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Aligarh News: पति के इंतकाल के बाद नहीं टूटीं शबाना, मथुरा-वृंदावन तक पहुंचा हुनर
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शाहजमाल ईदगाह के पास लड्डू गोपाल व माता रानी की पोशाक तैयार करतीं शबाना तहसीन, साथ में आफरीन, म
- फोटो : samvad
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शाहजमाल ईदगाह रोड निवासी शबाना तहसीन ने पति के इंतकाल के बाद हिम्मत नहीं हारी। अपने हुनर के दम पर सिलाई व फैशन डिजाइनिंग के कारोबार को नई पहचान दी। आज उनके द्वारा तैयार की गईं लड्डू गोपाल और माता रानी की आकर्षक पोशाकें मथुरा और वृंदावन तक पहुंच रही हैं। साथ ही वह जरूरतमंद महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम भी कर रही हैं।
शबाना तहसीन पिछले 10 वर्षों से सिलाई के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। वह लहंगा, गरारा, लड्डू गोपाल और माता रानी के पोशाक समेत फैंसी डिजाइन के कपड़े तैयार करती हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में वर्ष 2021 में उनके पति का इंतकाल हो गया था। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति और बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। कठिन परिस्थितियों में उन्होंने पूरी तरह सिलाई के कारोबार को अपनाकर नई शुरुआत की।
शुरुआत में उन्होंने आसपास की महिलाओं को जोड़कर सिलाई सिखाना शुरू किया, जिससे जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार का सहारा मिला। धीरे-धीरे उन्होंने बाहर के ऑर्डर पर कपड़े सिलने शुरू किए। उनके द्वारा तैयार की जा रहीं लड्डू गोपाल और माता रानी की पोशाकें मथुरा और वृंदावन तक पहुंच रही हैं। करीब 30 महिलाओं के साथ उनका सिलाई कारोबार सफलतापूर्वक चल रहा है।
शबाना ने बताया कि इस कार्य में तबस्सुम, सेरिस, मदीहा, जूही, फरा, सीमा, आफरीन, मिन्हा, अलीजा और शहनाज सहयोग कर रही हैं। उनका उद्देश्य केवल कारोबार बढ़ाना नहीं, बल्कि जरूरतमंद महिलाओं को हुनर सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है।
शबाना तहसीन पिछले 10 वर्षों से सिलाई के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। वह लहंगा, गरारा, लड्डू गोपाल और माता रानी के पोशाक समेत फैंसी डिजाइन के कपड़े तैयार करती हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में वर्ष 2021 में उनके पति का इंतकाल हो गया था। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति और बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। कठिन परिस्थितियों में उन्होंने पूरी तरह सिलाई के कारोबार को अपनाकर नई शुरुआत की।
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शुरुआत में उन्होंने आसपास की महिलाओं को जोड़कर सिलाई सिखाना शुरू किया, जिससे जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार का सहारा मिला। धीरे-धीरे उन्होंने बाहर के ऑर्डर पर कपड़े सिलने शुरू किए। उनके द्वारा तैयार की जा रहीं लड्डू गोपाल और माता रानी की पोशाकें मथुरा और वृंदावन तक पहुंच रही हैं। करीब 30 महिलाओं के साथ उनका सिलाई कारोबार सफलतापूर्वक चल रहा है।
शबाना ने बताया कि इस कार्य में तबस्सुम, सेरिस, मदीहा, जूही, फरा, सीमा, आफरीन, मिन्हा, अलीजा और शहनाज सहयोग कर रही हैं। उनका उद्देश्य केवल कारोबार बढ़ाना नहीं, बल्कि जरूरतमंद महिलाओं को हुनर सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है।