पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
फ्री ई-पेपर
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   BSP district president keeps changing in Aligarh

BSP: सत्ता से वनवास के 14 वर्ष पूरे, जिलाध्यक्षों की साढ़े साती जारी, 2012 से अब तक बने 22 जिलाध्यक्ष

Tue, 30 Jun 2026 01:40 PM IST
Chaman Kumar Sharma आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़
आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Tue, 30 Jun 2026 01:40 PM IST
सार

बसपा पार्टी पहली बार 1995, दूसरी बार 1997, तीसरी बार वर्ष 2002 में भाजपा गठबंधन के साथ प्रदेश में सरकार चला चुकी है। चौथी बार 2007 से 2012 तक पूर्ण बहुमत के साथ पांच साल तक सत्ता में रही। इसके बाद भी जिलाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर दो से तीन वर्ष की स्थायी तैनाती नहीं कर पा रही है।

विज्ञापन
BSP district president keeps changing in Aligarh
बसपा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी में विधानसभा चुनाव-2027 की धमाचौकड़ी शुरू हो चुकी है। बसपा ने दमदार प्रत्याशियों की तलाश शुरू कर दी है, लेकिन अलीगढ़ जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर लगी साढ़े साती खत्म नहीं हो रही है। वर्ष 2012 से 2026 के बीच गुजरे 14 वर्ष से पार्टी सत्ता से वनवास में है। इसी बीच अलीगढ़ में 22 जिलाध्यक्ष बन चुके हैं, जिनका औसत कार्यकाल महज साढ़े सात महीने का है। चार दिन पहले 26 जून को रत्नदीप सिंह को हटाकर पार्टी ने सुरेश गौतम को नया जिलाध्यक्ष घोषित किया है।

विज्ञापन


खास बात ये है कि 14 वर्ष से जिलाध्यक्ष की कुर्सी 10-11 लोगों के बीच ही घूम रही है। इसमें गजराज विमल सर्वाधिक पांच बार इस पद को संभाल चुके हैं। अब सुरेश गौतम ने जिलाध्यक्ष बनकर हैट्रिक लगाई है। सूरज सिंह, मुकेश चंद्रा, अरविंद आदित्य, अशोक सिंह एडवोकेट और रत्नदीप सिंह दो-दो बार इस कुर्सी पर बैठ चुके हैं। रघुवीर सिंह ऊषवा, जितेंद्र सिंह राही, हरजीत सिंह और मोरध्वज कुशवाह एक-एक बार यह जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
विज्ञापन


गौर हो कि पार्टी पहली बार 1995, दूसरी बार 1997, तीसरी बार वर्ष 2002 में भाजपा गठबंधन के साथ प्रदेश में सरकार चला चुकी है। चौथी बार 2007 से 2012 तक पूर्ण बहुमत के साथ पांच साल तक सत्ता में रही। इसके बाद भी जिलाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर दो से तीन वर्ष की स्थायी तैनाती नहीं कर पा रही है। अलीगढ़ मंडल में बेहतर स्थिति रहने के बाद भी ऐसा नहीं हो पाना कार्यकर्ताओं को भी परेशान करता है। वे यह नहीं समझ पाते कि किसके प्रति निष्ठावान रहें। किसी एक के साथ रहे तो दूसरा नाराज न हो जाए, क्योंकि कब कौन जिलाध्यक्ष बन जाएगा, कुछ पता नहीं..।

विज्ञापन
विज्ञापन

राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन मायावती के निर्देश पर ही जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाती है। बदलाव होने से सभी को बराबरी से काम करने का मौका मिलता है।-अशोक सिंह एडवोकेट, अलीगढ़ मंडल कोआर्डिनेटर।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्तर से सभी कोऑर्डिनेटर और जिलाध्यक्ष के कामकाज की गोपनीय समीक्षा की जाती है। कोई खामी मिलने पर हटाया जाता है। जिलाध्यक्ष पद से हटाकर रत्नदीप सिंह को अलीगढ़ जिले में कोआर्डिनेटर बनाया गया है।-गजराज सिंह विमल, कोल और बरौली प्रभारी।


26 जून को ही बदल गए मंडल कोआर्डिनेटर
जिस दिन जिलाध्यक्ष बदले गए, उसी दिन अलीगढ़ मंडल के मुख्य कोआर्डिनेटर भी बदल गए। 26 जून से पूर्व नौशाद अली के नेतृत्व में विक्रम सिंह जाटव, विजेंद्र सिंह विक्रम, रणवीर सिंह कश्यप और अनिल बघेल की टीम कार्यरत थी। अलीगढ़ जिले में मंडल प्रभारी अशोक सिंह और मोरध्वज की टीम लगी थी।

परिर्वतन के बाद मुनकाद अली ने नौशाद अली की जिम्मेदारी संभाली। उनके साथ टीम में विक्रम सिंह जाटव, विजेंद्र सिंह विक्रम और अनिल बघेल और रणवीर सिंह कश्यप शामिल हुए। अलीगढ़ जिले में मंडल प्रभारी अशोक सिंह के साथ रत्नदीप सिंह को लगाया गया। मुकेश चंद्रा और दिनेश बघेल को अलीगढ़ मंडल में सामाजिक भाईचारा कमेटी की जिम्मेदारी दी गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed