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UP: मृत सचिव के पते पर भेजा था नोटिस, हाईकोर्ट ने CBSE-WSO का पंजीकरण निरस्त करने का आदेश किया रद्द
Sat, 27 Dec 2025 09:22 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 27 Dec 2025 09:22 AM IST
सार
सीबीएसई बोर्ड स्कूल गेम्स वेलफेयर सोसाइटी (सीबीएसई-डब्ल्यूएसओ) का पंजीकरण निरस्त करने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहत दी है। फैसले में उप निबंधक कार्यालय की ओर से 5 दिसंबर 2025 को जारी आदेश को सेट असाइड किया गया है। साथ ही संस्था के सचिव को जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
उप निबंधक कार्यालय ने 5 दिसंबर को पत्र जारी कर संस्था का पंजीकरण रद्द करने की कार्रवाई की थी। इसके बाद 8 दिसंबर को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अपने संबद्ध विद्यालयों को पत्र जारी कर सीबीएसई-डब्ल्यूएसओ की ओर से आयोजित या प्रचारित किसी भी खेल गतिविधि से दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए थे।
इस कार्रवाई के खिलाफ सीबीएसई-डब्ल्यूएसओ के सचिव ऋषि अवस्थी ने 11 दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जिस पर 18 दिसंबर को सुनवाई हुई। इस दौरान फैसला सुनाया गया कि उप निबंधन कार्यालय की आरे से जिस व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, वे सुरेश चंद्र शर्मा, संस्था के पूर्व सचिव थे, जिनका निधन वर्ष 2022 में हो चुका है। साथ ही एड्रेस बदलने के पेपर भी लगाए गए थे। इसके बावजूद नोटिस पुराने पते पर ही भेजे गए।
इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने 5 दिसंबर को जारी आदेश को सेट असाइड कर दिया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि संस्था के वर्तमान सचिव को दो सप्ताह के भीतर कारण बताओ नोटिस का जवाब देने का अवसर दिया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो प्रकरण को एक्स पार्टी मानते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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इस कार्रवाई के खिलाफ सीबीएसई-डब्ल्यूएसओ के सचिव ऋषि अवस्थी ने 11 दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जिस पर 18 दिसंबर को सुनवाई हुई। इस दौरान फैसला सुनाया गया कि उप निबंधन कार्यालय की आरे से जिस व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, वे सुरेश चंद्र शर्मा, संस्था के पूर्व सचिव थे, जिनका निधन वर्ष 2022 में हो चुका है। साथ ही एड्रेस बदलने के पेपर भी लगाए गए थे। इसके बावजूद नोटिस पुराने पते पर ही भेजे गए।
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इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने 5 दिसंबर को जारी आदेश को सेट असाइड कर दिया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि संस्था के वर्तमान सचिव को दो सप्ताह के भीतर कारण बताओ नोटिस का जवाब देने का अवसर दिया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो प्रकरण को एक्स पार्टी मानते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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