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TTZ: गैर प्रदूषणकारी उद्योगों की क्या है परिभाषा, तय होने से पहले...सीपीसीबी ने जारी की नई गाइडलाइन
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 15 Apr 2025 08:48 AM IST
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सार
घर सजाने का तसव्वुर (कल्पना) तो बहुत बाद का है... पहले ये तय हो कि इस घर को बचाएं कैंसे। वसीम बरेलवी का यह शेर ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में उद्योगों पर चरितार्थ हो रहा है। फिलहाल उद्योगों की स्थापना व विस्तार पर रोक है।
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : PTI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट में 22 अप्रैल को सुनवाई है। पिछले आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने गैर प्रदूषणकारी उद्योगों की परिभाषा तय करने के लिए नेशनल इन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (नीरी) को आदेश दिए थे। 10 अप्रैल को नीरी के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. केवी जार्ज की अध्यक्षता में मंडलायुक्त सभागार में बैठक की गई।
विभिन्न औद्योगिक संगठन, प्रतिनिधियों ने अपने पक्ष रखे। जिन्हें शामिल करते हुए नीरी अपनी रिपोर्ट 22 अप्रैल से पहले सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेगी। जिसके बाद टीटीजेड में कौन से उद्योग लगेंगे और कौन से नहीं। प्रदूषणकारी उद्योग कौन से और गैर प्रदूषणकारी उद्योग कौन से, इसकी परिभाषा तय होगी।
परिभाषा तय होने से पहले ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने नए सिरे से उद्योगों का वर्गीकरण सूची जारी कर दी। गाइडलाइन बनाई है। जिसमें अब चार की जगह पांच श्रेणियों में उद्योगों को रखा है।
याचिकाकर्ता डाॅ. शरद गुप्ता का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट जब तक यह निर्णय नहीं कर देता कि प्रदूषणकारी और गैर प्रदूषणकारी उद्योग कौने से होंगे, सीपीसीबी की नई गाइडलाइन कोई मायने नहीं रखती। 2016 के बाद भी सीपीसीबी ने गाइडलाइन बनाई थी। जिसमें स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण ही सुप्रीम कोर्ट को गैर प्रदूषणकारी उद्योगों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए नीरी को आदेश देना पड़ा।
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विभिन्न औद्योगिक संगठन, प्रतिनिधियों ने अपने पक्ष रखे। जिन्हें शामिल करते हुए नीरी अपनी रिपोर्ट 22 अप्रैल से पहले सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेगी। जिसके बाद टीटीजेड में कौन से उद्योग लगेंगे और कौन से नहीं। प्रदूषणकारी उद्योग कौन से और गैर प्रदूषणकारी उद्योग कौन से, इसकी परिभाषा तय होगी।
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परिभाषा तय होने से पहले ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने नए सिरे से उद्योगों का वर्गीकरण सूची जारी कर दी। गाइडलाइन बनाई है। जिसमें अब चार की जगह पांच श्रेणियों में उद्योगों को रखा है।
याचिकाकर्ता डाॅ. शरद गुप्ता का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट जब तक यह निर्णय नहीं कर देता कि प्रदूषणकारी और गैर प्रदूषणकारी उद्योग कौने से होंगे, सीपीसीबी की नई गाइडलाइन कोई मायने नहीं रखती। 2016 के बाद भी सीपीसीबी ने गाइडलाइन बनाई थी। जिसमें स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण ही सुप्रीम कोर्ट को गैर प्रदूषणकारी उद्योगों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए नीरी को आदेश देना पड़ा।