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Aligarh News: मच्छरों को पनाह दी तो खैर नहीं, लगेगा जुर्माना, न सुधरे तो एफआईआर
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नगर निगम कार्यालय।
- फोटो : Archive
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अब मच्छरों का लार्वा मिला तो सिर्फ समझाइश नहीं मिलेगी, जेब भी ढीली करनी पड़ेगी। नगर निगम पहली बार ऐसा कानून लाने जा रहा है, जिसमें घर, प्लॉट या निर्माण स्थल पर मच्छरजनित स्थितियां मिलने पर जुर्माना और लगातार लापरवाही पर एफआईआर तक हो सकेगी। शनिवार की बोर्ड बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव रखा जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि जागरूकता और फॉगिंग के बावजूद डेंगू-मलेरिया का खतरा कम नहीं हो रहा, इसलिए सख्ती जरूरी है।
नगर निगम बोर्ड बैठक के एजेंडे में शामिल प्रस्ताव के अनुसार उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम-1959 के तहत मच्छरजनित स्थितियां पैदा करने वालों के विरुद्ध उपविधि-2026 लागू की जाएगी। इसके तहत यदि किसी भवन, प्लॉट, संस्थान, फैक्टरी, निर्माणाधीन स्थल या परिसर में पानी जमा मिला और वहां मच्छरों के लार्वा या उनके पनपने की स्थिति पाई गई तो संबंधित भवन स्वामी या कब्जेदार को जिम्मेदार माना जाएगा।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले बढ़ जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीमें घर-घर जाकर लार्वा सर्वे करती हैं, लेकिन लोगों की लापरवाही के कारण छतों पर रखी टंकियां, कूलर, टूटे बर्तन, पुराने टायर, गमले और निर्माण स्थलों पर जमा पानी मच्छरों की फैक्टरी बने रहते हैं। ऐसे में केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं।
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नियम के मुताबिक, यदि प्रस्ताव को बोर्ड की मंजूरी मिलती है तो पहले चरण में नोटिस जारी किया जाएगा। निर्धारित समय में स्थिति में सुधार नहीं होने पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बाद भी नियमों का उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन जुर्माना वसूलने, भवन सील करने और आवश्यक होने पर आपराधिक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकेगी।
अधिकारियों का दावा है कि प्रदेश के कई नगर निगमों में इस तरह की उपविधियां पहले से लागू हैं। अलीगढ़ में पहली बार इसे कानूनी स्वरूप देने की तैयारी की गई है। नगर निगम का मानना है कि इससे लोगों में जिम्मेदारी बढ़ेगी और संचारी रोगों की रोकथाम में मदद मिलेगी।
मच्छरजनित स्थितियां पैदा करने वालों के खिलाफ उपविधि लाने का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में रखा जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को दंडित करना नहीं, बल्कि संचारी रोगों की रोकथाम के लिए जिम्मेदार बनाना है। बोर्ड की सहमति मिलने पर लागू करने संबंधी प्रक्रिया पूरी करेंगे। - प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त
घर में कहां पैदा होते हैं मच्छर : . कूलर, गमले की ट्रे, फ्रिज की ट्रे, छत की टंकी, पुराने टायर, कबाड़। निर्माण स्थालों पर पड़ा सामान, घर के बाहर गड्डों में भी लार्वा हो सकता है।
इसलिए मच्छर जोखिम भरे : अलीगढ़ शहर के 90 मोहल्ले और देहात क्षेत्र के 144 गांव डेंगू और मलेरिया के लिए अति संवेदनशील घोषित हैं।
हर परिवार पर बोझ, कारोबार भी खूब: प्रत्येक परिवार हर महीने खर्च कर रहा 200 रुपये, इस तरह मच्छरों से बचने का कुल कारोबार 20 करोड़ रुपये अनुमानित।
(स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े)
पार्षदों ने मांगा जबाव- पानी को गृहकर में जोड़ना अतिरिक्त बोझ, क्या किए बदलाव?
