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UP: इन प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर नहीं हैं मेडिकल बूथ, फाइलों में कैद प्रस्ताव; कौन करेगा यात्रियों की मदद?
Tue, 18 Aug 2026 09:03 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 18 Aug 2026 09:03 AM IST
सार
आगरा कैंट पर रोजाना करीब 48 हजार यात्री सफर करते हैं, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने पर यात्रियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा के लिए इंतजार करना पड़ता है। रेलवे का कहना है कि स्टेशन मास्टर को प्राथमिक उपचार की व्यवस्था के निर्देश हैं और जरूरत पड़ने पर रेलवे अस्पताल से डॉक्टर बुलाया जाता है।
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आगरा कैंट स्टेशन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
रेलवे विश्वस्तरीय यात्री सुविधाओं का दावा करता है, लेकिन आगरा के प्रमुख स्टेशनों पर अचानक तबीयत बिगड़ने पर यात्रियों को तत्काल चिकित्सा सुविधा तक नहीं मिल पा रही है। आगरा कैंट, आगरा फोर्ट, ईदगाह और राजामंडी जैसे स्टेशनों पर मेडिकल बूथ की सुविधा नहीं है। डॉक्टर, दवा, स्ट्रेचर और एंबुलेंस उपलब्ध कराने का प्रस्ताव वर्ष 2021 से फाइलों में कैद है। ऐसे में पिछले चार महीनों में चिकित्सकीय सहायता मांगने वाले 2,189 यात्रियों में 496 को समय पर मदद नहीं मिलना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रेलवे का दावा है कि इन यात्रियों ने सहायता लेने से इन्कार कर दिया था।
ए-वन ग्रेड आगरा कैंट पर रोजाना करीब 48 हजार, आगरा फोर्ट से 13 हजार, ईदगाह जंक्शन से 1,650 और राजामंडी से 4,700 यात्री सफर करते हैं। पिछले महीने कैंट पर एक पर्यटक बेहोश हो गया था। हाल ही में ईदगाह स्टेशन पर अवध एक्सप्रेस में एक यात्री की मौत हुई। 10 अगस्त को तमिलनाडु एक्सप्रेस में केरल की 57 वर्षीय महिला यात्री की तबीयत बिगड़ने पर रेल मदद से डॉक्टर मांगा गया, लेकिन दो घंटे बाद सहायता मिली।
इलाज के दौरान एसएन में उनकी मौत हो गई। गत वर्ष रेलवे ने निजी अस्पताल से करार कर स्टेशन परिसर में डॉक्टर-नर्सिंग कर्मचारी, ट्रेन तक प्राथमिक उपचार, दवा, स्ट्रेचर और एंबुलेंस उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी, लेकिन वह भी धरातल पर नहीं उतरी। जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने बताया कि मेडिकल बूथ नहीं है। स्टेशन मास्टर को प्राथमिक उपचार की व्यवस्था के निर्देश हैं और जरूरत पर रेलवे अस्पताल से डॉक्टर बुलाया जाता है।
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ए-वन ग्रेड आगरा कैंट पर रोजाना करीब 48 हजार, आगरा फोर्ट से 13 हजार, ईदगाह जंक्शन से 1,650 और राजामंडी से 4,700 यात्री सफर करते हैं। पिछले महीने कैंट पर एक पर्यटक बेहोश हो गया था। हाल ही में ईदगाह स्टेशन पर अवध एक्सप्रेस में एक यात्री की मौत हुई। 10 अगस्त को तमिलनाडु एक्सप्रेस में केरल की 57 वर्षीय महिला यात्री की तबीयत बिगड़ने पर रेल मदद से डॉक्टर मांगा गया, लेकिन दो घंटे बाद सहायता मिली।
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इलाज के दौरान एसएन में उनकी मौत हो गई। गत वर्ष रेलवे ने निजी अस्पताल से करार कर स्टेशन परिसर में डॉक्टर-नर्सिंग कर्मचारी, ट्रेन तक प्राथमिक उपचार, दवा, स्ट्रेचर और एंबुलेंस उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी, लेकिन वह भी धरातल पर नहीं उतरी। जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने बताया कि मेडिकल बूथ नहीं है। स्टेशन मास्टर को प्राथमिक उपचार की व्यवस्था के निर्देश हैं और जरूरत पर रेलवे अस्पताल से डॉक्टर बुलाया जाता है।
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