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UP: बायोप्सी की जरूरत नहीं, अल्ट्रासाउंड से होगी ट्यूमर की सटीक जांच; दुनिया में इस तरह की पहली तकनीक का दावा
अमित सरन, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 12 May 2026 02:57 PM IST
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सार
अब कैंसर की जांच के लिए बायोप्सी की जरूरत नहीं है। अल्ट्रासाउंड से ट्यूमर की सटीक जांच होगी। सब हार्मोनिक नैनो फ्लुइड से वैज्ञानिकों ने सेंसर आधारित अल्ट्रासांउड तकनीक विकसित की है। कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा।
फाइल फोटो
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विस्तार
कैंसर की जांच के लिए अब बायोप्सी कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वैज्ञानिकों ने सब हार्मोनिक बहु धात्विक नैनो फ्लुइड से सेंसर आधारित अल्ट्रासाउंड तकनीक विकसित की है। यह कुछ ही मिनटों में शरीर के किसी भी हिस्से में बने ट्यूमर की सटीक जांच कर बता देगा कि वह कैंसरकारी है या नहीं।
इस तकनीक से जांच का कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा जबकि सुई (सीरिंज) आधारित जांच के कई साइड इफेक्ट होते हैं। इससे कैंसर भी तेजी से बढ़ने लगता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि दुनिया में यह पहली तकनीक है जो बिना बायोप्सी के ट्यूमर की सटीक जांच करेगी।
साथ ही अल्ट्रासाउंड इमेज का रिजोल्यूशन बढ़ाने से कैंसरकारी ट्यूटर को नष्ट किया जा सकता है। जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, यूएसए के वैज्ञानिक प्रो. नीको एफ. डेक्लरिक, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. पीएस यादव, प्रो. राजाराम, दिल्ली विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. टीपी यादव और जॉर्जिया टेक यूरोप, फ्रांस के वैज्ञानिक अजीत मद्धेशिया के इस संयुक्त शोध को अमेरिका के प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ एप्लाइड फिजिक्स के आठ मई 2026 के अंक में प्रकाशित किया गया है।
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इस तकनीक से जांच का कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा जबकि सुई (सीरिंज) आधारित जांच के कई साइड इफेक्ट होते हैं। इससे कैंसर भी तेजी से बढ़ने लगता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि दुनिया में यह पहली तकनीक है जो बिना बायोप्सी के ट्यूमर की सटीक जांच करेगी।
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साथ ही अल्ट्रासाउंड इमेज का रिजोल्यूशन बढ़ाने से कैंसरकारी ट्यूटर को नष्ट किया जा सकता है। जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, यूएसए के वैज्ञानिक प्रो. नीको एफ. डेक्लरिक, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. पीएस यादव, प्रो. राजाराम, दिल्ली विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के प्रो. टीपी यादव और जॉर्जिया टेक यूरोप, फ्रांस के वैज्ञानिक अजीत मद्धेशिया के इस संयुक्त शोध को अमेरिका के प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ एप्लाइड फिजिक्स के आठ मई 2026 के अंक में प्रकाशित किया गया है।
ऐसे तैयार हुआ नैनो फ्लुइड
नैनो फ्लुइड ऐसे तरल पदार्थ होते हैं जिनमें बेहद सूक्ष्म धात्विक कण मिलाए जाते हैं। ये कण सामान्यत: 10 से 20 नैनो मीटर आकार के होते हैं, यानी मानव बाल की मोटाई से हजारों गुना पतले। वैज्ञानिकों ने इस शोध में तीन प्रकार के नैनो फ्लुइड तैयार किए जिसमें केवल सोने वाला नैनो फ्लुइड, सोना-प्लैटिनम मिश्रित नैनोफ्लुइड और सोना-प्लैटिनम-पैलेडियम त्रिधात्विक नैनोफ्लुइड शामिल हैं। इन नैनो कणों को माइक्रोवेव सहायता प्राप्त रासायनिक प्रक्रिया से तैयार किया गया जिससे अत्यंत स्थिर और नियंत्रित संरचना वाले कण प्राप्त हुए। नैनो फ्लुइड अल्ट्रासाउंड तरंगों के व्यवहार को अत्यधिक प्रभावशाली तरीके से नियंत्रित कर सकता है।
नैनो फ्लुइड ऐसे तरल पदार्थ होते हैं जिनमें बेहद सूक्ष्म धात्विक कण मिलाए जाते हैं। ये कण सामान्यत: 10 से 20 नैनो मीटर आकार के होते हैं, यानी मानव बाल की मोटाई से हजारों गुना पतले। वैज्ञानिकों ने इस शोध में तीन प्रकार के नैनो फ्लुइड तैयार किए जिसमें केवल सोने वाला नैनो फ्लुइड, सोना-प्लैटिनम मिश्रित नैनोफ्लुइड और सोना-प्लैटिनम-पैलेडियम त्रिधात्विक नैनोफ्लुइड शामिल हैं। इन नैनो कणों को माइक्रोवेव सहायता प्राप्त रासायनिक प्रक्रिया से तैयार किया गया जिससे अत्यंत स्थिर और नियंत्रित संरचना वाले कण प्राप्त हुए। नैनो फ्लुइड अल्ट्रासाउंड तरंगों के व्यवहार को अत्यधिक प्रभावशाली तरीके से नियंत्रित कर सकता है।
अल्ट्रासाउंड में क्या हुआ खास
जब इन नैनो फ्लुइड पर एक से तीन मेगा हर्ट्ज की उच्च आवृत्ति वाली अल्ट्रासोनिक तरंगें डाली गईं तब वैज्ञानिकों ने पाया कि ये तरल सब हार्मोनिक ध्वनि तरंगें उत्पन्न करते हैं। सब हार्मोनिक तरंगें सामान्य ध्वनि तरंगों की तुलना में अलग आवृत्ति पर उत्पन्न होती हैं और मेडिकल इमेजिंग में अधिक संवेदनशीलता प्रदान करती हैं। विशेष रूप से सोना-प्लैटिनम-पैलेडियम नैनो फ्लुइड ने सबसे अधिक मजबूत गैर-रेखीय ध्वनिक प्रतिक्रिया दिखाई। वैज्ञानिकों ने देखा कि इस त्रिधात्विक द्रव में ध्वनि ऊर्जा का पुनर्वितरण अधिक प्रभावी तरीके से हुआ जिससे सब हार्मोनिक संकेत कम ऊर्जा पर ही उत्पन्न होने लगे।
जब इन नैनो फ्लुइड पर एक से तीन मेगा हर्ट्ज की उच्च आवृत्ति वाली अल्ट्रासोनिक तरंगें डाली गईं तब वैज्ञानिकों ने पाया कि ये तरल सब हार्मोनिक ध्वनि तरंगें उत्पन्न करते हैं। सब हार्मोनिक तरंगें सामान्य ध्वनि तरंगों की तुलना में अलग आवृत्ति पर उत्पन्न होती हैं और मेडिकल इमेजिंग में अधिक संवेदनशीलता प्रदान करती हैं। विशेष रूप से सोना-प्लैटिनम-पैलेडियम नैनो फ्लुइड ने सबसे अधिक मजबूत गैर-रेखीय ध्वनिक प्रतिक्रिया दिखाई। वैज्ञानिकों ने देखा कि इस त्रिधात्विक द्रव में ध्वनि ऊर्जा का पुनर्वितरण अधिक प्रभावी तरीके से हुआ जिससे सब हार्मोनिक संकेत कम ऊर्जा पर ही उत्पन्न होने लगे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज
वर्तमान में चिकित्सा क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड इमेजिंग का उपयोग गर्भावस्था जांच, कैंसर पहचान, हृदय रोग और रक्त वाहिकाओं की जांच में व्यापक रूप से होता है, लेकिन मौजूदा अल्ट्रासाउंड कॉन्ट्रास्ट एजेंट, जो माइक्रोबबल्स पर आधारित होते हैं, लंबे समय तक स्थिर नहीं रहते। अधिक दबाव में टूट जाते हैं। नए नैनो फ्लुइड इस समस्या का समाधान बन सकते हैं क्योंकि ये अधिक स्थिर हैं। लंबे समय तक कार्य कर सकते हैं। ध्वनि तरंगों को अधिक संवेदनशीलता से नियंत्रित करते हैं और बेहतर इमेज गुणवत्ता प्रदान कर सकते हैं।
वर्तमान में चिकित्सा क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड इमेजिंग का उपयोग गर्भावस्था जांच, कैंसर पहचान, हृदय रोग और रक्त वाहिकाओं की जांच में व्यापक रूप से होता है, लेकिन मौजूदा अल्ट्रासाउंड कॉन्ट्रास्ट एजेंट, जो माइक्रोबबल्स पर आधारित होते हैं, लंबे समय तक स्थिर नहीं रहते। अधिक दबाव में टूट जाते हैं। नए नैनो फ्लुइड इस समस्या का समाधान बन सकते हैं क्योंकि ये अधिक स्थिर हैं। लंबे समय तक कार्य कर सकते हैं। ध्वनि तरंगों को अधिक संवेदनशीलता से नियंत्रित करते हैं और बेहतर इमेज गुणवत्ता प्रदान कर सकते हैं।
ऐसे हुआ प्रयोग
वैज्ञानिकों ने विशेष ध्वनिक कक्ष तैयार किया जिसमें नैनो फ्लुइड भरा गया। इसके बाद अल्ट्रासोनिक ट्रांसड्यूसर के माध्यम से ध्वनि तरंगें भेजी गईं। साथ ही लेजर प्रकाश का उपयोग करके ध्वनि तरंगों से बनने वाले विवर्तन पैटर्न को रिकॉर्ड किया गया। जैसे-जैसे धातुओं की जटिलता बढ़ती गई वैसे-वैसे ध्वनिक प्रतिक्रिया भी अधिक मजबूत होती गई।
वैज्ञानिकों ने विशेष ध्वनिक कक्ष तैयार किया जिसमें नैनो फ्लुइड भरा गया। इसके बाद अल्ट्रासोनिक ट्रांसड्यूसर के माध्यम से ध्वनि तरंगें भेजी गईं। साथ ही लेजर प्रकाश का उपयोग करके ध्वनि तरंगों से बनने वाले विवर्तन पैटर्न को रिकॉर्ड किया गया। जैसे-जैसे धातुओं की जटिलता बढ़ती गई वैसे-वैसे ध्वनिक प्रतिक्रिया भी अधिक मजबूत होती गई।