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Aligarh News: 300 करोड़ के भूमि घोटाले में घिरे एसीएम, शासन ने डीएम को सौंपी जांच, एसआईटी ने पकड़ा था यह मामला

Tue, 07 Jul 2026 01:22 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Tue, 07 Jul 2026 01:22 PM IST
सार

आरोपी एसीएम विनीत कुमार मिश्र अपने पद पर रहने के साथ-साथ राज्य कर्मचारी विकास लोक सहकारी आवास समिति के प्रबंध समिति के अध्यक्ष पद पर भी काबिज रह चुके हैं। आरोप है कि विनीत मिश्रा ने अपने रसूख और अध्यक्ष पद का दुरुपयोग करते हुए समिति की लगभग 300 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को खुर्द-बुर्द कर दिया।

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State Employees Development Public Cooperative Housing Committee land dispute
स्वर्ण जयंती नगर स्थित राज्य कर्मचारी कॉलोनी का मुख्य द्वार - फोटो : संवाद

विस्तार

300 करोड़ रुपये की सरकारी व सहकारी संपत्ति के घोटाले में अलीगढ़ में तैनात एसीएम प्रथम विनीत कुमार मिश्र घिर गए हैं। शासन ने इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी को तत्काल निष्पक्ष जांच के कड़े आदेश जारी कर दिए हैं। मामला राज्य कर्मचारी विकास लोक सहकारी आवास समिति की अरबों की जमीन की हेराफेरी से जुड़ा है।

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दरअसल, आरोपी एसीएम विनीत कुमार मिश्र अपने पद पर रहने के साथ-साथ इस राज्य कर्मचारी विकास लोक सहकारी आवास समिति के प्रबंध समिति के अध्यक्ष पद पर भी काबिज रह चुके हैं। संघर्ष समिति के सदस्यों और प्लॉट धारकों का आरोप है कि विनीत मिश्रा ने अपने रसूख और अध्यक्ष पद का दुरुपयोग करते हुए समिति की लगभग 300 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को खुर्द-बुर्द कर दिया।
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पीड़ितों ने इस घोटाले के खिलाफ सीधे मुख्यमंत्री दरबार का दरवाजा खटखटाया था और शपथ पत्र व पुख्ता सबूतों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ितों का आरोप है कि पूर्व में हुई जांच के दौरान अधिकारियों ने पीड़ितों का पक्ष तक नहीं सुना और एसीएम को बचाने के लिए एकतरफा क्लीन चिट की रिपोर्ट शासन को भेज दी।

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सभी आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। पूर्व में इस मामले की विस्तृत जांच हो चुकी है। शिकायत करने वाले लोग खुद फंसे हुए हैं। पूर्व में मुकदमा भी दर्ज हो चुका है। ऐसे में अब यह लोग झूठे आरोप लगा रहे हैं।- विनीत मिश्रा, एसीएम प्रथम

शासन से जांच के आदेश मिले हैं। निर्देशों के अनुरूप प्राप्त जांच आख्या के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। - अविनाश कुमार , जिलाधिकारी

एसआईटी ने पकड़ा मामला
एसआईटी की पड़ताल में डिप्टी कलेक्टर विनीत मिश्रा को सीधे तौर पर दोषी पाया गया, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। शासन के अनु सचिव मनीष कुमार सिंह के मुताबिक अलीगढ़ के डीएम को आधिकारिक पत्र भेजकर शिकायती पत्र में दर्ज हर एक प्रतिकूल बिंदु की नियमानुसार जांच करने को कहा है। शासन ने साफ कर दिया है कि इस बार जांच निष्पक्ष हो और जल्द से जल्द इसकी रिपोर्ट लखनऊ भेजी जाए।

सस्ते आशियाने का सपना बना विवादों का अखाड़ा
सरकारी कर्मचारियों को सस्ते और रियायती दामों पर भूखंड देने के लिए साल 1995 में राज्य कर्मचारी विकास लोक सहकारी आवास समिति की नींव रखी गई थी। मकसद नेक था, किस्तों पर जमीन देकर कर्मचारियों का घर बसाना। शुरुआती दो योजनाएं तो सफल रहीं, लेकिन इसकी तीसरी महत्वाकांक्षी योजना कयामपुर ऐसी उलझी कि आज यह समिति बड़े घोटालों और विवादों के केंद्र में आ खड़ी हुई है।

तीन योजनाएं और 650 भूखंडों का पूरा खाका
इस समिति के सफरनामे में अब तक तीन बड़ी आवासीय योजनाएं शामिल रही हैं। इनमें से दो सफल रहीं, लेकिन तीसरी विवादों की भेंट चढ़ गईं। किशनपुर आवासीय योजना पूरी तरह सफल रही। इसमें 200 भूखंड विकसित कर कर्मचारियों को दिए गए। एटा चुंगी धनीपुर योजना के तहत 50 भूखंड सफलतापूर्वक आवंटित किए गए। तीसरी कयामपुर आवासीय योजना समिति का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट था। इसमें 400 भूखंड प्रस्तावित थे, लेकिन यही प्रोजेक्ट आज सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है।

किसान, संघर्ष समिति और घोटाले का त्रिकोण
आखिर कयामपुर योजना क्यों फेल हुई और विवाद कहां से शुरू हुआ? इसे तीन बिंदुओं में समझिए... कयामपुर योजना की जमीन को लेकर समिति और स्थानीय किसानों के बीच ठन गई। यह कानूनी और जमीनी विवाद इतना बढ़ा कि योजना धरातल पर उतर ही नहीं सकी। जिन कर्मचारियों ने जीवनभर की कमाई इस उम्मीद में लगा दी थी कि उन्हें कयामपुर में प्लॉट मिलेगा, उन्हें मायूसी हाथ लगी। ठगे गए इन पीड़ितों ने अब अपनी एक अलग संघर्ष समिति बना ली है। यह संघर्ष समिति अब सीधे राज्य सरकार द्वारा गठित संचालन समिति के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। लगातार हो रही शिकायतों के बाद अब इस तीसरी योजना में बड़े घोटाले की परतें खुल रही हैं, जिससे यह विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।

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