Waqf property: विवादित वक्फ संपत्तियों के जीपीआर सर्वे की तैयारी, प्रशासन-एएमयू सर्वे में संपत्ति संख्या भिन्न
अलीगढ़ जिला प्रशासन के दस्तावेजों में लगभग 1,700 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं। एएमयू के एक पुराने सर्वे के अनुसार वक्फ संपत्तियों की संख्या 4,220 बताई गई है। 1,216 ऐसी संपत्तियां हैं जो वास्तव में सरकारी (कब्रिस्तान, श्मशान या बंजर भूमि) होनी चाहिए थीं, लेकिन उन्हें वक्फ रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया।
विस्तार
अलीगढ़ के किशनपुर में एडीए की जमीन पर बने कब्रिस्तान को ध्वस्त कराने के बाद अब अलीगढ़ प्रशासन जिले की अन्य वक्फ संपत्तियों की पड़ताल में जुट गया है। विवादित वक्फ संपत्तियों के जीपीआर सर्वे की तैयारी है। जिला प्रशासन के दस्तावेजों में लगभग 1,700 वक्फ संपत्तियां दर्ज हैं, जिनमें मुख्य रूप से कब्रिस्तान, मस्जिदें, इमामबाड़े और दरगाह शामिल हैं।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) द्वारा किए गए एक पुराने सर्वे के अनुसार जिले में वक्फ संपत्तियों की संख्या 4,220 बताई गई है। सरकारी जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि 1,216 ऐसी संपत्तियां हैं जो वास्तव में सरकारी (कब्रिस्तान, श्मशान या बंजर भूमि) होनी चाहिए थीं, लेकिन उन्हें वक्फ रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया। इस विसंगति के सामने आने के बाद अब इन संपत्तियों का जीपीआर (ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार) सर्वे कराने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस हाईटेक सर्वे के लिए प्रशासन को अब शासन की हरी झंडी का इंतजार है। किशनपुर में मुक्त कराई गई जमीन का भी जीपीआर सर्वे कराया गया था।
जीपीआर सर्वे के जरिए जमीन के वास्तविक स्वरूप और सीमाओं का सटीक पता लगाया जा सकेगा। इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकारी भूमि पर वक्फ का दावा कितना सही है और कहां-कहां अवैध कब्जे किए गए हैं। जिले में वक्फ संपत्तियों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, जिसने जांच की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी निधि गोस्वामी के अनुसार, प्रशासनिक दस्तावेजों और एएमयू के सर्वे आंकड़ों में बड़ा अंतर है। अधिकांश संपत्तियां कब्रिस्तान के रूप में दर्ज हैं। इस पूरी विसंगति की विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। जीपीआर सर्वे या किसी भी बड़ी कार्रवाई पर निर्णय शासन स्तर से मंजूरी मिलने के बाद ही लिया जाएगा।
पोर्टल पर अपडेट हुईं 1216 संपत्तियां
वर्ष 2025 में हुई गहन जांच के बाद, प्रशासन ने ऐसी 1,216 संपत्तियों को चिन्हित किया जिन्हें सरकारी रिकॉर्ड में वापस दर्ज किया गया है। इन सभी संपत्तियों का विवरण 'उम्मीद' पोर्टल पर ऑनलाइन अपडेट कर दिया गया है। वर्तमान में इन संपत्तियों का प्रबंधन मुतवल्लियों (ट्रस्टियों) द्वारा किया जा रहा है, जो अलीगढ़ शहर, कोल तहसील और आसपास के कस्बों में फैली हुई हैं।
कैसे काम करता है ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार सर्वे
विद्युत चुम्बकीय तरंगों का संचरण किया जाता है। ये तरंगें मिट्टी, चट्टान, कंक्रीट या बर्फ के अंदर गहराई तक जाती हैं। जब ये तरंगें जमीन के अंदर किसी अलग घनत्व वाली वस्तु (जैसे पाइप, केबल, दबे हुए निर्माण, पत्थर या मिट्टी की अलग परत) से टकराती हैं, तो वे वापस परावर्तित होकर सतह पर आ जाती हैं। इसे इको या प्रतिध्वनि की तरह समझा जा सकता है।
सतह पर लगा रिसीवर इन वापस आने वाली तरंगों को पकड़ता है और दो मुख्य चीजें रिकॉर्ड करता है। पहली, तरंग को नीचे जाने और वापस आने में कितना समय लगा। इससे वस्तु की गहराई का पता चलता है। दूसरा तरंग कितनी मजबूती से वापस आई। इससे वस्तु के प्रकार का अंदाजा मिलता है। इससे बिना खोदाई के जमीन को नुकसान पहुंचाए बिना सर्वे किया जाता है। यह पुरानी नींव, दबे हुए पाइप और जमीन के अंदर के विवादित हिस्सों का सटीक नक्शा बना सकता है।
