अलीगढ़: मासूमों के दिलों को दी नई धड़कन, 2088 बच्चों की हार्ट सर्जरी पर खर्च किए 25 करोड़
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में हुईं 2,088 हार्ट सर्जरी में अलीगढ़ के लगभग 475 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा हाथरस, एटा, कासगंज, झांसी, ललितपुर और मैनपुरी समेत बस्ती, अयोध्या, बहराइच, बलरामपुर, इलाहाबाद, गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज और मऊ जैसे जिलों के बच्चों का भी यहां उपचार किया गया है।
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जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों के लिए समय पर उपचार किसी नई जिंदगी से कम नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने बच्चों की हार्ट सर्जरी का खर्च बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे परिवारों को राहत देने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत अलीगढ़ के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में बच्चों की निशुल्क हार्ट सर्जरी की जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यहां अब तक 2,088 बच्चों की सफल हार्ट सर्जरी हो चुकी है। इन सर्जरी पर सरकार ने करीब 25 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस पहल से उन परिवारों को सहारा मिला है, जिनके लिए महंगे इलाज का खर्च उठाना आसान नहीं था।
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में हुईं 2,088 हार्ट सर्जरी में अलीगढ़ के लगभग 475 बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा हाथरस, एटा, कासगंज, झांसी, ललितपुर और मैनपुरी समेत बस्ती, अयोध्या, बहराइच, बलरामपुर, इलाहाबाद, गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज और मऊ जैसे जिलों के बच्चों का भी यहां उपचार किया गया है। अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज इस योजना के तहत बच्चों की हार्ट सर्जरी के लिए नोडल सेंटर के रूप में काम कर रहा है। अलीगढ़ के अलावा लखनऊ के केजीएमयू और नोएडा के एसजीपीजीआई में भी योजना के तहत बच्चों की हार्ट सर्जरी की जाती है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2013 में हुई थी, जबकि जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में बच्चों की हार्ट सर्जरी वर्ष 2017 में शुरू हुई। योजना के तहत शून्य से 19 वर्ष तक के बच्चों को निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर जांच, जरूरत पड़ने पर मेडिकल कॉलेज रेफर
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों में बीमारियों की पहचान के लिए ब्लॉक स्तर पर चार सदस्यीय स्वास्थ्य टीम गठित की जाती है। इस टीम में दो चिकित्सक और दो पैरामेडिकल कर्मचारी शामिल होते हैं। टीम स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंचकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करती है। जांच के दौरान बीमारी के लक्षण मिलने पर बच्चों को आगे की जांच और उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है।
केस 1 : बेटे के उपचार से परिवार को मिली राहत
फिरोजाबाद निवासी अर्जुन ने बताया कि उनके 19 वर्षीय बेटे देवेंद्र के दिल में छेद था। बीमारी को लेकर पूरा परिवार परेशान था और इलाज की चिंता सता रही थी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बेटे का अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में निशुल्क उपचार हुआ। अर्जुन के अनुसार, इस योजना से उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है और बेटे के स्वस्थ भविष्य को लेकर उम्मीद जगी है।
केस 2 : समय पर जांच से बेटी को मिला उपचार
झांसी निवासी वीरेंद्र ने बताया कि उनकी 18 वर्षीय बेटी साधना को हृदय संबंधी बीमारी थी। स्कूल में स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए पहुंची थी, जहां बीमारी का पता चला। इसके बाद टीम ने साधना को अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज रेफर किया, जहां उसका निशुल्क उपचार हुआ। वीरेंद्र के अनुसार, उपचार के बाद उनकी बेटी अब पूरी तरह स्वस्थ है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में बच्चों की निशुल्क हार्ट सर्जरी की जाती है। कार्यक्रम के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।-आरएन सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ)