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किशनपुर कब्रिस्तान विवाद: एडीए की 1000 वर्ग मीटर जमीन लापता, 100 साल पुराने दस्तावेजों की होगी जांच

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 30 Jan 2026 11:38 AM IST
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सार

एडीए द्वारा उप निबंधक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय से पुराने सभी रिकॉर्ड निकलवाए जा रहे हैं। यह जांचा जा रहा है कि एडीए की अधिग्रहीत जमीन को किसने और किस आधार पर बेचा।

Aligarh Kishanpur cemetery dispute
स्वर्ण जयंती नगर में एडीए द्वारा मुक्त कराई गई जमीन पर निर्माण करते मजदूर - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ के किशनपुर क्षेत्र में अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (एडीए) के रिकॉर्ड में जिस जमीन का क्षेत्रफल 2400 वर्ग मीटर दर्ज है, 28 जनवरी को मौके पर पैमाइश के दौरान वहां मात्र 1400 वर्ग मीटर जमीन ही उपलब्ध मिली है। करीब 1000 वर्ग मीटर बेशकीमती जमीन का हिसाब न मिलने से विभाग में हड़कंप मच गया है। एडीए ने मौके पर अब अपनी वाउंड्री लगा दी है और स्वामित्व का बोर्ड लगा दिया है।

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एडीए अधिकारियों के अनुसार, यह जमीन लगभग 40 साल पहले अधिग्रहीत की गई थी। लंबे समय तक देखरेख के अभाव और निगरानी न होने के कारण भू-माफिया ने धीरे-धीरे इस पर कब्जा कर लिया। वर्तमान में कब्रिस्तान के समीप मिली जमीन में भारी अंतर पाए जाने के बाद, एडीए ने अब आसपास की जमीनों का भी जीपीआर (ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार) सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इस तकनीक के माध्यम से जमीन के नीचे के निर्माण और सीमाओं की सटीक स्थिति का पता लगाया जाएगा। प्राधिकरण अब केवल वर्तमान स्थिति पर ही संतोष नहीं कर रही है, बल्कि विवाद की जड़ तक पहुंचने के लिए 100 साल पुराने दस्तावेजों को खंगालने की तैयारी की जा रही है। एडीए के निशाने पर वे लोग हैं जिन्होंने कब्रिस्तान के आसपास की जमीनें खरीदी या बेची हैं।

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सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आसपास की सभी संपत्तियों की पैमाइश नए सिरे से की जा रही है ताकि 1000 वर्ग मीटर जमीन का पता लगाया जा सके। इसके अलावा जिस जमीन को बुधवार को कब्जा मुक्त कराया है उसके संबंध में बताया गया था कि कब्रिस्तान है लेकिन मौके पर इस तरह का कोई प्रयोजन नहीं था। हम लोगों ने एक महीने पहले ग्राउंड पैनीट्रेटिंग रडार सर्वे कराया था जिससे जानकारी मिली कि नीचे कोई भी संरचना नहीं है।- कुलदीप मीणा, उपाध्यक्ष, अलीगढ़ विकास प्राधिकरण

पुराने रिकॉर्ड निकलवाए जा रहे

एडीए द्वारा उप निबंधक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय से पुराने सभी रिकॉर्ड निकलवाए जा रहे हैं। यह जांचा जा रहा है कि एडीए की अधिग्रहीत जमीन को किसने और किस आधार पर बेचा। यदि जांच में पाया जाता है कि बेची गई जमीन एडीए की अधिग्रहीत सीमा के भीतर आती है, तो उन सभी बैनामों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वक्फ संपत्ति पर सपा पार्षदों ने बना लीं कोठियां : रूबी आसिफ
वरिष्ठ मुस्लिम भाजपा नेत्री रूबी आसिफ खान ने शाहजमाल वक्फ नंबर 63 की भूमि पर हो रहे अवैध निर्माणों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस वक्फ संपत्ति का आधे से ज्यादा हिस्सा अवैध कब्जों की भेंट चढ़ चुका है। रूबी खान के अनुसार, चरक वाला चौराहे से लेकर तेलीपाड़ा तक फैली इस भूमि पर सपा पार्षदों और समाज के अन्य रसूखदारों ने आलीशान कोठियां, कारखाने और मार्केट बना लिए हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से भी इस मामले में त्वरित कार्रवाई का निवेदन किया है।

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