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Aligarh News: भाजपाई दिग्गजों की चाय पर चर्चा ने बढ़ाई सियासी गर्माहट
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पूर्व सांसद राजवीर सिंह राजू के साथ राजेश भारद्वाज। स्रोत : स्वयं
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खेमों में बिखरी जिले की भाजपा में शुक्रवार को हुए चाय पर चर्चा ने सियासी गर्माहट बढ़ा दी है। यह चर्चा दो सियासी दिग्गजों एटा के पूर्व सांसद राजवीर सिंह राजू व अतरौली के वरिष्ठ भाजपा नेता राजेश भारद्वाज के बीच हुई।
दोनों के बीच राजनीतिक मतभेद किसी से छिपे नहीं लेकिन इस मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को जन्म दे दिया है। पार्टी के खेमों और विपक्षी नेताओं में भी इसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। जब कल्याण सिंह ने जन क्रांति पार्टी बनाई तो उनकी पुत्रवधू यानी राजवीर की पत्नी प्रेमलता ने उनकी परंपरागत सीट अतरौली से 2012 में विधानसभा चुनाव लड़ा।
उस चुनाव में भाजपा से राजेश चुनाव मैदान में थे। प्रेमलता सपा के वीरेश यादव से चुनाव हारीं और इसकी वजह राजेश को माना गया। कल्याण सिंह व उनका परिवार 2014 से पहले फिर भाजपाई हो गया लेकिन राजेश की इस परिवार से दूरी बनी रही। खुद राजेश ने 2014 में अलीगढ़ लोकसभा और 2017 में कोल विधानसभा से टिकट मांगा। कल्याण परिवार का समर्थन अन्य दावेदारों को होने के कारण उन्हें दोनों बार टिकट नहीं मिला।
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राजेश ने 2021 के जिला पंचायत चुनाव में अपनी पुत्रवधू को अतरौली ब्लॉक से भाजपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में सदस्य का चुनाव लड़ाया। तब भाजपा से बागी हुए मंडल अध्यक्ष पुष्पेंद्र लोधी ने उन्हें हराया। इस हार का कारण भी कल्याण परिवार का समर्थन न होना माना गया।
इसी बीच शुक्रवार शाम राजेश ने राजवीर के मैरिस रोड स्थित होटल में पहुंचकर उनसे मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ अतरौली के ब्राह्मण नेता चुनमुन शर्मा व सत्यदेव उपाध्याय रहे। इस मुलाकात पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
इसे भविष्य की राजनीति, जिले के भाजपाई खेमों में चल रही उठापटक और विधानसभा 2027 की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। इस संबंध में राजेश कहा कि हम भाजपा परिवार के सदस्य हैं। उसी क्रम में सामान्य औपचारिक मुलाकात व चाय पर चर्चा हुई जिसमें पारिवारिक बातें हुई हैं। इसके मायने न निकाले जाएं।
मुलाकात के ये निकाले जा रहे मायने
बेशक राजेश भारद्वाज ने इसे सिर्फ औपचारिक पारिवारिक मुलाकात करार दिया है लेकिन सियासी रणनीतिकार इसके जो मायने निकाल रहे हैं, उसके अनुसार आने वाले चुनाव में अतरौली में कल्याण परिवार के प्रति ब्राह्मणों की एकजुटता का संदेश छिपा है।
चूंकि, अतरौली में कुछ अन्य भाजपाई दिग्गजों की राजेश भारद्वाज से दूरी है और वे कल्याण परिवार से पहले से दूरी रखते हैँ। उसी क्रम में ये मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं राजेश भारद्वाज को कल्याण परिवार से दूरी के चलते जो अब तक नहीं मिल पाया। उसे लेकर भी अपने अपने तरीके से सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
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दोनों के बीच राजनीतिक मतभेद किसी से छिपे नहीं लेकिन इस मुलाकात ने सियासी चर्चाओं को जन्म दे दिया है। पार्टी के खेमों और विपक्षी नेताओं में भी इसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। जब कल्याण सिंह ने जन क्रांति पार्टी बनाई तो उनकी पुत्रवधू यानी राजवीर की पत्नी प्रेमलता ने उनकी परंपरागत सीट अतरौली से 2012 में विधानसभा चुनाव लड़ा।
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उस चुनाव में भाजपा से राजेश चुनाव मैदान में थे। प्रेमलता सपा के वीरेश यादव से चुनाव हारीं और इसकी वजह राजेश को माना गया। कल्याण सिंह व उनका परिवार 2014 से पहले फिर भाजपाई हो गया लेकिन राजेश की इस परिवार से दूरी बनी रही। खुद राजेश ने 2014 में अलीगढ़ लोकसभा और 2017 में कोल विधानसभा से टिकट मांगा। कल्याण परिवार का समर्थन अन्य दावेदारों को होने के कारण उन्हें दोनों बार टिकट नहीं मिला।
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राजेश ने 2021 के जिला पंचायत चुनाव में अपनी पुत्रवधू को अतरौली ब्लॉक से भाजपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में सदस्य का चुनाव लड़ाया। तब भाजपा से बागी हुए मंडल अध्यक्ष पुष्पेंद्र लोधी ने उन्हें हराया। इस हार का कारण भी कल्याण परिवार का समर्थन न होना माना गया।
इसी बीच शुक्रवार शाम राजेश ने राजवीर के मैरिस रोड स्थित होटल में पहुंचकर उनसे मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ अतरौली के ब्राह्मण नेता चुनमुन शर्मा व सत्यदेव उपाध्याय रहे। इस मुलाकात पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
इसे भविष्य की राजनीति, जिले के भाजपाई खेमों में चल रही उठापटक और विधानसभा 2027 की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। इस संबंध में राजेश कहा कि हम भाजपा परिवार के सदस्य हैं। उसी क्रम में सामान्य औपचारिक मुलाकात व चाय पर चर्चा हुई जिसमें पारिवारिक बातें हुई हैं। इसके मायने न निकाले जाएं।
मुलाकात के ये निकाले जा रहे मायने
बेशक राजेश भारद्वाज ने इसे सिर्फ औपचारिक पारिवारिक मुलाकात करार दिया है लेकिन सियासी रणनीतिकार इसके जो मायने निकाल रहे हैं, उसके अनुसार आने वाले चुनाव में अतरौली में कल्याण परिवार के प्रति ब्राह्मणों की एकजुटता का संदेश छिपा है।
चूंकि, अतरौली में कुछ अन्य भाजपाई दिग्गजों की राजेश भारद्वाज से दूरी है और वे कल्याण परिवार से पहले से दूरी रखते हैँ। उसी क्रम में ये मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं राजेश भारद्वाज को कल्याण परिवार से दूरी के चलते जो अब तक नहीं मिल पाया। उसे लेकर भी अपने अपने तरीके से सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।