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UP: एक गलती से खाली हो सकता है आपका बैंक खाता, इन बातों का रखें ध्यान; चाचा चौधरी ने दी ये सलाह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 12 Jun 2026 11:28 AM IST
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सार
साइबर ठगी से बचाव के लिए बैंक अब ग्राहकों को ‘चाचा चौधरी साइबर धमाका’ कॉमिक्स के जरिए जागरूक कर रहे हैं। इसमें ओटीपी, बैंक डिटेल, फर्जी लिंक और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर फ्रॉड से बचने के आसान तरीके बताए गए हैं।
साइबर ठगी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चाचा चौधरी घर पर किताब पढ़ रहे हैं। तभी उनका फोन बजता है। दूसरी तरफ से आवाज आती है, मैं आपके बैंक से बोल कर रहा हूं। आपके खाते का विवरण सत्यापित करना है। अरे... एक और स्कैम। वो फोन काट देते हैं। तभी साबू आता है। कहता है चाचा जी, मुझे अभी बैंक से फोन आया है। क्या मुझे उन्हें अपना बैंक विवरण देना चाहिए...। चाचा बोलते हैं कभी नहीं। यह जानकारी बैंक चाचा चौधरी की कॉमिक्स के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं। गृह मंत्रालय की पहल पर बैंक ग्राहकों को खाता खुलने पर मिलने वाली किट के साथ चाचा चौधरी की कॉमिक्स भी उपलब्ध करा रहे हैं। इसका नाम चाचा चौधरी साइबर धमाका रखा गया है।
कैसे करें खाते के विवरण की सुरक्षा
बैंक पासबुक, चेक या कोई भी खाता संबंधित दस्तावेज और ऑनलाइन बैंकिंग की जानकारी अनजान व्यक्ति से साझा नहीं करें।
कोई सरकारी कर्मचारी बताकर आधार, पैन और ओटीपी की जानकारी मांगता है तो नहीं देनी चाहिए।
कभी भी क्रेडिट, डेबिट कार्ड या सीवीवी फोन का विवरण किसी के साथ साझा न करें।
गूगल पर मौजूद फर्जी ग्राहक सेवा के नंबरों से सावधान रहें। गूगल सर्च पर भरोसा नहीं करना चाहिए। आधिकारिक वेबसाइट से ही संपर्क करें।
बैंक खाता कभी किराये पर न दें। कमीशन के लिए साझा न करें। यह गैरकानूनी है।
फर्जी पुलिस और डिजिट अरेस्ट से डरे नहीं। आरोपी ड्रग पैकेज व आतंकी गतिविधियों में होने का डर दिखाते हैं।
साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल करना चाहिए या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
बैंक पासबुक, चेक या कोई भी खाता संबंधित दस्तावेज और ऑनलाइन बैंकिंग की जानकारी अनजान व्यक्ति से साझा नहीं करें।
कोई सरकारी कर्मचारी बताकर आधार, पैन और ओटीपी की जानकारी मांगता है तो नहीं देनी चाहिए।
कभी भी क्रेडिट, डेबिट कार्ड या सीवीवी फोन का विवरण किसी के साथ साझा न करें।
गूगल पर मौजूद फर्जी ग्राहक सेवा के नंबरों से सावधान रहें। गूगल सर्च पर भरोसा नहीं करना चाहिए। आधिकारिक वेबसाइट से ही संपर्क करें।
बैंक खाता कभी किराये पर न दें। कमीशन के लिए साझा न करें। यह गैरकानूनी है।
फर्जी पुलिस और डिजिट अरेस्ट से डरे नहीं। आरोपी ड्रग पैकेज व आतंकी गतिविधियों में होने का डर दिखाते हैं।
साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल करना चाहिए या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
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डीसीपी आदित्य सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी लालच में फंसाते हैं। पुलिस व सीबीआई अधिकारी बनकर गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। परिचित बनकर पैसा ट्रांसफर करा लेते हैं। कमीशन का लालच देकर खाते खुलवा लेते हैं। इनका इस्तेमाल ठगी में करते हैं। बैंक इस संबंध में ही जागरूक कर रही हैं।
साइबर ठगी में इस्तेमाल के शक में बंद कर दिया सिम
आवास विकास कॉलोनी के 80 वर्षीय सतीश चंद का सिम साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने के शक में बंद कर दिया गया। वृद्धावस्था में बुजुर्ग सिम प्रदाता कंपनी के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि सिम का इस्तेमाल कहां और कब हुआ वो नहीं जानते हैं। बिना जांच के सिम को बंद करा दिया गया। सतीश चंद ने बताया कि पत्नी लक्ष्मी के साथ अकेले रहते हैं। उनका एक सिम था, जिससे व्यापार चलता था। तीन मार्च को अचानक सिम बंद हो गया। इसके बारे में जानकारी के लिए वो कंपनी के ऑफिस पहुंचे। कर्मचारी ने बताया कि सिम से साइबर ठगी की आशंका है। इसलिए उसे बंद करा दिया गया है।
आवास विकास कॉलोनी के 80 वर्षीय सतीश चंद का सिम साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने के शक में बंद कर दिया गया। वृद्धावस्था में बुजुर्ग सिम प्रदाता कंपनी के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि सिम का इस्तेमाल कहां और कब हुआ वो नहीं जानते हैं। बिना जांच के सिम को बंद करा दिया गया। सतीश चंद ने बताया कि पत्नी लक्ष्मी के साथ अकेले रहते हैं। उनका एक सिम था, जिससे व्यापार चलता था। तीन मार्च को अचानक सिम बंद हो गया। इसके बारे में जानकारी के लिए वो कंपनी के ऑफिस पहुंचे। कर्मचारी ने बताया कि सिम से साइबर ठगी की आशंका है। इसलिए उसे बंद करा दिया गया है।