{"_id":"69a736f8fcf2dfa78e05cb52","slug":"even-the-mehndi-on-the-hands-did-not-fade-the-vermilion-on-the-parting-of-the-hair-was-destroyed-in-just-11-days-aligarh-news-c-2-gur1004-921770-2026-03-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Aligarh News: हाथों की मेहंदी भी फीकी न पड़ी, 11 दिन में ही उजड़ गया मांग का सिंदूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Aligarh News: हाथों की मेहंदी भी फीकी न पड़ी, 11 दिन में ही उजड़ गया मांग का सिंदूर
विज्ञापन
छोटू की मौत पर विलाप करते परिजन। संवाद
विज्ञापन
20 फरवरी को थाना सासनी गेट क्षेत्र के आंबेडकर चाैक, पला-साहिबाबाद निवासी छोटे उर्फ छोटे लाल और गांधीपार्क क्षेत्र के कमालपुर की अंजली ने सात फेरे लिए थे। उसके हाथों की मेहंदी अभी पूरी तरह छूटी भी नहीं थी कि शादी के महज 11 दिन बाद ही अंजली की मांग का सिंदूर सड़क हादसे में उजड़ गया।
जिस घर में कुछ दिन पहले शहनाई गूंजी थीं, वहां अब सन्नाटा और सिसकियां सुनाई दे रही हैं। इस हादसे ने हर आंख नम कर दी है। घर में अभी शादी की रस्मों की चर्चा और मेहमानों की यादें ताजा थीं। नई दुल्हन के सपनों से सजा आंगन अचानक चीख-पुकार से गूंज उठा।
रंगों की जगह आंसुओं ने ले ली :
हादसे में दो दोस्तों की माैत के बाद आंबेडकर चाैक मोहल्ले में मातम पसरा है। होली की तैयारियां थम गई हैं और रंगों की जगह आंसुओं ने ले ली है, जिसने भी यह मंजर देखा, उसकी आंखें नम हो गईं। नए जोड़े के सपनों ने अभी उड़ान भरनी शुरू ही की थी कि हादसे ने सब कुछ छीन लिया। दोपहर को जैसे ही छोटे लाल का शव घर पहुंचा, चीख-पुकार मच गई। अंजली पति का चेहरा देखते ही बेहोश होकर गिर पड़ी। परिजन उसे संभालते रहे, लेकिन उसका विलाप सुनकर हर किसी का कलेजा कांप उठा।
छूट गया दोस्तों का साथ
मोहल्ले के लोगों का कहना है कि छोटे उर्फ छोटे लाल, भूपेंद्र व नरेश की दोस्ती काफी गहरी थी। तीनों अक्सर एक साथ ही घूमने के लिए जाते थे। सोमवार को भी तीनों एक साथ निकले थे। इनमें छोटे व भूपेंद्र ने एक साथ ही जिंदगी को अलविदा कर दिया। फैक्टरी में काम करने वाले नरेश कुमार जेएन मेडिकल काॅलेज में जिंदगी और माैत से संघर्ष कर रहे हैं। छोटे लाल पांच भाई-बहनों में तीसरे नंबर के थे। पिता हरी सिंह सेल्समैन के रूप में काम करते हैं। भूपेंद्र ट्रक चलाते थे और तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। पिता कालीचरन राजमिस्त्री हैं।
Trending Videos
जिस घर में कुछ दिन पहले शहनाई गूंजी थीं, वहां अब सन्नाटा और सिसकियां सुनाई दे रही हैं। इस हादसे ने हर आंख नम कर दी है। घर में अभी शादी की रस्मों की चर्चा और मेहमानों की यादें ताजा थीं। नई दुल्हन के सपनों से सजा आंगन अचानक चीख-पुकार से गूंज उठा।
विज्ञापन
विज्ञापन
रंगों की जगह आंसुओं ने ले ली :
हादसे में दो दोस्तों की माैत के बाद आंबेडकर चाैक मोहल्ले में मातम पसरा है। होली की तैयारियां थम गई हैं और रंगों की जगह आंसुओं ने ले ली है, जिसने भी यह मंजर देखा, उसकी आंखें नम हो गईं। नए जोड़े के सपनों ने अभी उड़ान भरनी शुरू ही की थी कि हादसे ने सब कुछ छीन लिया। दोपहर को जैसे ही छोटे लाल का शव घर पहुंचा, चीख-पुकार मच गई। अंजली पति का चेहरा देखते ही बेहोश होकर गिर पड़ी। परिजन उसे संभालते रहे, लेकिन उसका विलाप सुनकर हर किसी का कलेजा कांप उठा।
छूट गया दोस्तों का साथ
मोहल्ले के लोगों का कहना है कि छोटे उर्फ छोटे लाल, भूपेंद्र व नरेश की दोस्ती काफी गहरी थी। तीनों अक्सर एक साथ ही घूमने के लिए जाते थे। सोमवार को भी तीनों एक साथ निकले थे। इनमें छोटे व भूपेंद्र ने एक साथ ही जिंदगी को अलविदा कर दिया। फैक्टरी में काम करने वाले नरेश कुमार जेएन मेडिकल काॅलेज में जिंदगी और माैत से संघर्ष कर रहे हैं। छोटे लाल पांच भाई-बहनों में तीसरे नंबर के थे। पिता हरी सिंह सेल्समैन के रूप में काम करते हैं। भूपेंद्र ट्रक चलाते थे और तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। पिता कालीचरन राजमिस्त्री हैं।

छोटू की मौत पर विलाप करते परिजन। संवाद
