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आगरा को मिला बड़ा तोहफा: सूर सरोवर पक्षी विहार का बढ़ेगा दायरा, 804 हेक्टेयर में फैलेगी हरियाली
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 29 Apr 2026 10:06 AM IST
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सार
सात साल की कानूनी लड़ाई के बाद सूर सरोवर पक्षी विहार का दायरा 403 से बढ़कर 804 हेक्टेयर होने जा रहा है। इस विस्तार से जैव विविधता संरक्षण, पक्षियों के सुरक्षित आवास और पर्यावरण सुधार को बड़ा लाभ मिलेगा।
सूर सरोवर पक्षी विहार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सात साल तक पर्यावरण मंत्रालय और वन्य जीव विभाग में लड़ाई लड़ने के बाद मई माह से सूर सरोवर पक्षी विहार का दायरा 403 हेक्टेयर से बढ़कर 804 हेक्टेयर हो जाएगा। पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता की नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दायर याचिका पर प्रदेश सरकार 1 मई से पहले ही सूर सरोवर पक्षी विहार का दायरा बढ़ाने के लिए अधिसूचना जारी कर देगी। प्रदेश के चीफ कंजरवेटर संजीव कुमार ने एनजीटी में यह हलफनामा दाखिल किया है।
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चिकित्सक डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि बीते साल प्रदेश सरकार ने एनजीटी में सूर सरोवर पक्षी विहार का दायरा 803 हेक्टेयर तक बढ़ाने वाली अधिसूचना की टाइम लाइन बताई थी। इसमें दावा किया गया था कि वन्य जीव संरक्षण 1972 के तहत अधिसूचना के लिए जरूरी सभी धाराएं एक मई 2026 तक पूरी कर ली जाएंगी। चीफ कंजरवेटर ने एनजीटी में दाखिल किए अपने हलफनामे में कहा है कि 14.5025 हेक्टेयर जमीन पर धारा 26ए (1) जारी कर प्रदेश सरकार को अंतिम अधिसूचना के लिए भेज दिया गया है। एक मई से पहले ही इसकी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
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वर्ष 2027 तक का मांगा था वक्त
सूर सरोवर पक्षी विहार अभी 403 हेक्टेयर में फैला है, लेकिन इसमें सूरदास वन ब्लॉक का हिस्सा बढ़ाने के बाद यह 804 हेक्टेयर हो जाएगा। एनजीटी में याचिका दायर करने के बाद प्रदेश सरकार ने अधिसूचना के लिए वर्ष 2027 तक का वक्त मांगा था। एनजीटी की नाराजगी के बाद प्रदेश सरकार ने अपना रुख बदला और अंतिम अधिसूचना जारी करने का समय घटाकर मई 2026 किया।
सूर सरोवर पक्षी विहार अभी 403 हेक्टेयर में फैला है, लेकिन इसमें सूरदास वन ब्लॉक का हिस्सा बढ़ाने के बाद यह 804 हेक्टेयर हो जाएगा। एनजीटी में याचिका दायर करने के बाद प्रदेश सरकार ने अधिसूचना के लिए वर्ष 2027 तक का वक्त मांगा था। एनजीटी की नाराजगी के बाद प्रदेश सरकार ने अपना रुख बदला और अंतिम अधिसूचना जारी करने का समय घटाकर मई 2026 किया।
804 हेक्टेयर में हैं तीन हिस्से
सूर सरोवर पक्षी विहार वर्ष 1991 में बनाया गया था, तब इसका क्षेत्रफल 403.09 हेक्टेयर था। इससे सटा सूरदास वन ब्लॉक का 380.558 हेक्टेयर पक्षी विहार में जोड़ा गया है। तीसरा हिस्सा 14.5025 हेक्टेयर का है। सबसे ज्यादा विवाद इसी जमीन के लिए था। डीएम ने 14 हेक्टेयर जमीन से अवैध निर्माण हटाने और रोकने के लिए संयुक्त कमेटी का गठन किया था, जिसने पाया कि इस जमीन पर निर्माण और प्रतिबंधित गतिविधियां नहीं हो रही हैं। रुनकता में खसरा नंबर 4 और एक पर 0.949 हेक्टेयर जमीन, चौमा फरह में 13.486 हेक्टेयर और रुनकता में खसरा नंबर 18 की 0.0675 हेक्टेयर जमीन सूर सरोवर पक्षी विहार का हिस्सा बनेगी।
सूर सरोवर पक्षी विहार वर्ष 1991 में बनाया गया था, तब इसका क्षेत्रफल 403.09 हेक्टेयर था। इससे सटा सूरदास वन ब्लॉक का 380.558 हेक्टेयर पक्षी विहार में जोड़ा गया है। तीसरा हिस्सा 14.5025 हेक्टेयर का है। सबसे ज्यादा विवाद इसी जमीन के लिए था। डीएम ने 14 हेक्टेयर जमीन से अवैध निर्माण हटाने और रोकने के लिए संयुक्त कमेटी का गठन किया था, जिसने पाया कि इस जमीन पर निर्माण और प्रतिबंधित गतिविधियां नहीं हो रही हैं। रुनकता में खसरा नंबर 4 और एक पर 0.949 हेक्टेयर जमीन, चौमा फरह में 13.486 हेक्टेयर और रुनकता में खसरा नंबर 18 की 0.0675 हेक्टेयर जमीन सूर सरोवर पक्षी विहार का हिस्सा बनेगी।
अवैध निर्माणों पर लगेगी रोक
याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार को एक फरवरी से एक मई के बीच अंतिम अधिसूचना जारी करनी थी। शहर की हरियाली के लिए यह बड़ा कदम है। सूर सरोवर का दायरा बढ़ने का असर हमारे पर्यावरण पर पड़ेगा। इसका इको सेंसिटिव जोन तय होना बाकी है, जिसके बाद इस क्षेत्र में होने वाले अवैध निर्माणों पर रोक लगेगी।
याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार को एक फरवरी से एक मई के बीच अंतिम अधिसूचना जारी करनी थी। शहर की हरियाली के लिए यह बड़ा कदम है। सूर सरोवर का दायरा बढ़ने का असर हमारे पर्यावरण पर पड़ेगा। इसका इको सेंसिटिव जोन तय होना बाकी है, जिसके बाद इस क्षेत्र में होने वाले अवैध निर्माणों पर रोक लगेगी।
दायरा बढ़ने के ये हैं फायदा
जैव विविधता का संरक्षण होगा, दोगुने क्षेत्रफल से पक्षियों के लिए बफर जोन बढ़ेगा, उनके घोंसले बनाने और प्रजनन के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध होगा। नए वॉच टावर और नेचर ट्रेल्स विकसित किए जा सकेंगे, शोधकर्ताओं के लिए ज्यादा उपयोगी होगा। वहीं यह जंगल वायु प्रदूषण से बचाव में सहायक होगा।
जैव विविधता का संरक्षण होगा, दोगुने क्षेत्रफल से पक्षियों के लिए बफर जोन बढ़ेगा, उनके घोंसले बनाने और प्रजनन के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध होगा। नए वॉच टावर और नेचर ट्रेल्स विकसित किए जा सकेंगे, शोधकर्ताओं के लिए ज्यादा उपयोगी होगा। वहीं यह जंगल वायु प्रदूषण से बचाव में सहायक होगा।

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