अलीगढ़। नगर निगम के तीन वर्ष के कार्यकाल में शनिवार को तीसरी सामान्य बोर्ड बैठक होने जा रही है। हालांकि नियम कहता है कि कम से कम साल में छह और अधिकतम 12 सामान्य बोर्ड बैठक होनी चाहिए। मगर ऐसा न होना भी पार्षदों की नाराजगी का कारण बन रहा है। इसके अलावा जल मूल्य व निर्माण के मुद्दों पर कुछ पार्षद इस बैठक में मुखर हो सकते हैं।
इस बोर्ड बैठक के एजेंडे व प्रस्ताव पर गौर करें तो पहला बिंदु 19 जुलाई 2025 को हुई सामान्य बैठक के एजेंडे की पुष्टि का है। इसके बाद पार्षदों की ओर से रखे गए 102 सवालों पर चर्चा का बिंदु है। जिसमें सबसे अहम बिंदु जलमूल्य का है। जिसे नगर निगम ने संपत्तिकर में शामिल कर दिया है और वरिष्ठ पार्षद कुलदीप पांडेय का तर्क है कि बहुत से भवन ऐसे हैं, जिनमें पानी की सप्लाई नहीं है। बावजूद उनके यहां संपत्तिकर में जलमूल्य का बिल लगकर पहुंच रहा है जो गलत है। इसके अलावा विकास संबंधी मुद्दे कई पार्षदों के हैं। दूसरे प्रमुख पार्षद पुष्पेंद्र सिंह जादौन ने पार्षदों की सुविधाओं व सहूलियतों को लेकर कुछ सवाल रखे हैं। इसके बाद मच्छर संबंधी प्रस्ताव, ई रिक्शा पंजीकरण में दस फीसदी की छूट संबंधी प्रस्ताव, फिर विकास कार्य संबंधी स्वीकृति प्रस्ताव, तात्कालिक आवश्यका वाले प्रस्ताव व अंत में वेस्ट प्लांट स्थापना संबंधी बजट प्रस्ताव शामिल है।
. नगर निगम में सभी काम समन्वय से हो रहे हैं। इसी क्रम में कुछ मुद्दों पर चर्चा के लिए शनिवार को बोर्ड बैठक रखी गई है। इसी समन्वय को आगे बढ़ाने पर विचार के साथ कुछ निर्णय शहर की जरूरत को लेकर होंगे। -मेयर प्रशांत सिंघल
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नगर निगम बोर्ड बैठक के एजेंडे में शामिल प्रस्ताव के अनुसार उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम-1959 के तहत मच्छरजनित स्थितियां पैदा करने वालों के विरुद्ध उपविधि-2026 लागू की जाएगी। इसके तहत यदि किसी भवन, प्लॉट, संस्थान, फैक्टरी, निर्माणाधीन स्थल या परिसर में पानी जमा मिला और वहां मच्छरों के लार्वा या उनके पनपने की स्थिति पाई गई तो संबंधित भवन स्वामी या कब्जेदार को जिम्मेदार माना जाएगा।
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नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले बढ़ जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीमें घर-घर जाकर लार्वा सर्वे करती हैं, लेकिन लोगों की लापरवाही के कारण छतों पर रखी टंकियां, कूलर, टूटे बर्तन, पुराने टायर, गमले और निर्माण स्थलों पर जमा पानी मच्छरों की फैक्टरी बने रहते हैं। ऐसे में केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं।
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नियम के मुताबिक, यदि प्रस्ताव को बोर्ड की मंजूरी मिलती है तो पहले चरण में नोटिस जारी किया जाएगा। निर्धारित समय में स्थिति में सुधार नहीं होने पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बाद भी नियमों का उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन जुर्माना वसूलने, भवन सील करने और आवश्यक होने पर आपराधिक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकेगी।
