{"_id":"6a57104be84ecd7f090775e3","slug":"agra-slips-in-public-grievance-ranking-as-44-percent-complainants-express-dissatisfaction-2026-07-15","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: जनसुनवाई...शिकायतकर्ताओं के लिए बनी दुखदाई, कागजों में सुलझ रहीं शिकायतें, हकीकत कुछ और ही है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: जनसुनवाई...शिकायतकर्ताओं के लिए बनी दुखदाई, कागजों में सुलझ रहीं शिकायतें, हकीकत कुछ और ही है
Wed, 15 Jul 2026 10:14 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 15 Jul 2026 10:14 AM IST
सार
आगरा में जन शिकायतों के निस्तारण को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। ढाई हजार से अधिक शिकायतकर्ताओं ने प्रशासनिक कार्रवाई पर असंतोष जताया है, जबकि अधिकारियों पर केवल कागजी निस्तारण करने के आरोप लग रहे हैं। इसका असर जिले की रैंकिंग पर भी पड़ा है, जो जून में 10 स्थान नीचे खिसक गई।
विज्ञापन
कलेक्ट्रेट में लगी फरियादियों की भीड़
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केस-एक: पति की मौत के पांच साल बाद भी नहीं मिला क्लेम
धनौली निवासी फूलवती के पति भवन निर्माण श्रमिक थे। कोरोना लॉकडाउन में 30 मई 2020 को इलाज के अभाव में उनकी मौत हो गई थी। वह पांच साल से श्रमिक कार्ड पर मिलने वाले क्लेम के लिए भटक रही हैं। 16 मई 2026 को संपूर्ण समाधान दिवस में उन्होंने 50वीं बार शिकायत दर्ज कराई। कागजों में फर्जी निस्तारण तो कर दिया गया लेकिन क्लेम आज तक नहीं मिला।
ये भी पढ़ें - विधवा से प्यार: ऑटो चालक ने की खूब मोहब्बत, गर्भवती होते ही कर दिया ऐसा कृत्य; जीते जी मर गई वो
विज्ञापन
धनौली निवासी फूलवती के पति भवन निर्माण श्रमिक थे। कोरोना लॉकडाउन में 30 मई 2020 को इलाज के अभाव में उनकी मौत हो गई थी। वह पांच साल से श्रमिक कार्ड पर मिलने वाले क्लेम के लिए भटक रही हैं। 16 मई 2026 को संपूर्ण समाधान दिवस में उन्होंने 50वीं बार शिकायत दर्ज कराई। कागजों में फर्जी निस्तारण तो कर दिया गया लेकिन क्लेम आज तक नहीं मिला।
ये भी पढ़ें - विधवा से प्यार: ऑटो चालक ने की खूब मोहब्बत, गर्भवती होते ही कर दिया ऐसा कृत्य; जीते जी मर गई वो
विज्ञापन
केस-दो: फर्जी बैनामे की जांच का नतीजा शून्य
किरावली के सभासद रामनरेश इंदौलिया ने आईजीआरएस पर 12 मई 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी कि अभुआपुरा में गाटा संख्या 173/4 में उनकी 350 गज भूमि है, लेकिन विरोधियों ने 419 गज का फर्जी बैनामा कर दिया। डीएम ने सब-रजिस्ट्रार और एसीपी को जांच के आदेश दिए, लेकिन नतीजा शून्य रहा। धरातल पर अब तक कोई जांच नहीं हुई।
ये भी पढ़ें - रेलवे अधिकारी की पिटाई: आगरा में चल रहा बवाल, फिर भी कर्मचारियों से नहीं मिले एनसीआर के जीएम; उठने लगे सवाल
