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Aligarh News: परिवार संभालें या बस... 140 महिला परिचालकों ने छोड़ी नौकरी
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रोडवेज की नौकरी में परिवार और ड्यूटी के बीच तालमेल बिठाना कई महिला परिचालकों के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। कम मानदेय, लंबी व अनियमित ड्यूटी और पारिवारिक जिम्मेदारियां के चलते पिछले तीन महीने में अलीगढ़ परिक्षेत्र में नियुक्त करीब 140 महिला परिचालकों ने नौकरी छोड़ दी। स्टाफ की कमी के कारण 100 से अधिक बसें डिपो में खड़ी हैं।
अलीगढ़ परिक्षेत्र में परिचालक भर्ती के लिए न्यूनतम अर्हता इंटरमीडिएट थी, लेकिन भर्ती मेलों में ग्रेजुएट से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट तक ने नाैकरी पाने के लिए आवेदन किया था। परिक्षेत्र के अलीगढ़, हाथरस, कासगंज, एटा व बुलंदशहर डिपो के लिए अप्रैल में 310 महिला परिचालकों की नियुक्ति की गई थी। लेकिन इनमें कई ने ज्वाइन नहीं किया तो कई ने ज्वाइनिंग के बाद नौकरी छोड़ दी। वर्तमान में सिर्फ 173 महिला परिचालक ही कार्यरत हैं।
चालक व परिचालकों की कमी से बस संचालन प्रभावित हो रहा है। परिवहन निगम के पास 756 बसें हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण 100 से अधिक बसें डिपो में खड़ी हैं। इससे निगम को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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कुछ महिला परिचालकों ने बताया कि सुबह चार-पांच बजे ड्यूटी शुरू होने या देर रात ड्यूटी खत्म होने के कारण सुरक्षा और परिवार की चिंता रहती है। वहीं, आउटसोर्सिंग व्यवस्था में 12 से 15 हजार रुपये के मानदेय के मुकाबले 10-12 घंटे की ड्यूटी और टिकट बिक्री का दबाव भी कई महिलाओं को रास नहीं आया।
शादी, छोटे बच्चों की देखभाल और परिवार की जिम्मेदारियों के चलते भी कई महिला कंडक्टर नौकरी जारी नहीं रख सकीं। अधिकांश महिला कर्मचारियों का कहना है कि आस-पास तैनाती, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और आकर्षक वेतन जैसी सुविधाएं मिलें, तो नौकरी छोड़ने की संख्या में कमी आ सकती है।
रिक्त पदों को भरने के लिए होगी नई भर्ती
- परिवहन निगम अब रोजगार मेलों के माध्यम से नई भर्ती के साथ महिला कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य, वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दे रहा है। निगम रिक्त पदों को भरने के लिए रोजगार मेलों के माध्यम से नई भर्ती की तैयारी में जुटा है। - सत्येंद्र कुमार वर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज
नौकरी छोड़ने की मुख्य वजहें
- कम वेतन की तुलना में लंबी और अनियमित ड्यूटी, रात में सुरक्षा को लेकर चिंता, घर-परिवार की जिम्मेदारियां और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के कारण नौकरी की अस्थिरता
केस - एक
बच्चों को नहीं दे पा रही समय
- हाथरस की दिव्या ने बताया कि रोडवेज में परिचालक पद के लिए उत्साह से भर्ती में भाग लिया। चयन भी हो गया, लेकिन कुछ दिन की नाैकरी से ही मन ऊब गया। न परिवार को समय दे पा रही थी, न ही बच्चों को। इसलिए नाैकरी छोड़ना ही अच्छा लगा।
केस - दो
सुरक्षा और अनियमित ड्यूटी
अलीगढ़ की सुमन ने बताया कि सुबह ड्यूटी शुरू होने और देर रात तक बस संचालन के कारण परिवार की जिम्मेदारी निभाना मुश्किल हो गया। सुरक्षा और अनियमित ड्यूटी के चलते नाैकरी से इस्तीफा दे दिया।
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अलीगढ़ परिक्षेत्र में परिचालक भर्ती के लिए न्यूनतम अर्हता इंटरमीडिएट थी, लेकिन भर्ती मेलों में ग्रेजुएट से लेकर पोस्ट ग्रेजुएट तक ने नाैकरी पाने के लिए आवेदन किया था। परिक्षेत्र के अलीगढ़, हाथरस, कासगंज, एटा व बुलंदशहर डिपो के लिए अप्रैल में 310 महिला परिचालकों की नियुक्ति की गई थी। लेकिन इनमें कई ने ज्वाइन नहीं किया तो कई ने ज्वाइनिंग के बाद नौकरी छोड़ दी। वर्तमान में सिर्फ 173 महिला परिचालक ही कार्यरत हैं।
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चालक व परिचालकों की कमी से बस संचालन प्रभावित हो रहा है। परिवहन निगम के पास 756 बसें हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण 100 से अधिक बसें डिपो में खड़ी हैं। इससे निगम को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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कुछ महिला परिचालकों ने बताया कि सुबह चार-पांच बजे ड्यूटी शुरू होने या देर रात ड्यूटी खत्म होने के कारण सुरक्षा और परिवार की चिंता रहती है। वहीं, आउटसोर्सिंग व्यवस्था में 12 से 15 हजार रुपये के मानदेय के मुकाबले 10-12 घंटे की ड्यूटी और टिकट बिक्री का दबाव भी कई महिलाओं को रास नहीं आया।
शादी, छोटे बच्चों की देखभाल और परिवार की जिम्मेदारियों के चलते भी कई महिला कंडक्टर नौकरी जारी नहीं रख सकीं। अधिकांश महिला कर्मचारियों का कहना है कि आस-पास तैनाती, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और आकर्षक वेतन जैसी सुविधाएं मिलें, तो नौकरी छोड़ने की संख्या में कमी आ सकती है।
रिक्त पदों को भरने के लिए होगी नई भर्ती
- परिवहन निगम अब रोजगार मेलों के माध्यम से नई भर्ती के साथ महिला कर्मचारियों के लिए बेहतर कार्य, वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दे रहा है। निगम रिक्त पदों को भरने के लिए रोजगार मेलों के माध्यम से नई भर्ती की तैयारी में जुटा है। - सत्येंद्र कुमार वर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज
नौकरी छोड़ने की मुख्य वजहें
- कम वेतन की तुलना में लंबी और अनियमित ड्यूटी, रात में सुरक्षा को लेकर चिंता, घर-परिवार की जिम्मेदारियां और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के कारण नौकरी की अस्थिरता
केस - एक
बच्चों को नहीं दे पा रही समय
- हाथरस की दिव्या ने बताया कि रोडवेज में परिचालक पद के लिए उत्साह से भर्ती में भाग लिया। चयन भी हो गया, लेकिन कुछ दिन की नाैकरी से ही मन ऊब गया। न परिवार को समय दे पा रही थी, न ही बच्चों को। इसलिए नाैकरी छोड़ना ही अच्छा लगा।
केस - दो
सुरक्षा और अनियमित ड्यूटी
अलीगढ़ की सुमन ने बताया कि सुबह ड्यूटी शुरू होने और देर रात तक बस संचालन के कारण परिवार की जिम्मेदारी निभाना मुश्किल हो गया। सुरक्षा और अनियमित ड्यूटी के चलते नाैकरी से इस्तीफा दे दिया।