संजीव चौधरी हत्याकांड: हाईकोर्ट ने दी राहत, 24 वर्ष बाद उम्रकैद की सजा काट रहे रॉबी-कालू, योगेश बरी
जिस समय संजीव चौधरी की हत्या हुई थी, उस समय डीएस कॉलेज के छात्र गुटों की गुटबाजी खासी सुर्खियों में रही थी। इस घटना को लेकर तरह तरह की चर्चाएं रही थीं। चूंकि खुद हत्या के समय संजीव के शव से पुलिस ने परीक्षा संबंधी प्रपत्रों के साथ हथियार व कारतूस बरामद किए थे।
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अलीगढ़ के धर्म समाज (डीएस) कॉलेज के बहुचर्चित छात्र संजीव चौधरी हत्याकांड में 24 वर्ष बाद हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे तीनों आरोपियों संजीव रॉबी, राघवेंद्र कालू व योगेश चौधरी को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने यह निर्णय सत्र न्यायालय द्वारा सुनाए गए उम्रकैद के फैसले के खिलाफ दायर अपील स्वीकारते हुए सुनाया है।
यह पूरा मामला 27 अप्रैल 2002 की सुबह का है। मूल रूप से टप्पल क्षेत्र के गांव उसरह और तत्कालीन समय में शहर की प्रेस कॉलोनी में रहने वाले संजीव चौधरी उस दिन बीए तृतीय वर्ष की परीक्षा देने के लिए डीएस कॉलेज पहुंचे थे। आरोप के अनुसार अपनी कार से उतरकर अभी वह कॉलेज के मुख्य गेट से अंदर प्रवेश कर ही रहे थे कि घात लगाए बैठे हमलावरों ने दिनदहाड़े अंधाधुंध गोलियां बरसाकर उनकी निर्मम हत्या कर दी थी।
मृतक के पिता और पेशे से अधिवक्ता बलवीर सिंह ने जमीन (प्रॉपर्टी) के पुराने विवाद को वजह बताते हुए हरदुआगंज के कलाई के संजीव उर्फ रॉबी, राघवेंद्र सिंह कालू और ग्वालरा के योगेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई िाी। कहा था कि जब वे अपने बेटे को कार से परीक्षा के लिए कॉलेज छोड़ने गए, तभी नामजदों ने गाड़ी से उतरते ही उसकी गोली मारकर हत्या कर दी।
लंबी कानूनी लड़ाई और गवाहों के बयानों के आधार पर करीब पांच साल पहले यानी 24 सितंबर 2021 को सत्र न्यायालय ने इस हत्याकांड को बेहद गंभीर मानते हुए तीनों नामजद आरोपियों संजीव उर्फ रॉबी, राघवेंद्र सिंह और योगेश को दोषी करार दिया था। अदालत ने तीनों को आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी।
सत्र न्यायालय के इस फैसले को चुनौती देते हुए बचाव पक्ष के वकीलों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। उच्च न्यायालय में चली लंबी बहस और साक्ष्यों के पुनर्मूल्यांकन के बाद, कोर्ट ने माना कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं होते। नतीजतन, हाईकोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए उम्रकैद के फैसले को रद्द कर तीनों आरोपियों की बरी कर दिया।
ये तीनों थे आरोपी
- संजीव चौधरी उर्फ रॉबी कलाई हरदुआगंज। पूर्व विधायक मलखान सिंह हत्याकांड में भी सजायाफ्ता। कुल डेढ़ दर्जन अपराध दर्ज।
- योगेश चौधरी ग्वालरा हरदुआगंज। मेरठ के बहुचर्चित प्रो.कविता चौधरी हत्याकांड सहित कुल दस अपराध दर्ज।
- राघवेंद्र सिंह उर्फ कालू कलाई हरदुआगंज। बाइकर्स जीतू हत्याकांड सहित पांच अपराध दर्ज। पूर्व जिपं सदस्य व पूर्व सपा युवजन सभा जिलाध्यक्ष। पत्नी मौजूदा जिपं सदस्य।
हाईकोर्ट में ये बने आधार
- एफआईआर के आधार से वादी सहित चश्मदीद गवाहों के मौके पर होने पर संदेह।
- पुलिस जांच से लेकर न्यायालय ट्रायल तक आरोपियों की पहचान परेड नहीं।
- दो नामजदों के पिता के नाम न पता होने के बाद भी शिनाख्त परेड नहीं हुई।
- पुलिस विवेचना में लापरवाही के कारण छात्र होने संबंधी दस्तावेज साबित नहीं।
- जमीनी विवाद अगर कोई था तो उसके विवाद का कोई साक्ष्य पेश नहीं किया।
राॅबी की नहीं हो सकेगी अभी रिहाई
बेशक इस हत्याकांड में तीनों नामजद को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है, लेकिन सबसे खास बात है कि इस हत्याकांड से बरी हुए एक आरोपी संजीव उर्फ रॉबी की अभी रिहाई नहीं हो सकेगी। इसकी वजह यह है कि रॉबी को पूर्व विधायक मलखान सिंह हत्याकांड में भी उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, इसलिए अभी इस आदेश के आने के बाद कालू व योगेश की अगले एक दो दिन में रिहाई के संकेत हैं।
डीएस कॉलेज की गुटबाजी रही थी सुर्खियों में
जिस समय संजीव चौधरी की हत्या हुई थी, उस समय डीएस कॉलेज के छात्र गुटों की गुटबाजी खासी सुर्खियों में रही थी। इस घटना को लेकर तरह तरह की चर्चाएं रही थीं। चूंकि खुद हत्या के समय संजीव के शव से पुलिस ने परीक्षा संबंधी प्रपत्रों के साथ हथियार व कारतूस बरामद किए थे। इसलिए यह चर्चा रही थी कि यह हत्या उसी गुटबाजी में हुई है।