{"_id":"6a0a2ffa7e9a88fcb30f2a34","slug":"the-patient-was-gasping-for-breath-the-attendants-were-shouting-an-argument-continued-with-the-doctor-aligarh-news-c-2-gur1004-976270-2026-05-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Aligarh News: मरीज की उखड़ रही थी सांस, चिल्ला रहे थे तीमारदार... डॉक्टर से होती रही बहस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Aligarh News: मरीज की उखड़ रही थी सांस, चिल्ला रहे थे तीमारदार... डॉक्टर से होती रही बहस
विज्ञापन
जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लगी मरीजों की भीड़।
- फोटो : samvad
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जेएन मेडिकल कॉलेज की ट्रॉमा सेंटर सेंटर की इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर लेटे मरीज (56) की सांसें उखड़ रही थीं। डॉक्टर एक बार देखकर दूसरे मरीज को देखने में व्यस्त हो गया था। बस इसी बात पर मरीज के साथ आए आधा दर्जन करीब तीमारदार चीखने-चिल्लाने लगे। इससे इमरजेंसी का माहौल गर्मा गया और तनाव की स्थिति बनने लगी।
इस हंगामे के बीच दूसरे डॉक्टर ने मरीज के पास पहुंचकर देखना शुरू किया और परिजनों को शांत किया। तब हालात सामान्य हुए, वर्ना फिर से तीमारदारों व डॉक्टरों में विवाद के हालात बन गए थे।
यह नजारा था रविवार रात 8.40 बजे का। तीमारदारों से बातचीत में पता चला कि वह शहर से ही मरीज को कुछ देर पहले लेकर पहुंचे। पर्चा बनवाने की प्रक्रिया के बाद डॉक्टर देखकर दूसरे मरीज को देखने लगे। चूंकि मरीज परेशान था। इसलिए परिजन यह चाह रहे थे कि डॉक्टर दूसरे मरीज को देखने के बजाय पहले उनके मरीज को देखकर उसकी तबीयत काे स्थिर करे।
बस इसी बात पर वहां चीखना चिल्लाना शुरू हो गया था। यह कोई आम बात नहीं। इमरजेंसी में आए दिन होने वाले इसी तरह के विवादों के चलते पिछले एक वर्ष में छह बार हड़ताल हो चुकी है। हर हड़ताल में डॉक्टरों की मांग रहती है कि एक मरीज के साथ दो ही तीमारदार अंदर आएं। मगर बावजूद इसके यह व्यवस्था सुधर नहीं पा रही।
ये थे हालात
ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी के मुख्य द्वार पर गार्ड बैठा था, लेकिन वह किसी को रोकटोक नहीं रहा था। फिर अंदर इमरजेंसी के द्वार पर भी गार्ड बैठे थे। उन्हें भी इस बात से कोई मतलब नहीं था कि अंदर मरीज के साथ कितने लोग जा रहे हैं। जब हंगामा शुरू हुआ, तब गार्ड कुछ देर के लिए हरकत में आए।
फिर अपनी कुर्सियों पर बैठ गए। उस समय इमरजेंसी में करीब 35 मरीज अलग अलग स्ट्रेचर पर लेटे थे। आधा दर्जन डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ उन्हें उपचार देने में लगे थे। हर मरीज के साथ कम से कम चार-चार, पांच-पांच तीमारदार थे। हर तीमारदार डॉक्टर को पहले अपने मरीज को देखने के लिए खींच रहा था। इसी खींचतान में कई बार डॉक्टर झल्लाकर तेज आवाज में बोल दे रहे थे। बस यही झल्लाहट कई बार विवाद का कारण बनती है। बता दें कि 24 घंटे में इस इमरजेंसी में 1000 करीब मरीज उपचार के लिए आते हैं।
-सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए मंथन जारी है। इस पर जल्द बड़े बदलाव दिखाई देंगे। मेडिकल कालेज की इमरजेंसी-ट्रॉमा सेंटर के गेट पर तैनात गार्ड को भी इस विषय में हिदायत दी गई है कि एक मरीज के साथ सिर्फ दो तीमारदार ही जाएं। अगर कहीं कोई लापरवाही हो रही है तो इस पर भी जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।-प्रो.मो.नवेद खान, प्रॉक्टर एएमयू
-सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी होनी चाहिए। यह ठीक हो जाए इस तरह के विवाद और घटना नहीं होगी। डॉक्टर अख्तर अली, उपाध्यक्ष आरडीए
-11 महीने में छह बार हड़ताल-
-5 मई 2026: महिला डॉक्टर और तीमारदार के बीच कहासुनी, मारपीट पर हड़ताल।
-अप्रैल 2026 : महिला डॉक्टर के साथ अभद्रता के विरोध में डॉक्टरों की हड़ताल।
-22 मार्च 2026 : मरीज के तीमारदार और स्टाफ के साथ मारपीट के बाद हड़ताल।
-जनवरी 2026 : डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच झड़प के बाद सुरक्षा के लिए हड़ताल।
-सितंबर 2025: रेजिडेंट डॉक्टरों की मांगों और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर सांकेतिक विरोध।
