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नगर परिक्रमा शुरू: सड़कों पर दिखेगा भक्तों का सैलाब, रविवार को ही क्यों लगती है ये परिक्रमा; महंत ने बताई वजह
Sun, 09 Aug 2026 07:25 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 09 Aug 2026 07:25 PM IST
सार
आगरा में रविवार शाम से भोले के भक्तों का सड़कों पर उमड़ना शुरू हो गया। रातभर शिव भक्त नगर की परिक्रमा कर प्रमुख शिवालयों में दर्शन करेंगे।
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सड़कों पर शिवभक्त।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा में रविवार को 18 कोस की परिक्रमा शुरू हुई। इस धार्मिक परंपरा में श्रद्धालु शहर के चारों कोनों में स्थित प्रमुख शिवालयों के दर्शन करते हुए परिक्रमा पूरी करते हैं। खास बात यह है कि यह परिक्रमा रविवार को ही शुरू की जाती है। इसके पीछे धार्मिक मान्यता और सूर्य से जुड़ी आस्था बताई जाती है।
मनकामेश्वर मंदिर के महंत योगेश पुरी ने बताया कि रविवार सूर्य का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन 18 कोस की परिक्रमा करने से व्यक्ति के जीवन में सूर्य के समान तेज और ऊर्जा आती है। इसी धार्मिक मान्यता के कारण रविवार को परिक्रमा के लिए चुना गया है।
उन्होंने बताया कि परिक्रमा की एक और महत्वपूर्ण कड़ी सोमवार से जुड़ी है। सावन के दूसरे सोमवार को भी इस परिक्रमा की परंपरा है। तीसरे सोमवार को शुभ नहीं माना जाता, जबकि चौथा सोमवार सावन का अंतिम सोमवार होता है। इसलिए दूसरे सोमवार को परिक्रमा के लिए उपयुक्त माना गया है।
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घर के शिवालय से शुरू, वहीं होती है समाप्त
महंत योगेश पुरी के अनुसार 18 कोस की परिक्रमा श्रद्धालु अपने घर के शिवालय से शुरू करते हैं। इसके बाद आगरा के चारों दिशाओं में स्थित शिवालयों के दर्शन करते हुए परिक्रमा मार्ग पूरा किया जाता है। सभी प्रमुख शिवालयों के दर्शन के बाद श्रद्धालु वापस अपने घर के शिवालय पहुंचते हैं और वहीं परिक्रमा पूरी होती है।
इस परिक्रमा में केवल दूरी तय करना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि आगरा के प्राचीन शिवालयों के दर्शन और भगवान शिव के प्रति आस्था के साथ धार्मिक परंपरा का निर्वहन भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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मनकामेश्वर मंदिर के महंत योगेश पुरी ने बताया कि रविवार सूर्य का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन 18 कोस की परिक्रमा करने से व्यक्ति के जीवन में सूर्य के समान तेज और ऊर्जा आती है। इसी धार्मिक मान्यता के कारण रविवार को परिक्रमा के लिए चुना गया है।
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उन्होंने बताया कि परिक्रमा की एक और महत्वपूर्ण कड़ी सोमवार से जुड़ी है। सावन के दूसरे सोमवार को भी इस परिक्रमा की परंपरा है। तीसरे सोमवार को शुभ नहीं माना जाता, जबकि चौथा सोमवार सावन का अंतिम सोमवार होता है। इसलिए दूसरे सोमवार को परिक्रमा के लिए उपयुक्त माना गया है।
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घर के शिवालय से शुरू, वहीं होती है समाप्त
महंत योगेश पुरी के अनुसार 18 कोस की परिक्रमा श्रद्धालु अपने घर के शिवालय से शुरू करते हैं। इसके बाद आगरा के चारों दिशाओं में स्थित शिवालयों के दर्शन करते हुए परिक्रमा मार्ग पूरा किया जाता है। सभी प्रमुख शिवालयों के दर्शन के बाद श्रद्धालु वापस अपने घर के शिवालय पहुंचते हैं और वहीं परिक्रमा पूरी होती है।
इस परिक्रमा में केवल दूरी तय करना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि आगरा के प्राचीन शिवालयों के दर्शन और भगवान शिव के प्रति आस्था के साथ धार्मिक परंपरा का निर्वहन भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है।