किरावली के सभासद रामनरेश इंदौलिया ने आईजीआरएस पर 12 मई 2026 को शिकायत दर्ज कराई थी कि अभुआपुरा में गाटा संख्या 173/4 में उनकी 350 गज भूमि है, लेकिन विरोधियों ने 419 गज का फर्जी बैनामा कर दिया। डीएम ने सब-रजिस्ट्रार और एसीपी को जांच के आदेश दिए, लेकिन नतीजा शून्य रहा। धरातल पर अब तक कोई जांच नहीं हुई।
ये भी पढ़ें - रेलवे अधिकारी की पिटाई: आगरा में चल रहा बवाल, फिर भी कर्मचारियों से नहीं मिले एनसीआर के जीएम; उठने लगे सवाल
केस-तीन: सीएम योजना से नहीं मिला स्वरोजगार का ऋण
बरौली अहीर निवासी मिल्को ने बुटीक खोलकर स्वरोजगार शुरू करने के लिए सीएम युवा उद्यमी योजना के तहत ऋण का आवेदन किया था। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बावजूद बैंक से ऋण नहीं मिला। पीड़ित ने 12 मई को आईजीआरएस पर शिकायत की। डीएम ने उपायुक्त उद्योग (डीआईसी) और एलडीएम को निर्देश दिए, लेकिन शिकायत के एक माह बाद भी समस्या जस की तस है।
ये भी पढ़ें - UP: तीन दिन से तलाश, बंद मोबाइल और फिर नाले में मिला शव; सुरक्षाकर्मी की मौत बनी पहेली
बरौली अहीर निवासी मिल्को ने बुटीक खोलकर स्वरोजगार शुरू करने के लिए सीएम युवा उद्यमी योजना के तहत ऋण का आवेदन किया था। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बावजूद बैंक से ऋण नहीं मिला। पीड़ित ने 12 मई को आईजीआरएस पर शिकायत की। डीएम ने उपायुक्त उद्योग (डीआईसी) और एलडीएम को निर्देश दिए, लेकिन शिकायत के एक माह बाद भी समस्या जस की तस है।
ये भी पढ़ें - UP: तीन दिन से तलाश, बंद मोबाइल और फिर नाले में मिला शव; सुरक्षाकर्मी की मौत बनी पहेली
ये महज तीन उदाहरण हैं, जो साबित कर रहे हैं कि जनसुनवाई अब शिकायतकर्ताओं के लिए ही दुखदाई बन गई है और अफसर सिर्फ कागजों का पेट भरने तक सीमित हैं। इसका खामियाजा जून माह में जिले को रैंकिंग में दस पायदान की गिरावट के रूप में भरना पड़ा है। प्रदेश के 75 जिलों में आगरा को 43वीं रैंक मिली है, जबकि ढाई हजार से अधिक फरियादी जन शिकायतों के निस्तारण से सीधे तौर पर नाखुश मिले हैं।
ये भी पढ़ें - डीएसएस पिटाई प्रकरण: डीआरएम कार्यालय पर छह घंटे हंगामा, हाथापाई और धक्का-मुक्की; मची रही अफरा-तफरी
ये भी पढ़ें - डीएसएस पिटाई प्रकरण: डीआरएम कार्यालय पर छह घंटे हंगामा, हाथापाई और धक्का-मुक्की; मची रही अफरा-तफरी
यह हाल तब है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं जनसुनवाई और आईजीआरएस को लेकर बेहद गंभीर हैं। हर माह सीएम से लेकर मंडलायुक्त और डीएम तक इसकी समीक्षा कर रहे हैं। लापरवाह अधिकारियों का वेतन रोका जा रहा है और नोटिस थमाए जा रहे हैं। फिर भी जनसुनवाई के नाम पर होने वाली खानापूर्ति खत्म नहीं हो रही। ऐसे में जनसमस्याओं के समाधान की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। फरियादियों को तहसील से डीएम दफ्तर तक चप्पलें घिसनी पड़ रही हैं।
ये भी पढ़ें - UP: कर्जदारों से बचने के लिए दांव पर लगा दी 10 वर्षीय बेटी, कारोबारी ने की ऐसी हरकत; पुलिस भी रह गई सन्न