-जून-जुलाई 2025 : सुरक्षा गार्डों और डॉक्टरों के बीच विवाद के बाद हुई हड़ताल।
हड़ताल की तीन मुख्य वजह
-डॉक्टरों के साथ अभद्रता-तीमारदारों या बाहरी तत्वों ने डॉक्टरों के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार।
-सुरक्षा की कमी- कैंपस में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस चौकी की सक्रियता की मांग।
-प्रशासनिक विवाद- मेडिकल प्रशासन और रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के बीच तालमेल की कमी।
इस हंगामे के बीच दूसरे डॉक्टर ने मरीज के पास पहुंचकर देखना शुरू किया और परिजनों को शांत किया। तब हालात सामान्य हुए, वर्ना फिर से तीमारदारों व डॉक्टरों में विवाद के हालात बन गए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह नजारा था रविवार रात 8.40 बजे का। तीमारदारों से बातचीत में पता चला कि वह शहर से ही मरीज को कुछ देर पहले लेकर पहुंचे। पर्चा बनवाने की प्रक्रिया के बाद डॉक्टर देखकर दूसरे मरीज को देखने लगे। चूंकि मरीज परेशान था। इसलिए परिजन यह चाह रहे थे कि डॉक्टर दूसरे मरीज को देखने के बजाय पहले उनके मरीज को देखकर उसकी तबीयत काे स्थिर करे।
बस इसी बात पर वहां चीखना चिल्लाना शुरू हो गया था। यह कोई आम बात नहीं। इमरजेंसी में आए दिन होने वाले इसी तरह के विवादों के चलते पिछले एक वर्ष में छह बार हड़ताल हो चुकी है। हर हड़ताल में डॉक्टरों की मांग रहती है कि एक मरीज के साथ दो ही तीमारदार अंदर आएं। मगर बावजूद इसके यह व्यवस्था सुधर नहीं पा रही।
ये थे हालात
ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी के मुख्य द्वार पर गार्ड बैठा था, लेकिन वह किसी को रोकटोक नहीं रहा था। फिर अंदर इमरजेंसी के द्वार पर भी गार्ड बैठे थे। उन्हें भी इस बात से कोई मतलब नहीं था कि अंदर मरीज के साथ कितने लोग जा रहे हैं। जब हंगामा शुरू हुआ, तब गार्ड कुछ देर के लिए हरकत में आए।
फिर अपनी कुर्सियों पर बैठ गए। उस समय इमरजेंसी में करीब 35 मरीज अलग अलग स्ट्रेचर पर लेटे थे। आधा दर्जन डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ उन्हें उपचार देने में लगे थे। हर मरीज के साथ कम से कम चार-चार, पांच-पांच तीमारदार थे। हर तीमारदार डॉक्टर को पहले अपने मरीज को देखने के लिए खींच रहा था। इसी खींचतान में कई बार डॉक्टर झल्लाकर तेज आवाज में बोल दे रहे थे। बस यही झल्लाहट कई बार विवाद का कारण बनती है। बता दें कि 24 घंटे में इस इमरजेंसी में 1000 करीब मरीज उपचार के लिए आते हैं।
-सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए मंथन जारी है। इस पर जल्द बड़े बदलाव दिखाई देंगे। मेडिकल कालेज की इमरजेंसी-ट्रॉमा सेंटर के गेट पर तैनात गार्ड को भी इस विषय में हिदायत दी गई है कि एक मरीज के साथ सिर्फ दो तीमारदार ही जाएं। अगर कहीं कोई लापरवाही हो रही है तो इस पर भी जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।-प्रो.मो.नवेद खान, प्रॉक्टर एएमयू
-सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी होनी चाहिए। यह ठीक हो जाए इस तरह के विवाद और घटना नहीं होगी। डॉक्टर अख्तर अली, उपाध्यक्ष आरडीए
-11 महीने में छह बार हड़ताल-
-5 मई 2026: महिला डॉक्टर और तीमारदार के बीच कहासुनी, मारपीट पर हड़ताल।
-अप्रैल 2026 : महिला डॉक्टर के साथ अभद्रता के विरोध में डॉक्टरों की हड़ताल।
-22 मार्च 2026 : मरीज के तीमारदार और स्टाफ के साथ मारपीट के बाद हड़ताल।
-जनवरी 2026 : डॉक्टरों और तीमारदारों के बीच झड़प के बाद सुरक्षा के लिए हड़ताल।
-सितंबर 2025: रेजिडेंट डॉक्टरों की मांगों और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर सांकेतिक विरोध।
-जून-जुलाई 2025 : सुरक्षा गार्डों और डॉक्टरों के बीच विवाद के बाद हुई हड़ताल।
हड़ताल की तीन मुख्य वजह
-डॉक्टरों के साथ अभद्रता-तीमारदारों या बाहरी तत्वों ने डॉक्टरों के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार।
-सुरक्षा की कमी- कैंपस में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस चौकी की सक्रियता की मांग।
-प्रशासनिक विवाद- मेडिकल प्रशासन और रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के बीच तालमेल की कमी।