरे पानी के संपर्क से बचें। खुले घाव को पानी से बचाने के लिए ढककर रखें।
स्क्रब टाइफस: ये बीमारी संक्रमित घास-झाड़ियों में रहने वाले छोटे कीटों के काटने से होती है। इसके लक्षण भी लेप्टोस्पायरोसिस जैसे ही होते हैं। इसमें काटने वाले स्थान पर काला निशान या पपड़ी पड़ जाती है। शरीर पर लाल चकत्ते, गिल्टी में सूजन हो जाती है। इससे बचने के लिए आसपास की घास, झाड़ियां को साफ करें, त्वचा पर कीट निवारक क्रीम लगाएं और झाड़ियों या घनी घास वाली जगहों पर बैठने से बचें।