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UP: आगरा की सड़कों पर मौत का सफर! रोज हो रहे तीन हादसे, हर दिन जा रही एक जान; डरा देंगे ये आंकड़े
Tue, 04 Aug 2026 10:34 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 04 Aug 2026 10:34 AM IST
सार
आगरा में सड़क हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है। 2023 के आंकड़ों के अनुसार जिले में 1,007 हादसों में 499 लोगों की मौत हुई और 657 घायल हुए। आर्थोपेडिक सोसाइटी के अनुसार हादसों में जान गंवाने या घायल होने वालों में करीब 70 प्रतिशत युवा हैं।
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Accident Demo
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
तेज गति, टूटी सड़कें-गड्ढे और यातायात नियमों की अनदेखी। इन वजहों से सड़क हादसे तेजी से बढ़ रहे हैं। नेशनल बोन एंड जॉइंट डे दिवस के मौके पर आगरा आर्थोपेडिक सोसाइटी ने भारत सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जिले में रोजाना औसतन तीन हादसे हो रहे हैं। इसमें एक की जान जा रही है और दो की हड्डियां टूट रही हैं।
सोसाइटी सचिव और मंडलीय सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य डॉ. संजय चतुर्वेदी ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की सड़क हादसों की वर्ष 2023 की रिपोर्ट बताती है कि जिले में 1,007 सड़क हादसे दर्ज किए गए। इनमें 499 लोगों की मौत हो गई। 657 घायल हुए, इनके हाथ-पैर, कमर, छाती की हड्डियां टूटीं, ब्रेन हेमरेज भी हुआ। विशेष बात हादसों में जान गंवाने वाले या फिर घायल होने वालों में युवाओं की संख्या करीब 70 फीसदी है। बीते तीन वर्षों में इनकी संख्या और बढ़ गई है।
अध्यक्ष डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ ने बताया कि हड्डी रोग के लिए मोटापा, लंबे समय तक बैठना या खड़े रहना, वाहन चलाना, अधिक कार्य अवधि, अनियमित दिनचर्या और आड़े-तिरछे ढंग से मोबाइल-लैपटॉप को घंटों देखना। इससे गठिया की दस्तक हो रही है। यहां तक कि हर तीसरे युवा की गर्दन, कमर, कंधे, जोड़ और मांसपेशियों में दर्द की परेशानी बन रही है।
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जागरूकता से हादसों में आई कमी
डीसीपी ट्रैफिक सोनम कुमार ने बताया कि यातायात नियमों के प्रति जागरूकता, इनको पालन कराने के लिए बरती जा रही सख्ती से हादसों में कमी आई है। इस साल जनवरी से जुलाई तक 296 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 186 लोगों की मौत हुई और 232 घायल हुए हैं। इनमें और कमी के लिए लगातार अभियान भी चलाया जा रहा है।
हादसों से बचने को इनका रखा जाए ध्यान:
सड़क की बेहतर मरम्मत हो, गड्ढे नहीं हों।
निर्माण-मरम्मत कार्य होने पर पर्याप्त संकेतक लगाए जाएं।
गड्ढा या फिर निर्माण कार्य के लिए मजबूत बैरिकेडिंग हो।
तेज गति और नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्ती हो।
वाहन चालकों के एल्कोहल टेस्ट अनिवार्य किया जाए।
एंबुलेंस, अस्पताल की बेहतर सुविधा, सभी को सीपीआर का प्रशिक्षण।
वाहन खराब होने पर तत्काल सड़कों से हटाया जाए।
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सोसाइटी सचिव और मंडलीय सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य डॉ. संजय चतुर्वेदी ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की सड़क हादसों की वर्ष 2023 की रिपोर्ट बताती है कि जिले में 1,007 सड़क हादसे दर्ज किए गए। इनमें 499 लोगों की मौत हो गई। 657 घायल हुए, इनके हाथ-पैर, कमर, छाती की हड्डियां टूटीं, ब्रेन हेमरेज भी हुआ। विशेष बात हादसों में जान गंवाने वाले या फिर घायल होने वालों में युवाओं की संख्या करीब 70 फीसदी है। बीते तीन वर्षों में इनकी संख्या और बढ़ गई है।
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अध्यक्ष डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ ने बताया कि हड्डी रोग के लिए मोटापा, लंबे समय तक बैठना या खड़े रहना, वाहन चलाना, अधिक कार्य अवधि, अनियमित दिनचर्या और आड़े-तिरछे ढंग से मोबाइल-लैपटॉप को घंटों देखना। इससे गठिया की दस्तक हो रही है। यहां तक कि हर तीसरे युवा की गर्दन, कमर, कंधे, जोड़ और मांसपेशियों में दर्द की परेशानी बन रही है।
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जागरूकता से हादसों में आई कमी
डीसीपी ट्रैफिक सोनम कुमार ने बताया कि यातायात नियमों के प्रति जागरूकता, इनको पालन कराने के लिए बरती जा रही सख्ती से हादसों में कमी आई है। इस साल जनवरी से जुलाई तक 296 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 186 लोगों की मौत हुई और 232 घायल हुए हैं। इनमें और कमी के लिए लगातार अभियान भी चलाया जा रहा है।
हादसों से बचने को इनका रखा जाए ध्यान:
सड़क की बेहतर मरम्मत हो, गड्ढे नहीं हों।
निर्माण-मरम्मत कार्य होने पर पर्याप्त संकेतक लगाए जाएं।
गड्ढा या फिर निर्माण कार्य के लिए मजबूत बैरिकेडिंग हो।
तेज गति और नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्ती हो।
वाहन चालकों के एल्कोहल टेस्ट अनिवार्य किया जाए।
एंबुलेंस, अस्पताल की बेहतर सुविधा, सभी को सीपीआर का प्रशिक्षण।
वाहन खराब होने पर तत्काल सड़कों से हटाया जाए।