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छावनी परिषद कार्यालय में हंगामा: सुनवाई न होने पर महिलाओं ने किया आत्मदाह का प्रयास, मची अफरातफरी
Wed, 15 Jul 2026 06:43 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Wed, 15 Jul 2026 06:43 PM IST
सार
आगरा के छावनी परिषद कार्यालय में बुधवार को हंगामा मच गया। सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए दो महिलाओं ने अपने ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। कर्मचारियों ने किसी तरह दोनों महिलाओं को बचाया।
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छावनी परिषद कार्यालय में हंगामा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा छावनी परिषद में रास्ते के विवाद को लेकर पिछले दो महीने से चक्कर काट रहे पीड़ित परिवार का बुधवार को सब्र टूट गया। सुनवाई न होने और अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए दो महिलाओं ने सीईओ कार्यालय परिसर में अपने ऊपर तेल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। मौके पर मौजूद कर्मचारियों और लोगों ने तत्काल तेल की बोतल छीनकर दोनों महिलाओं को बचाया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद छावनी परिषद कार्यालय में अफरा-तफरी और हंगामे का माहौल बन गया।
कैंट स्थित छावनी परिषद कार्यालय में बुधवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब रास्ते के विवाद में कार्रवाई न होने से नाराज दो महिलाओं ने सीईओ कार्यालय परिसर में अपने ऊपर तेल डालकर आग लगाने का प्रयास किया। कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों ने तुरंत हस्तक्षेप कर महिलाओं के हाथ से तेल की बोतल छीन ली और उन्हें सुरक्षित बचा लिया। पीड़ित टिंकू सिंह ने बताया कि चार रहट बालूगंज गैस गोदाम के पास स्थित रास्ते को लेकर वह पिछले दो महीने से छावनी परिषद के चक्कर लगा रहे हैं। उनका आरोप है कि विपक्षी अनिल तोमर और रघुवंशी पक्ष ने रास्ते पर बाउंड्रीवॉल बनाकर आवागमन बाधित कर दिया था।
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शिकायत पर छावनी परिषद ने आठ जून को निर्माण ध्वस्त कर दिया, लेकिन 11 जुलाई को फिर से बाउंड्रीवॉल का निर्माण शुरू कर दिया गया। विरोध करने पर विपक्षी पक्ष ने छावनी परिषद से अनुमति मिलने की बात कही। टिंकू सिंह का कहना है कि 112 पर सूचना देने के बाद पुलिस सभी पक्षों को चौकी ले गई और विवाद करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके बाद पीड़ित पक्ष छावनी परिषद पहुंचा, जहां पहले सोमवार को आने के लिए कहा गया। सोमवार को भी सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि सीईओ दीपक मोहन ने मामले को निजी भूमि बताते हुए कोर्ट जाने की सलाह दी, जबकि पीड़ितों का कहना है कि यदि भूमि निजी है तो निर्माण की अनुमति क्यों दी गई।
पीड़ितों का आरोप है कि कार्यालय कर्मचारियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए बाहर निकाल दिया। इससे आक्रोशित होकर प्रियंका और गीता ने बुधवार को आत्मदाह का प्रयास किया। घटना के बाद कार्यालय परिसर में हंगामा मच गया। पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच कर निर्माण अनुमति निरस्त करने और रास्ता खुलवाने की मांग की है।
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कैंट स्थित छावनी परिषद कार्यालय में बुधवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब रास्ते के विवाद में कार्रवाई न होने से नाराज दो महिलाओं ने सीईओ कार्यालय परिसर में अपने ऊपर तेल डालकर आग लगाने का प्रयास किया। कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों ने तुरंत हस्तक्षेप कर महिलाओं के हाथ से तेल की बोतल छीन ली और उन्हें सुरक्षित बचा लिया। पीड़ित टिंकू सिंह ने बताया कि चार रहट बालूगंज गैस गोदाम के पास स्थित रास्ते को लेकर वह पिछले दो महीने से छावनी परिषद के चक्कर लगा रहे हैं। उनका आरोप है कि विपक्षी अनिल तोमर और रघुवंशी पक्ष ने रास्ते पर बाउंड्रीवॉल बनाकर आवागमन बाधित कर दिया था।
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शिकायत पर छावनी परिषद ने आठ जून को निर्माण ध्वस्त कर दिया, लेकिन 11 जुलाई को फिर से बाउंड्रीवॉल का निर्माण शुरू कर दिया गया। विरोध करने पर विपक्षी पक्ष ने छावनी परिषद से अनुमति मिलने की बात कही। टिंकू सिंह का कहना है कि 112 पर सूचना देने के बाद पुलिस सभी पक्षों को चौकी ले गई और विवाद करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके बाद पीड़ित पक्ष छावनी परिषद पहुंचा, जहां पहले सोमवार को आने के लिए कहा गया। सोमवार को भी सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि सीईओ दीपक मोहन ने मामले को निजी भूमि बताते हुए कोर्ट जाने की सलाह दी, जबकि पीड़ितों का कहना है कि यदि भूमि निजी है तो निर्माण की अनुमति क्यों दी गई।
पीड़ितों का आरोप है कि कार्यालय कर्मचारियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए बाहर निकाल दिया। इससे आक्रोशित होकर प्रियंका और गीता ने बुधवार को आत्मदाह का प्रयास किया। घटना के बाद कार्यालय परिसर में हंगामा मच गया। पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच कर निर्माण अनुमति निरस्त करने और रास्ता खुलवाने की मांग की है।