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UP: उत्तर भारत में हेपेटाइटिस-बी वायरस में नया म्यूटेशन, बढ़ा खतरा; शोध में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 17 Mar 2026 03:34 PM IST
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सार
उत्तर भारत में हेपेटाइटिस-बी वायरस में नया म्यूटेशन मिला है। इससे खतरा बढ़ गया है। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को गुमराह कर वायरस को बचाने में मदद करता है। टीके के प्रभाव को भी कर कम देता है।
क्लिनिकल रिसर्चर
- फोटो : Freepik
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विस्तार
उत्तर भारत में हेपेटाइटिस-बी वायरस (एचबीवी) में नया म्यूटेशन (अनुवांशिक बदलाव) हो रहा है, जो काफी खतरनाक है। यह म्यूटेशन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को गुमराह कर वायरस को बचाने में मदद करता है और टीके (वैक्सीन) के प्रभाव को भी कम कर उपचार में बाधा पहुंचाता है। जेएन मेडिकल कॉलेज में किए गए शोध में यह चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के एचबीवी से संक्रमित मरीजों में लगभग एक जैसी ही स्थिति पाई गई। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि निगरानी और रोकथाम के उपाय मजबूत नहीं किए गए तो भविष्य में लिवर रोग, संक्रमण और कैंसर के मामलों में वृद्धि हो सकती है।
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उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के एचबीवी से संक्रमित मरीजों में लगभग एक जैसी ही स्थिति पाई गई। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि निगरानी और रोकथाम के उपाय मजबूत नहीं किए गए तो भविष्य में लिवर रोग, संक्रमण और कैंसर के मामलों में वृद्धि हो सकती है।
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शोधार्थियों ने जेएन मेडिकल कॉलेज के 100 एचआईवी-एचबीवी सह-संक्रमित और 50 केवल एचबीवी संक्रमित मरीजों के नमूनों का अध्ययन किया गया। इसके अलावा उत्तर भारत के अलग-अलग अस्पतालों से 1398 मरीजों के नमूनों पर भी अध्ययन किया गया।
परिणामों में पाया गया कि एचआईवी-एचबीवी सह-संक्रमित मरीजों में 36.8 फीसदी मामलों में नया म्यूटेशन मौजूद था। विशेषज्ञों के अनुसार इस अनुवांशिक बदलाव से वायरस “इम्यून एस्केप म्यूटेशन” यानी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) और वैक्सीन के प्रभाव से बच सकता है।
खास बात यह है कि केवल एचबीवी से संक्रमित मरीजों में इस तरह का म्यूटेशन कम पाया गया। अध्ययन में यह भी सामने आया कि उत्तर भारत में एचबीवी का जीनोटाइप-डी लगभग 90 फीसदी मामलों में प्रमुख है, जबकि करीब 10 फीसदी मामलों में जीनोटाइप-ए पाया गया।
उपचार हो सकता है प्रभावित
इस शोध से जुड़े जेएन मेडिकल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर, राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. सैयद हैदर मेहदी हुसैनी ने बताया कि ऐसे म्यूटेशन भविष्य में एचबीवी की जांच, वैक्सीन की प्रभावशीलता और इलाज की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
इस शोध से जुड़े जेएन मेडिकल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर, राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. सैयद हैदर मेहदी हुसैनी ने बताया कि ऐसे म्यूटेशन भविष्य में एचबीवी की जांच, वैक्सीन की प्रभावशीलता और इलाज की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए एचआईवी मरीजों में हेपेटाइटिस-बी की नियमित स्क्रीनिंग और जीनोटाइप निगरानी बेहद जरूरी है। भारत में करीब चार करोड़ लोग एचबीवी से संक्रमित हैं। बड़ी संख्या में लोग एचआईवी से भी प्रभावित हैं। ऐसे में दोनों संक्रमणों के संयुक्त अध्ययन से सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति बनाने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
जांच में गलत परिणाम देने की क्षमता रखता है म्यूटेशन
शोध में शामिल जेएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. हिबा सामी ने बताया कि वर्ष 2011 से भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम में हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन शामिल है, लेकिन उत्तर भारत में अभी भी संक्रमण की दर चिंता का विषय है।
शोध में शामिल जेएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. हिबा सामी ने बताया कि वर्ष 2011 से भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम में हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन शामिल है, लेकिन उत्तर भारत में अभी भी संक्रमण की दर चिंता का विषय है।
नया म्यूटेनश इतना खतरनाक होता है कि जांच में गलत परिणाम देने की क्षमता रखता है। इसलिए वैक्सीन और डायग्नोस्टिक किट की प्रभावशीलता की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए। यह अध्ययन उत्तर भारत में वायरस की बदलती प्रकृति को समझने और भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों को दिशा देने में अहम साबित हो होगा।
अलीगढ़ मंडल में भी म्यूटेशन
शोधार्थियों के मुताबिक अलीगढ़ के 67%, हाथरस के 40, एटा के सात और कासगंज के 10% एचबीवी के मरीजों में म्यूटेशन पाया गया है, जो चिंता का विषय है। अलीगढ़ मंडल में संक्रमण की दर में भी इजाफा हुआ है।
शोधार्थियों के मुताबिक अलीगढ़ के 67%, हाथरस के 40, एटा के सात और कासगंज के 10% एचबीवी के मरीजों में म्यूटेशन पाया गया है, जो चिंता का विषय है। अलीगढ़ मंडल में संक्रमण की दर में भी इजाफा हुआ है।
बचाव
-गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच जरूरी
-खून की लगातार जांच कराते रहें
-हेपेटाइटिस-बी का टीका जरूर लगवाएं
-एंटीवायरल दवा चिकित्सक की सलाह पर ही लें
-सुरक्षित यौन संबंध, शराब और धूम्रपान से परहेज करें
-रेजर, सुई, टूथब्रश यानी व्यक्तिगत चीजें किसी के साथ साझा न करें
-गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच जरूरी
-खून की लगातार जांच कराते रहें
-हेपेटाइटिस-बी का टीका जरूर लगवाएं
-एंटीवायरल दवा चिकित्सक की सलाह पर ही लें
-सुरक्षित यौन संबंध, शराब और धूम्रपान से परहेज करें
-रेजर, सुई, टूथब्रश यानी व्यक्तिगत चीजें किसी के साथ साझा न करें