नशेड़ी का हाईवोल्टेज ड्रामा: रिटायर दरोगा के बेटे ने लाइसेंसी रिवाल्वर से की फायरिंग, पुलिस पर दागीं गोलियां
रिटायर दरोगा के बेटे अभिषेक गुप्ता का नशे की गिरफ्त में फंसने का यह सफर अचानक शुरू नहीं हुआ था। युवावस्था में कदम रखते ही अभिषेक बुरी संगत और नशे की ऐसी लत का शिकार हुआ कि उसका पूरा जीवन और परिवार बिखर गया।
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अलीगढ़ में थाना क्वार्सी क्षेत्र के मोहल्ला विष्णुपुरी बेला मार्ग पर रविवार शाम रिटायर दरोगा के छोटे बेटे ने नशे के लिए रुपये न मिलने पर जमकर उत्पात मचाया। आरोपी ने घर में तोड़फोड़ करने के बाद पिता के साथ भी मारपीट की और पिता की लाइसेंसी रिवाल्वर उन पर तान दी। आरोपी ने खुद को कमरे में बंद कर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दीं। मौके पर पहुंची पुलिस पर भी आरोपी ने फायर कर दिया। करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत और घेराबंदी के बाद पुलिस ने आसपास के घरों की छतों के रास्ते मकान की पहली मंजिल पर बने कमरे में घुसकर आरोपी को दबोच लिया। पुलिस ने मौके से लाइसेंसी रिवाल्वर और 12 कारतूस भी कब्जे में ले लिए हैं।
विष्णुपुरी बेला मार्ग निवासी राजेश चंद्र गुप्ता यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद से करीब चार साल पहले नोएडा से रिटायर हुए थे। उनकी पत्नी पिंकी का चार साल पहले निधन हो चुका है। राजेश गुप्ता के पिता स्वर्गीय सुरेशचंद्र गुप्ता चंडौस के एक इंटर कॉलेज में शिक्षक थे।
राजेश का दिल्ली में भी मकान है, जहां वे अक्सर रहते हैं और बीच-बीच में अलीगढ़ आते रहते हैं। चार दिन पहले ही वह दिल्ली से अलीगढ़ आए थे। घर पर उनके साथ दो बेटे रहते हैं। बड़ा बेटा मानसिक समस्या से ग्रस्त है, जबकि 26 वर्षीय छोटा बेटा अभिषेक गुप्ता नशे का गंभीर आदी है। अभिषेक पहले भी कई बार नशा मुक्ति केंद्र जा चुका है।
राजेश के अलीगढ़ आने के बाद से ही अभिषेक लगातार उनसे रुपयों के लिए झगड़ा कर रहा था। मोहल्ले के लोगों को भी इसकी जानकारी थी। रविवार दोपहर बाद अभिषेक ने फिर से तांडव शुरू कर दिया। उसने अपने कमरे का सामान और घरेलू चीजें गली में फेंकनी शुरू कर दीं और उन्हें तोड़ डाला। विरोध करने पर उसने रिटायर पिता के साथ मारपीट की और उन पर स्टूल फेंककर मारा।
उसने रविवार शाम करीब 5:30 बजे घर में रखी पिता की लाइसेंसी रिवाल्वर उठाई और दनादन फायरिंग शुरू कर दी। ताबड़तोड़ गोलियों की आवाज से पूरे इलाके में दहशत फैल गई और लोग अपने घरों में दुबक गए। इस बीच किसी ने घटना की सूचना पुलिस को दे दी। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी सिटी आदित्य बंसल, सीओ तृतीय सर्वम सिंह समेत तीन थानों का पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंच गया।
पुलिस को देखते ही आरोपी अभिषेक और भड़क गया। उसने पुलिसकर्मियों को चेतावनी दी कि यदि किसी ने पास आने की कोशिश की तो वह गोली मार देगा। जब पुलिसकर्मियों ने उसे दबोचने के लिए आगे बढ़ने का प्रयास किया तो उसने पुलिस पर भी फायर झोंक दिया। आरोपी ने कुल छह राउंड गोलियां चलाईं।
डेढ़ घंटे की घेराबंदी के बाद ऐसे हुआ काबू
आरोपी के आक्रामक तेवर को देखते हुए पुलिस ने सूझबूझ का परिचय दिया। पुलिसकर्मी पड़ोस में ही स्थित रिटायर दरोगा के भाई अवधेश गुप्ता के मकान की छत पर चढ़े। वहां से सटी छत के रास्ते पुलिस ने सीधे अभिषेक के कमरे में प्रवेश किया और उस पर काबू पा लिया। उसके हाथ से लाइसेंसी रिवाल्वर छीनकर उसे हिरासत में ले लिया गया और थाने लाया गया। रिटायर दरोगा राजेश कुमार गुप्ता ने बताया कि दो साल पहले उन्हें पैरालाइसिस (लकवा) का अटैक आया था, जिसके कारण उन्हें चलने-फिरने में असुविधा होती है। इसी लाचारी का फायदा उठाकर उनका नशेड़ी बेटा अभिषेक आए दिन प्रताड़ित करता था और रविवार को उसने बेरहमी से मारपीट करते हुए लाइसेंसी रिवाल्वर से फायरिंग कर दी।
सूचना मिली थी कि एक युवक ने पिता के साथ मारपीट करते हुए फायरिंग की है। पुलिस ने घेराबंदी की। युवक ने पुलिस पर भी फायरिंग की। थाना सिविल लाइन के प्रभारी सतवीर, सब इंस्पेक्टर हारुन आदि अन्य पुलिस कर्मियों ने बहादुरी का परिचय देते हुए खिड़की से अंदर जाकर फायरिंग करने वाले पर नियंत्रण किया। आरोपी पर केस दर्ज किया जाएगा।- आदित्य बंसल, एसपी सिटी
मां की मौत के बाद नशे की दलदल में फंस गया अभिषेक
रिटायर दरोगा के बेटे अभिषेक गुप्ता का नशे की गिरफ्त में फंसने का यह सफर अचानक शुरू नहीं हुआ था। युवावस्था में कदम रखते ही अभिषेक बुरी संगत और नशे की ऐसी लत का शिकार हुआ कि उसका पूरा जीवन और परिवार बिखर गया।
परिजनों और स्थानीय लोगों के मुताबिक अभिषेक जवानी की दहलीज पर पहुंचते ही नशे की बुरी लत में पड़ गया था। पिता राजेशचंद्र गुप्ता के अक्सर बाहर रहने और घर में किसी सख्त रोकटोक के अभाव में उसके कदम लगातार गलत दिशा में बढ़ते चले गए। स्थिति तब और अधिक बदतर हो गई जब चार साल पहले उसकी मां पिंकी का निधन हो गया। मां के जाने के बाद घर में उसे टोकने या संभालने वाला कोई नहीं बचा।
पिता राजेश गुप्ता कहते हैं कि उन्होंने बेटे को इस दलदल से बाहर निकालने के कई प्रयास किए। उसे दो बार नशा मुक्ति केंद्र भी भेजा गया, जहां वह दो से तीन महीने तक रहा। केंद्र से लौटने के बाद कुछ दिनों तक तो उसका व्यवहार सामान्य रहता, लेकिन कुछ समय बाद फिर उसी ढर्रे पर लौट आता। नशे की लत के कारण वह कोई काम-धंधा भी नहीं कर सका। घर के हालात ऐसे थे कि नियमित रूप से खाना बनाने के बजाय होटल या फूड डिलीवरी के जरिये काम चलता था। राजेश के दोनों बेटों की शादी न होने के कारण परिवार पहले से ही अस्त-व्यस्त है।