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Hathras News: खूंखार हो रहे कुत्ते, फाइलों से बाहर नहीं निकल पाया एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर

Mon, 27 Jul 2026 02:37 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Mon, 27 Jul 2026 02:37 AM IST
सार

हाथरस में में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया। इसके लिए जलेसर रोड स्थित नगर पालिका के सीवरेज फार्म पर 15,625 वर्गमीटर भूमि चिह्नित की गई। निर्माण के लिए सीएनडीएस कार्यदायी संस्था भी नामित हो चुकी है। यह प्रस्ताव अभी फाइलों में दबा है।

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Animal Birth Control Centre failed to move beyond the paperwork stage
शहर में घूमते कुत्ते - फोटो : संवाद

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आठ महीने बाद भी हाथरस जिले में कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर नहीं बन पाया है। ऐसे में सड़कों पर खाने की तलाश में घूम रहे सैकड़ों कुत्ते खूंखार हो रहे हैं और खतरा महसूस होने पर हमला कर रहे हैं। इन्हें कैनिन रेबीज वैक्सीन (कुत्तों का टीका) भी नहीं लग रही है। जिससे इनके द्वारा काटने पर रेबीज हो रहा है और लोगों की जान जा रही है।

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सुप्रीम कोर्ट ने निराश्रित कुत्तों को लेकर 19 मई 2026 को अपना फैसला सुनाया था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा था कि लोगों को बिना डरे जीने का अधिकार है। इसके बाद शहर में एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया। इसके लिए जलेसर रोड स्थित नगर पालिका के सीवरेज फार्म पर 15,625 वर्गमीटर भूमि चिह्नित की गई।
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इस केंद्र पर प्रतिदिन 25 कुत्तों की नसबंदी और 100 कुत्तों को रखने की व्यवस्था होगी। इसे बाद में 1000 कुत्तों की क्षमता तक बढ़ाया जाएगा। निर्माण के लिए सीएनडीएस कार्यदायी संस्था भी नामित हो चुकी है। यह प्रस्ताव अभी फाइलों में दबा है। पालिका की बोर्ड में बैठक में भी प्रस्ताव नहीं रखा जा सका है।

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नगर पालिका से शासन को भेजे गए 17 करोड़ रुपये के प्रस्तावों में एबीसी सेंटर भी शामिल है। प्रस्ताव पास होते ही जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। कैटल कैचर वैन व प्रशिक्षित स्टाफ के लिए भी योजना तैयार की गई है।-रोहित सिंह, कार्यकारी अधिकारी नगर पालिका परिषद हाथरस

कुत्तों के खूंखार होने के तीन प्रमुख कारण हैं। पहला ठीक से खाना व रहने की जगह न मिलना, दूसरा बेचैनी होना और तीसरा साथी नहीं मिलना है। कुत्तों में भी मादा की संख्या कम है, इसका भी असर हो रहा है।-डॉ. जितेंद्र भारद्वाज, पशु चिकित्सक


पहले भी हो चुकी हैं चार मौतें

  • 8 जून 2018 को सिकंदराराऊ के गांव पचों निवासी गौरव (18) की मौत हो गई थी। तीन महीने पहले उसे कुत्ते ने काटा था, लेकिन परिजनों ने देसी उपचार कराया था।
  • 12 जून 2020 को सादाबाद के गांव नगला शीशिया में चंद्रपाल सिंह (32) की रेबीज से मौत हो गई थी। दो महीने पहले उन्हें कुत्ते ने काटा था, उन्होंने देसी इलाज कराया था।
  • 30 जनवरी 2022 को चंदपा क्षेत्र के गांव कुम्हरई में आठ वर्षीय बालक फरहान की रेबीज से मौत हो गई थी। उसे भी एआरवी की केवल तीन डोज लगवाईं गई थीं। परिजन उपचार के लिए उसे जयपुर तक ले गए थे।
  • 5 नवंबर 2023 को सासनी के मोहल्ला अग्रवाल के सौरभ की रेबीज के कारण मौत हो गई थी। तीन महीने बाद ही उसमें लक्षण आ गए और जान चली गई। फैक्टरी में काम करते समय उसे कुत्ते ने काटा था। उन्होंने भी एआरवी इंजेक्शन नहीं लगवाए थे।
     
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