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Osteoarthritis: सुरक्षा मानकों पर खरी उतरी गठिया की यूनानी दवा, जगी उपचार की नई उम्मीद

Mon, 29 Jun 2026 04:12 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 29 Jun 2026 04:12 PM IST
सार

औषधि में आर्सेनिक, सीसा, कैडमियम और पारे की मात्रा सीमा से भी नीचे पाई गई, साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष फार्माकोपिया द्वारा निर्धारित सुरक्षित मानकों के भीतर ही रही। इसकी जांच के लिए इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक का उपयोग किया। 

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unani medicine for Osteoarthritis
आर्थराइटिस, गठिया - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

गठिया के उपचार में एएमयू के तिब्बिया कॉलेज के शोधकर्ताओं ने एक यूनानी औषधि खोज निकाली है। इसका 34 कीटनाशकों की उपस्थिति में परीक्षण किया गया। इसमें यह औषधि सभी सुरक्षा मानकों पर पूरी तरह खरी उतरी है। यह शोध रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल स्प्रिंग नेचर में प्रकाशित हुई है।

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ऑस्टियोआर्थराइटिस (गठिया) के उपचार में उपयोग होने वाली इस यूनानी फार्माकोपियल औषधि की गुणवत्ता, शुद्धता और सुरक्षा की पुष्टि हुई है। विस्तृत परीक्षणों में यह औषधि पूरी तरह सुरक्षित पाई गई। इसमें भारी धातुओं, कीटनाशक, विषैले फफूंदीय तत्व और रोगजनक सूक्ष्मजीव नहीं पाए गए। शोधकर्ताओं ने औषधि की प्रत्येक परत का आधुनिक गुणवत्ता नियंत्रण मानकों के अनुरूप विश्लेषण किया। औषधि को यूनानी फार्माकोपिया में निर्धारित मानकों के अनुरूप विषमुक्त और शुद्ध किए गए कच्चे पदार्थों से तैयार किया गया है।
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इसके बाद रासायनिक, जैविक और सूक्ष्मजीवी परीक्षणों की एक विस्तृत श्रृंखला संचालित की गई। इन परीक्षणों में अंतिम उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित और मानक अनुरूप पाया गया। प्रो. अब्दुर रऊफ, अध्यक्ष, इल्मुल अदविया, तिब्बिया कॉलेज (एएमयू) ने बताया कि आयशा रिजवी, सुम्बुल रहमान और तूबा रिजवी की यह खोज पारंपरिक यूनानी चिकित्सा प्रणाली और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करेगी। औषधियों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और उनकी वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता व वैज्ञानिक मान्यता को मजबूती मिलेगी।
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सुरक्षित सीमा में पाई गई भारी धातुएं
औषधि में आर्सेनिक, सीसा, कैडमियम और पारे की मात्रा सीमा से भी नीचे पाई गई, साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष फार्माकोपिया द्वारा निर्धारित सुरक्षित मानकों के भीतर ही रही। इसकी जांच के लिए इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक का उपयोग किया। यह तकनीक अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर धातुओं की पहचान करने में सक्षम मानी जाती है। अफ्लाटॉक्सिन जैसे विषैले फफूंदीय तत्वों की जांच के लिए लिक्विड क्रोमैटोग्राफी-टैंडम मास स्पेक्ट्रोमेट्री का उपयोग किया गया।


कीटनाशकों और अफ्लाटॉक्सिन से पूर्ण मुक्ति
अध्ययन में अफ्लाटॉक्सिन की अत्यंत सूक्ष्म मात्रा अवश्य दर्ज की गई थी, लेकिन उसका स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में काफी कम पाया गया। औषधि के निर्माण में प्रयुक्त सभी सामग्री रासायनिक प्रदूषण से मुक्त और सुरक्षित थी।

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