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Aligarh Muslim University: 113 खुरापातियों की सूची तैयार, एएमयू में 15 लाख का वायरलेस सिस्टम ठप

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Fri, 10 Apr 2026 04:46 PM IST
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सार

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कभी यूनिवर्सिटी की सुरक्षा की रीढ़ माने जाने वाला वायरलेस सिस्टम अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।

Aligarh Muslim University security arrangements
एएमयू - फोटो : संवाद
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विस्तार

एएमयू में सुरक्षा से समझौते पर अब पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी हो गई है। सर जियाउद्दीन हॉल से कारतूस, मैगजीन और नकली नोट मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने 113 संदिग्ध और अराजक तत्वों की सूची तैयार कर ली है। साफ संदेश है कि अब किसी भी हाल में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी। प्रशासन का मानना है कि मुट्ठीभर खुरापातियों की वजह से 26 हजार छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसी के चलते खुफिया इनपुट और छात्रों से मिली सूचनाओं के आधार पर सूची तैयार की गई है, जिसमें आगे और नाम जुड़ सकते हैं।

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विश्वविद्यालय के सभी प्रमुख गेट बाब-ए-सैयद, जेएन मेडिकल कॉलेज मार्ग और शताब्दी द्वार पर सख्त जांच शुरू होगी। आने-जाने वालों से पूछताछ होगी और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद मोहसिन खान ने साफ कहा कि कुलपति के निर्देश पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू की जा रही है, जो भी कानून और शैक्षणिक माहौल को चुनौती देगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है।
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सुरक्षा पर बड़ा सवाल : 15 लाख का वायरलेस सिस्टम ठप
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कभी यूनिवर्सिटी की सुरक्षा की रीढ़ माने जाने वाला वायरलेस सिस्टम अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। यह वही सिस्टम था, जिसे वर्ष 2008 में तत्कालीन कुलपति प्रो. पीके अब्दुल अजीज के कार्यकाल में तैयार किया गया था। उन्होंने वर्ष 2007 में वीसी लॉज में आगजनी के बाद इस सिस्टम की बुनियाद रखी थी।

वर्ष 2007 में वीसी लॉज में अराजक तत्वों ने आग लगा दी थी। प्रख्यात चित्रकार एमएफ हुसैन की दुर्लभ पेंटिंग, दुर्लभ चीजें जल गई थीं। लाखों रुपये का नुकसान हो गया था। इसके बाद यूनिवर्सिटी अनिश्चितकालीन के लिए बंद कर दी गई थी, जबकि प्रो. पीके अब्दुल अजीज वर्तमान में जहां कुलसचिव का आवास है, वहीं रहने लगे थे। आगजनी की घटना के दौरान यूनिवर्सिटी में कोई वायरलेस सिस्टम नहीं था। 

सूचना के आदान-प्रदान में भारी दिक्कतें आई थीं और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। इसी घटना के बाद वायरलेस नेटवर्क की जरूरत को समझते हुए इसे लागू किया गया था। उस समय करीब 15 लाख रुपये खर्च कर प्रॉक्टर कार्यालय में यह नेटवर्क स्थापित किया गया था, जिससे पूरे कैंपस में तैनात सुरक्षाकर्मियों के बीच तुरंत संपर्क संभव हो पाया था। बाब-ए-सैयद समेत यूनिवर्सिटी के सभी प्रमुख गेटों पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के पास वॉकी-टॉकी हुआ करते थे, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना प्रसारित की जा सकती थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2025 में इस अहम सिस्टम को लाइसेंस फीस के चलते बंद कर दिया गया। बताया जा रहा है कि इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार से मिलने वाले लाइसेंस की फीस करीब 85 लाख रुपये थी, हालांकि बकाया चुका दिया गया है। नए सिस्टम पर करीब 20 लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है।

कुलपति के निर्देश पर जीरो टॉलरेंस नीति लागू की जा रही है, जो भी कानून और शैक्षणिक माहौल को चुनौती देगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई तय है।- प्रो मोहम्मद मोहसिन खान, प्रॉक्टर, एएमयू

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