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दर्द की ये दवाएं न खरीदें: बिक्री पर लगाई गई रोक, ऑक्सालजिन डीपी टैबलेट में भी गड़बड़ी; केस हुआ दर्ज
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 25 May 2026 09:42 AM IST
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सार
आगरा में औषधि विभाग ने नकली दर्द निवारक दवाओं की सप्लाई करने वाले बड़े रैकेट का खुलासा किया है, जो रुड़की की फार्मा कंपनी से संचालित हो रहा था। जांच में नकली ऑक्सालजिन डीपी टैबलेट मिलने के बाद कई दवा विक्रेताओं और सप्लायरों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई है।
औषधि विभाग की टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा में औषधि विभाग की टीम ने नकली दवा सप्लाई करने वाले रैकेट का खुलासा किया है। रुड़की की फार्मा संचालक, हॉकर (सप्लायर) और मेडिकल फर्म का संचालक नामी कंपनी के नाम से नकली दवा बनवाकर बिक्री करते थे। आगरा, अलीगढ़ और रुड़की के लोगों के तार जुड़े हैं। थाना कोतवाली में मेडिकल एजेंसी संचालक, सप्लायर और दवाएं तैयार करने वाली रुड़की की कंपनी के दो निदेशकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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आगरा-इटावा के औषधि निरीक्षक नीलेश शर्मा ने अमिता विहार, कमला नगर निवासी श्री मेडिकल एजेंसी के संचालक सुरेंद्र गुप्ता, अलीगढ़ के रामघाट निवासी मयंक गुप्ता, उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित नारायण विहार निवासी अन्नू अरोड़ा और मुजफ्फर नगर के अंसारी रोड निवासी संयम अरोड़ा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।
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निरीक्षक के मुताबिक, नामी कंपनी के प्रतिनिधि ने ऑक्सालगिन व डीपी टैबलेट नकली की बिक्री की शिकायत की थी। इस पर टीम ने 6 मई को कम्मू टोला स्थित श्री मेडिकल एजेंसी से दवा के 13160 पत्ते पकड़े थे। संचालक सुरेंद्र कुमार गुप्ता ने इसकी खरीद के बिल दिखाए, लेकिन बिक्री अधिक पाई गई। संचालक ने मेडिकल स्टोर के पास ही गोदाम बनाया हुआ था। सुरेंद्र गुप्ता और उनका बेटा अंशुल गोदाम का लाइसेंस नहीं दिखा सके। फर्म में कमियां मिलने पर दवाओं की खरीद और बिक्री पर रोक लगा दी गई है। गोदाम को भी सील कर दिया गया।
बस से आती थीं दवाएं, कैश में होता था भुगतान
टीम को पूछताछ में श्री मेडिकल एजेंसी के संचालक सुरेंद्र गुप्ता ने बताया कि उत्तराखंड के मयंक गुप्ता से बिना बिल के दो साल से दवाएं खरीद रहे हैं। भुगतान कैश में करते हैं। 17 हजार से अधिक पत्ते दर्द निवारक दवा के खरीद चुके हैं। 13 हजार पत्ते मुंबई से भी खरीदे गए। मयंक गुप्ता अलीगढ़ का रहने वाला है। टीम उसके आवास पर पहुंची थी।
टीम को पूछताछ में श्री मेडिकल एजेंसी के संचालक सुरेंद्र गुप्ता ने बताया कि उत्तराखंड के मयंक गुप्ता से बिना बिल के दो साल से दवाएं खरीद रहे हैं। भुगतान कैश में करते हैं। 17 हजार से अधिक पत्ते दर्द निवारक दवा के खरीद चुके हैं। 13 हजार पत्ते मुंबई से भी खरीदे गए। मयंक गुप्ता अलीगढ़ का रहने वाला है। टीम उसके आवास पर पहुंची थी।
पूछताछ में मयंक गुप्ता ने बताया कि उन्हें जेम पर मेडिकल एजेंसी का लाइसेंस मिला हुआ है। यह वर्ष 2028 तक है। मयंक ही रुड़की स्थित फैक्टरी से नकली दवा बनवाता था। उसी के लैपटॉप और मोबाइल से रुड़की की फार्मा का पता चला है। टीम रुड़की पहुंची और कंपनी के डंप यार्ड से पैकेजिंग मटेरियल, प्रिंटिंग सामग्री और मशीन ट्रायल से संबंधित अवशेष सामग्री बरामद की।
नकली दवा के नुकसान
सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि नामी कंपनियां वैज्ञानिक ढंग से दावों का निर्माण करती हैं। नकली दवा में जरूरी आवश्यक तत्वों की कमी होती है। इससे संबंधित बीमारी पर असर कम होता है। कई बार मरीज पर दवाओं का दुष्प्रभाव भी हो सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि नामी कंपनियां वैज्ञानिक ढंग से दावों का निर्माण करती हैं। नकली दवा में जरूरी आवश्यक तत्वों की कमी होती है। इससे संबंधित बीमारी पर असर कम होता है। कई बार मरीज पर दवाओं का दुष्प्रभाव भी हो सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।