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अलीगढ़: एडीए ने सांगवान सिटी निदेशक को जारी किया नोटिस, 14 दिनों का दिया अल्टीमेटम, यह है मामला

Thu, 01 Oct 2026 01:52 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Thu, 01 Oct 2026 01:52 PM IST
सार

एडीए ने बिल्डर को स्पष्ट रूप से 14 दिनों का समय दिया है कि वे बताएं कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। यदि समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो धारा 15/26 के तहत सख्त एक्शन लिया जाएगा और मामला यूपी रेरा को भेजकर भारी जुर्माना भी किया जा सकता है।

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Aligarh ADA issues notice to Sangwan City Director
सांगवान सिटी, एडीए का नोटिस - फोटो : सांगवान सिटी वेबसाइट, एडीए अलीगढ़

विस्तार

अलीगढ़ शहर के असदपुर क्याम स्थित सांगवान सिटी  बिल्डर और पूर्व सैनिकों सहित स्थानीय निवासियों के बीच विवाद को लेकर अलीगढ़ विकास प्राधिकरण ने मैसर्स सांगवान लैंडको प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक नरेन्द्र कुमार को एक नोटिस जारी किया है। बिल्डर को 14 दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है, जवाब न देने पर कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई करने की बात कही गई है। मामले को लेकर जब मैसर्स सांगवान लैंडको प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक नरेन्द्र कुमार से संपर्क किया गया तो उनसे इस बारे में अभी तक कोई प्रत्युत्तर नहीं मिला है।

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यह है मामला
'इंडियन वेटरान्स ऑर्गेनाइजेशन' (भूतपूर्व सैनिक संगठन) ने डीएम को एक शिकायती पत्र दिया। जिसमें आरोप लगाया कि सांगवान सिटी कॉलोनी साल 2022 से अलीगढ़ नगर निगम  के वार्ड नंबर 71 के अधीन आ चुकी है और यहां के निवासी नगर निगम को नियमित रूप से गृहकर भी दे रहे हैं। इसके बावजूद, बिल्डर और उसके नुमाइंदे मेंटेनेंस के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं। आरोप यह भी हैं कि जो लोग अवैध वसूली का विरोध करते हैं, नियमों को ताक पर रखकर उनकी पानी की सप्लाई भी काट दी जाती है। कॉलोनी में नगर निगम की कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों तक को अंदर आने से रोक दिया गया है। 
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एडीए ने जारी किया नोटिस
अलीगढ़ विकास प्राधिकरण के सचिव ने नोटिस जारी किया है। जिसमें कहा है कि 17 जून 2010 के अनुबंध और 23 सितंबर 2015 के पूर्णता प्रमाण-पत्र के मुताबिक, जैसे ही कॉलोनी नगर निगम क्षेत्र में शामिल हो जाती है, बिल्डर का अस्थायी रख-रखाव का अधिकार स्वतः समाप्त हो जाता है। एडीए ने अपने नोटिस में बिल्डर पर और भी आरोप लगाए गए हैं। जैसे कि  उप्र नगर योजना और विकास अधिनियम, 1973 का उल्लंघन, अपार्टमेंट एक्ट, 2010 के तहत रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन का गठन न होने देना और सुविधाएं ट्रांसफर न करना। रेरा नियम, 2016 के तहत सामान्य सुविधाओं और मेंटेनेंस सिक्योरिटी की राशि का कब्जा आवंटियों को न सौंपना। एडीए का नोटिस देखने के लिए यहां क्लिक करें... नोटिस
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14 दिनों में मांगा जवाब
एडीए ने बिल्डर को स्पष्ट रूप से 14 दिनों का समय दिया है कि वे बताएं कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। यदि समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो धारा 15/26 के तहत सख्त एक्शन लिया जाएगा और मामला यूपी रेरा को भेजकर भारी जुर्माना भी किया जा सकता है।

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