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Aligarh News: कोठी में हिस्से के लिए सड़क पर डटा परिवार
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रत्नेशपुरम में एक समृद्ध परिवार के कुछ लोग अपनी ही कोठी के सामने सड़क पर डटे हैं। उनके साथ घर-गृहस्थी का कुछ सामान है। सड़क पर मौजूद रविंद्र सचदेवा, उनकी पत्नी नीलम सचदेवा, पुत्र दीपक, दीपल व बेटी दीपिका सचदेवा बेहद परेशान हैं। नीलम ने बताया कि पारिवारिक कोठी रत्नेशपुरम में हैं, जिसमें वह अपना हिस्सा मांग रही हैं।
नीलम ने बताया कि उनकी ससुराल में पति सहित चार भाई हैं। इस वक्त केवल उनका परिवार सड़क पर है। एक देवर प्रदीप मुरादाबाद में एक्सपोर्ट का कारोबार करते हैं। दो देवर एनसीआर में हैं। मामू भांजा स्थित पैतृक आवास वर्ष 2012 में बिका था, उस वक्त तीन देवरों ने 40 लाख रुपये देने का वादा किया था। घर बिकने के बाद विक्रम कॉलोनी में किराये के मकान पर रहे। पति भाइयों के साथ एक्सपोर्ट करते थे।
बेटे दीपल की तबीयत खराब होने की वजह से उसे दिल्ली के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। छोटे बेटे की नौकरी लग चुकी थी, तो पूरा परिवार दिल्ली जाकर रहने लगा। उस वक्त भी देवरों ने भरोसा दिलाया कि दिल्ली में ही मकान देख लो, खरीद लिया जाएगा। देवर मासिक खर्च देते थे, लेकिन वर्ष 2022 के बाद वह भी देना बंद कर दिया। दूसरी तरफ बेटे की नौकरी चली गई। घर का खर्च चलाने के लिए कुछ नहीं बचा। बेटे का इलाज भी बंद हो गया।
अलीगढ़ लौटकर किशनपुर में एक किराये के मकान में रहने लगे। परेशान होकर शुक्रवार की शाम रत्नेशपुरम की पारिवारिक कोठी पर पहुंचे तो पता चला कि देवर ताला लगाकर मुरादाबाद चला गया है, जिससे वह परेशान हैं। कॉलोनी सोसाइटी के पदाधिकारी राकेश गुप्ता साईं, राज अग्रवाल, सुनीता चौहान आदि ने उनके खानपान की व्यवस्था की है।
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नीलम ने बताया कि उनकी ससुराल में पति सहित चार भाई हैं। इस वक्त केवल उनका परिवार सड़क पर है। एक देवर प्रदीप मुरादाबाद में एक्सपोर्ट का कारोबार करते हैं। दो देवर एनसीआर में हैं। मामू भांजा स्थित पैतृक आवास वर्ष 2012 में बिका था, उस वक्त तीन देवरों ने 40 लाख रुपये देने का वादा किया था। घर बिकने के बाद विक्रम कॉलोनी में किराये के मकान पर रहे। पति भाइयों के साथ एक्सपोर्ट करते थे।
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बेटे दीपल की तबीयत खराब होने की वजह से उसे दिल्ली के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। छोटे बेटे की नौकरी लग चुकी थी, तो पूरा परिवार दिल्ली जाकर रहने लगा। उस वक्त भी देवरों ने भरोसा दिलाया कि दिल्ली में ही मकान देख लो, खरीद लिया जाएगा। देवर मासिक खर्च देते थे, लेकिन वर्ष 2022 के बाद वह भी देना बंद कर दिया। दूसरी तरफ बेटे की नौकरी चली गई। घर का खर्च चलाने के लिए कुछ नहीं बचा। बेटे का इलाज भी बंद हो गया।
अलीगढ़ लौटकर किशनपुर में एक किराये के मकान में रहने लगे। परेशान होकर शुक्रवार की शाम रत्नेशपुरम की पारिवारिक कोठी पर पहुंचे तो पता चला कि देवर ताला लगाकर मुरादाबाद चला गया है, जिससे वह परेशान हैं। कॉलोनी सोसाइटी के पदाधिकारी राकेश गुप्ता साईं, राज अग्रवाल, सुनीता चौहान आदि ने उनके खानपान की व्यवस्था की है।