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शोध में खुलासा: पेट में पहुंच रही प्लास्टिक, महिलाओं में बढ़ रहा बांझपन; घर से आज ही बाहर करें ये चीजें

Sun, 09 Aug 2026 12:07 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Sun, 09 Aug 2026 12:07 PM IST
सार

मेडिकल काॅलेज में किए गए शोध में बांझपन पीड़ित महिलाओं में बिस्फेनॉल रसायन करीब चार गुना अधिक मिला। ये रसायन प्लास्टिक में पाया जाता है। पूछताछ में पाया कि इन महिलाओं के घर में प्लास्टिक का सामान अधिक उपयोग होता है।

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SN Medical College study reveals Infertility on rise due to plastic reaching women wombs
मां बनना होता जा रहा है मुश्किल - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

रसोई में कप, टिफिन, वॉटर कूलर, बोतल समेत अन्य बर्तन प्लास्टिक के हैं तो तत्काल इन्हें बाहर करिए। ये आपके आंगन में किलकारी गूंजने में बाधक हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग के चिकित्सकों के शोध में सामने आया है कि रोजाना दो सिम (मोबाइल सिम) के बराबर प्लास्टिक पेट में पहुंचकर हॉर्मोंस को गड़बड़ा रहा है। इससे महिलाओं की कोख सूनी रहने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
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स्त्री रोग विभाग में 20 से 40 साल की 352 महिलाओं (230 शहरी और 122 ग्रामीण) पर शोध किया गया। इनमें 240 गृहिणी और 112 कामकाजी रहीं। 176 संतान वालीं (128 के एक और 48 के दो बच्चे) और 176 महिलाएं बांझपन से पीड़ित रहीं। सितंबर 2024 से मार्च 2026 तक किए शोध में इनके रक्त-यूरिन की हर तीन महीने में दिल्ली की मेडिकल रिसर्च यूनिट की लैब में जांच कराई। इसमें बांझपन पीड़ित महिलाओं में अधिकतम 5.24 प्रति लीटर बिस्फेनॉल-ए रसायन (बीपीए) और बाकी में 1.5 प्रति लीटर मिला। 
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औसतन सप्ताहभर में 5-7 ग्राम तक प्लास्टिक शरीर में पहुंच रहा था। इस तरह रोजाना दो सिम के बराबर प्लास्टिक शरीर में पहुंच रहा था। बांझपन पीड़ित महिलाओं में बिस्फेनॉल रसायन करीब चार गुना अधिक मिला। ये रसायन प्लास्टिक में पाया जाता है। पूछताछ में पाया कि इन महिलाओं के घर में प्लास्टिक का सामान अधिक उपयोग होता है।

 

अंडाणुओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा असर
स्त्री रोग विभाग की डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि बिस्फेनॉल का उपयोग पॉलीकार्बोनेट प्लास्टिक और एपॉक्सी रेजिन के निर्माण में होता है। ये महिलाओं के अंडाणुओं की गुणवत्ता पर असर डाल रहा है। बांझपन पीड़ित की गर्भधारण संबंधी अन्य जांच अधिकांश की दुरुस्त मिलीं। इससे आशंका है कि इसी के चलते बांझपन की दिक्कत पैदा हुई।

 
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महिलाओं में पुरुष हार्मोंस भी बढ़े मिले
शोधार्थी डॉ. प्रतिमा सिंह ने बताया कि बांझपन से जूझ रही महिलाओं के हार्मोंस भी प्रभावित मिले। इनमें पुरुष हार्मोंस की दर बढ़ी हुई थी। अंडाणुओं की सक्रियता और गुणवत्ता खराब पाई गई। इससे गर्भधारण की क्षमता कम मिली। प्लास्टिक छोड़ने और इलाज से कई महिलाओं के गर्भधारण कराने में सफलता भी मिली।

 

जानें, क्या है बिस्फेनॉल-ए रसायन
बिस्फेनॉल सिंथेटिक कार्बनिक रसायनों का एक समूह है। इनका मुख्य उपयोग पॉलीकार्बोनेट प्लास्टिक और एपॉक्सी रेजिन बनाने के लिए किया जाता है। इनमें सबसे चर्चित रसायन बिस्फेनॉल ए है। इसका उपयोग पानी की बोतलें, खाद्य कंटेनर और डिब्बों की अंदरुनी परत को मजबूत करने में होता है।

ये दिए सुझाव:
बच्चों को प्लास्टिक की बोतल, टिफिन में खाना न दें।
नॉन स्टिक कड़ाही में प्लास्टिक की चम्मच बंद करें।
पॉलिथीन में खाने-पीने का कोई सामान पैक न कराएं।
प्लास्टिक की बजाय धातु-कांच के बर्तन उपयोग करें।
घी, तेल समेत अन्य तरल सामग्री प्लास्टिक की कट्टी में न रखें।


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