अलीगढ़: निजी मैदान जगमग, सरकारी तंगहाल, मैदान में नेट प्रैक्टिस तक सीमित हैं क्रिकेटर
अलीगढ़ जिले में 20 से अधिक क्रिकेट एकेडमी संचालित हैं। यहां से अंडर-14, अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 स्तर तक खिलाड़ी पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें रणजी जैसे बड़े मंच तक पहुंचने का इंतजार है। स्थानीय क्रिकेट में बेहतर प्रशिक्षण, मैदान और प्रतिस्पर्धी अवसरों की जरूरत महसूस की जा रही है।
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अलीगढ़ जिले में क्रिकेट प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें निखरने के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। निजी क्रिकेट स्टेडियमों में फ्लड लाइटें चमक रही हैं और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। वहीं, सरकारी स्पोर्ट्स स्टेडियम में क्रिकेटर खुलकर चौके-छक्के तक नहीं लगा पा रहे हैं। यहां खिलाड़ियों को मुख्य रूप से नेट पर अभ्यास करने का मौका मिलता है।
शहर में निजी क्रिकेट स्टेडियमों की संख्या लगातार बढ़ रही है। महुआ खेड़ा में दो, जबकि आगरा रोड, अनूपशहर रोड और मथुरा रोड पर एक-एक निजी स्टेडियम संचालित हैं। इन मैदानों पर क्रिकेटरों को मैच खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिल रहे हैं। इसके विपरीत सरकारी स्पोर्ट्स स्टेडियम में क्रिकेट के साथ अन्य खेलों के खिलाड़ी भी अभ्यास करते हैं। ऐसे में क्रिकेटरों को पूरे मैदान पर खेलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
अलीगढ़ से रणजी ट्रॉफी तक पहुंचने वाले खिलाड़ियों का इतिहास भी लंबा रहा है। रिजवान शमशाद ने 1990-91 में उत्तर प्रदेश की ओर से रणजी ट्रॉफी में पदार्पण किया और 2006 तक खेलते रहे। इसके बाद रिंकू सिंह ने नवंबर 2016 में उत्तर प्रदेश की ओर से रणजी में पदार्पण किया। वह आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचे। इन दोनों के बीच और रिंकू के बाद जिले से कोई दूसरा खिलाड़ी यूपी की रणजी टीम में जगह नहीं बना सका।
अलीगढ़ में जन्मे मोहम्मद शाहिद ने रेलवे और उत्तर प्रदेश की टीमों का प्रतिनिधित्व करते हुए 64 प्रथम श्रेणी मैच खेले। दिसंबर 2014 में उनका निधन हो गया। असलम अली ने 1973-74 से 1983-84 तक प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला। वहीं, इंजीनियर फसाहत अली ने 1989 से 1992 के बीच यूपी की ओर से रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लिया।
नए रणजी खिलाड़ी का इंतजार
जिले में 20 से अधिक क्रिकेट एकेडमी संचालित हैं। यहां से अंडर-14, अंडर-16, अंडर-19 और अंडर-23 स्तर तक खिलाड़ी पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें रणजी जैसे बड़े मंच तक पहुंचने का इंतजार है। स्थानीय क्रिकेट में बेहतर प्रशिक्षण, मैदान और प्रतिस्पर्धी अवसरों की जरूरत महसूस की जा रही है। अलीगढ़ स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव इंजीनियर फसाहत अली का कहना है कि खिलाड़ियों में क्षमता है, लेकिन मेहनत में कमी रह जाती है। खिलाड़ी विभिन्न आयु वर्गों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन आगे का सफर तय नहीं कर पा रहे हैं। यह चिंताजनक है।
स्टेडियम में क्रिकेट खिलाडि़यों के लिए सेंटर है। नेट प्रैक्टिस करने के लिए विकेट भी हैं। आवश्यकता अनुसार पूरा मैदान भी मैच खेलने के लिए दिया जाता है।-पूनम लता, जिला क्रीड़ाधिकारी