ये भी पढ़ें - UP: कर्जदारों से बचने के लिए दांव पर लगा दी 10 वर्षीय बेटी, कारोबारी ने की ऐसी हरकत; पुलिस भी रह गई सन्न
फीडबैक में खुली पोल, 44 फीसदी से अधिक नाराज
जून 2026 की जुलाई में जारी की गई जनसुनवाई मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, जिलाधिकारी आगरा को 130 में से 109 अंक (83.85%) प्राप्त हुए हैं। कुल 5929 मामलों में फीडबैक लिया गया था, शिकायतों के निस्तारण पर 2643 फरियादियों ने कार्रवाई को लेकर स्पष्ट रूप से असंतोष जताया है। 3286 आवेदक ही समाधान से संतुष्ट मिले। यह भारी असंतोष निस्तारण की गुणवत्ता और अधिकारियों की कार्यशैली की पोल खोल रहा है।
ये भी पढ़ें - जनकपुरी महोत्सव 2026: नेपाल में जैसा है जनक महल, वैसा ही आगरा में सजेगा; मिथिला संस्कृति की दिखेगी भव्य झलक
जून 2026 की जुलाई में जारी की गई जनसुनवाई मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, जिलाधिकारी आगरा को 130 में से 109 अंक (83.85%) प्राप्त हुए हैं। कुल 5929 मामलों में फीडबैक लिया गया था, शिकायतों के निस्तारण पर 2643 फरियादियों ने कार्रवाई को लेकर स्पष्ट रूप से असंतोष जताया है। 3286 आवेदक ही समाधान से संतुष्ट मिले। यह भारी असंतोष निस्तारण की गुणवत्ता और अधिकारियों की कार्यशैली की पोल खोल रहा है।
ये भी पढ़ें - जनकपुरी महोत्सव 2026: नेपाल में जैसा है जनक महल, वैसा ही आगरा में सजेगा; मिथिला संस्कृति की दिखेगी भव्य झलक
ये है रिपोर्ट
रिपोर्ट के अनुसार, निस्तारणकर्ता अधिकारियों ने 1034 शिकायतकर्ताओं से तो संपर्क करने की जहमत ही नहीं उठाई। पिछले 6 माह के औसत 12,326 संदर्भों के सापेक्ष 129 मामले डिफाल्टर श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। जिले में 44 फीसदी से ज्यादा फरियादियों का असंतुष्ट होना बेहद चिंताजनक है। फरियादियों का कहना है कि प्रशासन को अब केवल कागजों का पेट भरने वाले आंकड़ों के बजाय शिकायतकर्ता की संतुष्टि और समाधान की वास्तविक गुणवत्ता पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा।
ये भी पढ़ें - आज से बंद होंगे शुभ कार्य: शहनाइयों पर लगा विराम, 23 तक गुप्त नवरात्र; यहां देखें साल के आखिरी विवाह मुहूर्त
रिपोर्ट के अनुसार, निस्तारणकर्ता अधिकारियों ने 1034 शिकायतकर्ताओं से तो संपर्क करने की जहमत ही नहीं उठाई। पिछले 6 माह के औसत 12,326 संदर्भों के सापेक्ष 129 मामले डिफाल्टर श्रेणी में दर्ज किए गए हैं। जिले में 44 फीसदी से ज्यादा फरियादियों का असंतुष्ट होना बेहद चिंताजनक है। फरियादियों का कहना है कि प्रशासन को अब केवल कागजों का पेट भरने वाले आंकड़ों के बजाय शिकायतकर्ता की संतुष्टि और समाधान की वास्तविक गुणवत्ता पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा।
ये भी पढ़ें - आज से बंद होंगे शुभ कार्य: शहनाइयों पर लगा विराम, 23 तक गुप्त नवरात्र; यहां देखें साल के आखिरी विवाह मुहूर्त