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लोकसभा चुनाव में नहीं बना नया कीर्तिमान, रोचक हुआ मैनपुरी का 'महासंग्राम'
Thu, 25 Apr 2019 08:20 AM IST
Abhishek Saxena
नीलेश शर्मा, अमर उजाला, मैनपुरी
नीलेश शर्मा, अमर उजाला, मैनपुरी
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 25 Apr 2019 08:20 AM IST
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मुलायम सिंह यादव फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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मैनपुरी से गठबंधन के प्रत्याशी सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव सैफई में वोट डालने पहुंचे तो उनका चेहरा खिला हुआ था। चेहरे पर चिंता की एक भी लकीर नहीं थी। सपाइयों ने इसी से अंदाजा लगा लिया कि नेताजी के पास पक्की रिपोर्ट है। सपा नेताओं की जुबां पर भी जीत के दावे रहे। हालांकि भाजपाइयों का कहना था कि मुकाबला हुआ है, हार जीत का पता 23 मई को ही चल पाएगा।
सपा प्रत्याशी मुलायम सिंह यादव, भाजपा प्रत्याशी प्रेम सिंह शाक्य
मैनपुरी में पांच विधान सभा क्षेत्र हैं। जसवंत नगर, किशनी, करहल, भोगांव और सदर। जसवंत नगर में सपा के बूथों पर भारी भीड़ नजर आई। कई जगह भाजपा के बूथ सूने पड़े थे। सैफई में तो भाजपा के बूथ पर शाम तक इक्का दुक्का लोग ही नजर आए। इसी से अंदाजा लगाया जा रहा था कि साइकिल की रफ्तार यहां क्या रही होगी? सैफई में ही मुलायम सिंह यादव वोट डालने के लिए पहुंचे थे। उनका चेहरा खिला हुआ था। उनकेसमर्थक वी फोर विक्ट्री का निशान बना रहे थे। इस क्षेत्र में पिछले चुनावों में सपा को दलित वोट बहुत कम मिलता था। इस बार मायावती की अपील का असर दिखा।
मुलायम सिंह यादव के साथ अखिलेश यादव फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
करहल, किशनी और मैनपुरी सदर में भी सपाई बूथों पर भीड़ थी। भाजपा को परंपरागत वोट मिल रहे थे, ऐसा इसलिए लग रहा है क्योंकि भाजपाई पूरी तरह से सक्रिय थे और वोटरों को बूथ तक ले जा रहे थे। भोगांव में कहानी कुछ अलग थी। इस विधान सभा क्षेत्र को सपा की कमजोर कड़ी कहा जाता है। यहां पिछले चुनावों में साइकिल की रफ्तार धीमी रही है। भाजपा को काफी वोट मिलता रहा है।
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प्रेम सिंह शाक्य और मुलायम सिंह यादव (फाइल)
इस बार भाजपा यहां से बड़ी उम्मीद लगाए है। गठबंधन केबावजद भाजपा अपना वोट बचाने में कामयाब रही। ं भाजपाई भी उम्मीदवार प्रेम सिंह शाक्य की जीत का दावा कर रहे हैं। भाजपाई इस दावे का आधार शाक्य वोट और भाजपा का परंपरागत वोट बता रहे हैं। उनका कहना है कि मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में महिलाओं के वोट उन्हें मिल रहे हैं। अनुसूचित जाति ने भी साथ दिया है।
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वहीं सपा परंपरागत यादव और मुस्लिम वोट साथ होने के साथ ही जीत का आधार दलित वोट बता रहे हैं। उनका कहना है कि बसपा से गठबंधन और मायावती की अपील से उन्हें लाभ हो रहा है। कुल मिलाकर चुनाव के बाद तरह तरह के दावे हो रहे हैं, लेकिन जीत को लेकर हर किसी की नजर मतगणना पर टिकी है। 23 मई को स्पष्ट हो जाएगा कि मैनपुरी की जनता ने किसे अपना सांसद चुना है।