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UP: सीजेएम ने थाना प्रभारी निरीक्षक को दिया नोटिस, लिखा-क्यों न आपको 7 दिन के लिए कारावास में भेजा जाए
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Wed, 14 Jan 2026 03:49 PM IST
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सार
सीजेएम मृत्युंजय श्रीवास्तव ने सिकंदरा थाना प्रभारी निरीक्षक को नोटिस प्रेषित करते हुए लिखा है कि क्यों ने आपको सात दिन के लिए कारावास भेजा जाए। जानें क्या है पूरा मामला...
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आरोपियों ने अधिवक्ताओं के माध्यम से अदालत में आत्मसमर्पण करने के लिए प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किए। थाना सिकंदरा से आख्या मांगी गई। कई तारीखें निकल जाने के बाद भी पुलिस ने आख्या अदालत में प्रेषित नहीं की। सीजेएम मृत्युंजय श्रीवास्तव ने सिकंदरा थाना प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार त्रिपाठी को नोटिस प्रेषित किया है, जिसमें लिखा है कि क्यों न आपको 7 दिन के लिए कारावास में भेजा जाए।
सीजेएम मृत्युंजय श्रीवास्तव की तरफ से जारी नोटिस में लिखा है कि यह तथ्य संज्ञान में आया है कि आपके थाने से आत्मसमर्पण जैसे प्रार्थनापत्रों की आख्या कई तारीखों तक प्रस्तुत नहीं की जाती है। यह शिकायत भी की जाती है कि जानबूझकर आत्मसमर्पण प्रार्थनापत्र पर आख्या न देकर लोगों को परेशान किया जाता है। उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जाती है। 15 जनवरी तक आख्या प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। इसके साथ क्यों न धारा 388 बीएनएस की कार्रवाई अमल में लाकर आपको 7 दिन के कारावास में भेजने की टिप्पणी भी की है।
ऐसी स्थिति अन्य थानों की भी बनी हुई है। गैर इरातदतन हत्या व अन्य आरोपों के मुकदमे के आरोपी थाना खेरागढ़ के गांव पहाड़ी कला निवासी देवेंद्र ने अदालत में अधिवक्ता के माध्यम से आत्मसमर्पण प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। पुलिस ने आख्या प्रस्तुत नहीं की। छत्ता पुलिस ने दिव्यांश शर्मा की एक्टिवा को अधिनियम की धारा 207 के तहत सीज किया था। इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट में धारा अंकित कर अदालत में प्रेषित नहीं की थी। इस वजह से पीड़ित की एक्टिवा अवमुक्त नहीं हो पा रही है।
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सीजेएम मृत्युंजय श्रीवास्तव की तरफ से जारी नोटिस में लिखा है कि यह तथ्य संज्ञान में आया है कि आपके थाने से आत्मसमर्पण जैसे प्रार्थनापत्रों की आख्या कई तारीखों तक प्रस्तुत नहीं की जाती है। यह शिकायत भी की जाती है कि जानबूझकर आत्मसमर्पण प्रार्थनापत्र पर आख्या न देकर लोगों को परेशान किया जाता है। उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जाती है। 15 जनवरी तक आख्या प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। इसके साथ क्यों न धारा 388 बीएनएस की कार्रवाई अमल में लाकर आपको 7 दिन के कारावास में भेजने की टिप्पणी भी की है।
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ऐसी स्थिति अन्य थानों की भी बनी हुई है। गैर इरातदतन हत्या व अन्य आरोपों के मुकदमे के आरोपी थाना खेरागढ़ के गांव पहाड़ी कला निवासी देवेंद्र ने अदालत में अधिवक्ता के माध्यम से आत्मसमर्पण प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। पुलिस ने आख्या प्रस्तुत नहीं की। छत्ता पुलिस ने दिव्यांश शर्मा की एक्टिवा को अधिनियम की धारा 207 के तहत सीज किया था। इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट में धारा अंकित कर अदालत में प्रेषित नहीं की थी। इस वजह से पीड़ित की एक्टिवा अवमुक्त नहीं हो पा रही है।