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अलीगढ़: 37 करोड़ से बनेगा भारत का पहला लॉक म्यूजियम, शासन ने दी मंजूरी, 10.23 करोड़ रुपये भी जारी

Thu, 01 Oct 2026 06:25 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Thu, 01 Oct 2026 06:25 PM IST
सार

लॉक म्यूजियम में अलीगढ़ के करीब 100 साल पुराने ताला उद्योग की यात्रा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। यहां आकर्षक की-होल प्रवेश द्वार, विशाल लॉक स्कल्पचर, डिजिटल ओरिएंटेशन डोम, प्राचीन ताला निर्माण कार्यशाला के प्रतिरूप और औपनिवेशिक काल के व्यापार एवं निर्यात से जुड़ी प्रदर्शनी होगी।

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India first lock museum in Aligarh
अलीगढ़ लॉक म्यूजियम का डिज़ाइन - फोटो : नगर निगम

विस्तार

ताला और तालीम के नाम से पहचान रखने वाले अलीगढ़ को अब दुनिया के पहले लॉक म्यूजियम के नाम से नई पहचान मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत प्रदेश सरकार ने अलीगढ़ में 37 करोड़ रुपये की लागत से लॉक म्यूजियम एवं अर्बन कल्चरल सेंटर के निर्माण को प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दे दी है। शासन ने परियोजना की पहली किस्त के रूप में 10.23 करोड़ रुपये भी जारी कर दिए हैं।  

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जवाहर भवन के सामने राजा महेंद्र प्रताप पार्क के किनारे प्रस्तावित स्थल पर  नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने सिविल इंजीनियर और अर्बन प्लानर की टीम के साथ निरीक्षण किया। उन्होंने अधीनस्थों को आगे की कार्रवाई जल्द पूरी करने के निर्देश दिए। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में नगर निगम की ओर से जून 2025 में इस परियोजना का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था।
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महापौर प्रशांत सिंघल, तत्कालीन मंडलायुक्त संगीता सिंह और नगर निगम के संयुक्त प्रयासों से तैयार प्रस्ताव को 30 सितंबर को जारी शासनादेश के तहत मंजूरी मिली है। परियोजना के लिए स्वीकृत 37 करोड़ रुपये की धनराशि में से 35 प्रतिशत यानी 10 करोड़ 23 लाख 83 हजार 144 रुपये की पहली किस्त जारी की गई है। 

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यह लॉक म्यूजियम भारत का पहला लॉक म्यूजियम होगा, जो अपने अलीगढ़ में बनेगा।- प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त, अलीगढ़

India first lock museum in Aligarh
लॉक म्यूजियम नक्शा - फोटो : नगर निगम

प्राचीन तालों से लेकर साइबर लॉक तक का सफर दिखेगा
लॉक म्यूजियम में अलीगढ़ के करीब 100 साल पुराने ताला उद्योग की यात्रा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। यहां आकर्षक की-होल प्रवेश द्वार, विशाल लॉक स्कल्पचर, डिजिटल ओरिएंटेशन डोम, प्राचीन ताला निर्माण कार्यशाला के प्रतिरूप और औपनिवेशिक काल के व्यापार एवं निर्यात से जुड़ी प्रदर्शनी होगी। इसके अलावा स्मार्ट लॉक, बायोमेट्रिक, फेस रिकॉग्निशन और साइबर सिक्योरिटी पर आधारित इंटरैक्टिव गैलरी भी बनाई जाएगी। पारंपरिक कारीगरों की विरासत, उनकी जीवनगाथा और लोककथाओं को भी जगह मिलेगी।

म्यूजियम में बच्चों के लिए किड्स जोन, डिजिटल गतिविधियां, की-एनग्रेविंग स्टेशन, काइनेटिक लॉक स्कल्पचर, थीम आधारित कैफे और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य म्यूजियम को इतिहास, तकनीक, शिक्षा, मनोरंजन और पर्यटन के एकीकृत केंद्र के रूप में विकसित करना है।

नगर आयुक्त ने बताया कि अलीगढ़ का ताला उद्योग लगभग चार हजार करोड़ रुपये का है। लॉक म्यूजियम बनने से देश-विदेश से आने वाले उद्यमियों और खरीदारों को अलीगढ़ के ताला उद्योग, उत्पादों और तकनीक को एक ही स्थान पर देखने का अवसर मिलेगा। हैरिसन, गोदरेज और लिंक लॉक जैसी कंपनियों के साथ भी संपर्क स्थापित कर उनके उत्पादों की गैलरी बनाने की योजना है। जेवर एयरपोर्ट से आने वाले अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए भी यह केंद्र उपयोगी साबित हो सकता है।

नगर आयुक्त के अनुसार, परियोजना की डीपीआर अनुभवी कंसल्टेंट से तैयार कराई जाएगी। बेहतर डिजाइन तय करने के बाद उसे शासन को भेजा जाएगा। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। अगले छह से सात माह में निर्माण शुरू होने की संभावना है।

उद्योग और रोजगार को मिलेगी नई दिशा
सांसद सतीश गौतम ने परियोजना की स्वीकृति को अलीगढ़ की औद्योगिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। महापौर प्रशांत सिंघल ने कहा कि म्यूजियम बनने से अलीगढ़ में देश-विदेश के पर्यटकों, व्यापारियों और विद्यार्थियों का आगमन बढ़ेगा। कोल विधायक अनिल पाराशर ने कहा कि इससे पारंपरिक ताला उद्योग को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ नई पहचान मिलेगी। तत्कालीन मंडलायुक्त संगीता सिंह ने भी परियोजना की स्वीकृति पर प्रसन्नता जताते हुए इसे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों से जोड़ने वाली पहल बताया।

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