अधिकारियों का दावा है कि प्रदेश के कई नगर निगमों में इस तरह की उपविधियां पहले से लागू हैं। अलीगढ़ में पहली बार इसे कानूनी स्वरूप देने की तैयारी की गई है। नगर निगम का मानना है कि इससे लोगों में जिम्मेदारी बढ़ेगी और संचारी रोगों की रोकथाम में मदद मिलेगी।
मच्छरजनित स्थितियां पैदा करने वालों के खिलाफ उपविधि लाने का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में रखा जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को दंडित करना नहीं, बल्कि संचारी रोगों की रोकथाम के लिए जिम्मेदार बनाना है। बोर्ड की सहमति मिलने पर लागू करने संबंधी प्रक्रिया पूरी करेंगे। - प्रेम प्रकाश मीणा, नगर आयुक्त
घर में कहां पैदा होते हैं मच्छर : . कूलर, गमले की ट्रे, फ्रिज की ट्रे, छत की टंकी, पुराने टायर, कबाड़। निर्माण स्थालों पर पड़ा सामान, घर के बाहर गड्डों में भी लार्वा हो सकता है।
इसलिए मच्छर जोखिम भरे : अलीगढ़ शहर के 90 मोहल्ले और देहात क्षेत्र के 144 गांव डेंगू और मलेरिया के लिए अति संवेदनशील घोषित हैं।
हर परिवार पर बोझ, कारोबार भी खूब: प्रत्येक परिवार हर महीने खर्च कर रहा 200 रुपये, इस तरह मच्छरों से बचने का कुल कारोबार 20 करोड़ रुपये अनुमानित।
(स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े)
पार्षदों ने मांगा जबाव- पानी को गृहकर में जोड़ना अतिरिक्त बोझ, क्या किए बदलाव?
अलीगढ़। नगर निगम के तीन वर्ष के कार्यकाल में शनिवार को तीसरी सामान्य बोर्ड बैठक होने जा रही है। हालांकि नियम कहता है कि कम से कम साल में छह और अधिकतम 12 सामान्य बोर्ड बैठक होनी चाहिए। मगर ऐसा न होना भी पार्षदों की नाराजगी का कारण बन रहा है। इसके अलावा जल मूल्य व निर्माण के मुद्दों पर कुछ पार्षद इस बैठक में मुखर हो सकते हैं।
इस बोर्ड बैठक के एजेंडे व प्रस्ताव पर गौर करें तो पहला बिंदु 19 जुलाई 2025 को हुई सामान्य बैठक के एजेंडे की पुष्टि का है। इसके बाद पार्षदों की ओर से रखे गए 102 सवालों पर चर्चा का बिंदु है। जिसमें सबसे अहम बिंदु जलमूल्य का है। जिसे नगर निगम ने संपत्तिकर में शामिल कर दिया है और वरिष्ठ पार्षद कुलदीप पांडेय का तर्क है कि बहुत से भवन ऐसे हैं, जिनमें पानी की सप्लाई नहीं है। बावजूद उनके यहां संपत्तिकर में जलमूल्य का बिल लगकर पहुंच रहा है जो गलत है। इसके अलावा विकास संबंधी मुद्दे कई पार्षदों के हैं। दूसरे प्रमुख पार्षद पुष्पेंद्र सिंह जादौन ने पार्षदों की सुविधाओं व सहूलियतों को लेकर कुछ सवाल रखे हैं। इसके बाद मच्छर संबंधी प्रस्ताव, ई रिक्शा पंजीकरण में दस फीसदी की छूट संबंधी प्रस्ताव, फिर विकास कार्य संबंधी स्वीकृति प्रस्ताव, तात्कालिक आवश्यका वाले प्रस्ताव व अंत में वेस्ट प्लांट स्थापना संबंधी बजट प्रस्ताव शामिल है।
. नगर निगम में सभी काम समन्वय से हो रहे हैं। इसी क्रम में कुछ मुद्दों पर चर्चा के लिए शनिवार को बोर्ड बैठक रखी गई है। इसी समन्वय को आगे बढ़ाने पर विचार के साथ कुछ निर्णय शहर की जरूरत को लेकर होंगे। -मेयर प्रशांत सिंघल