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Prayagraj : चिदानंद मुनि बोले- योगी युग की शुरुआत हुई तो अतीक भी अतीत बन गया

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 10 Jan 2026 08:04 PM IST
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सार

प्रदेश में 2017 से योगी युग की शुरुआत हुई तो अतीक जैसा माफिया भी अतीत बन गया। ये बातें शनिवार को मेला स्थित खाक चौक के शिविर में जगद्गुरु रामानंदाचार्य के प्राकट्य उत्सव में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि ने कहीं।

Chidanand Muni said – when the Yogi era began, Atiq also became the past.
सतुआ बाबा के शिविर में सीएम योगी आदित्यनाथ से वार्ता करते स्वामी चिदानंद मुनि। - फोटो : अमर उजाला।
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प्रदेश में 2017 से योगी युग की शुरुआत हुई तो अतीक जैसा माफिया भी अतीत बन गया। ये बातें शनिवार को मेला स्थित खाक चौक के शिविर में जगद्गुरु रामानंदाचार्य के प्राकट्य उत्सव में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद मुनि ने कहीं।

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उन्होंने कहा कि यह सनातन का शंखनाद है। हम बंटेंगे तो कटेंगे। जब-जब हम बंटे हैं, तब-तब हम घटे हैं, कटे हैं। बांग्लादेश का उदाहरण सामने है। आदमी पांच लोगों को नहीं संभाल पाता और हमारे मुखिया प्रदेश की 25 करोड़ की आबादी को संभाल रहे हैं। उत्तर प्रदेश अब उत्सव प्रदेश, दंगा मुक्त प्रदेश, अपराध मुक्त प्रदेश बन चुका है। दिशा, दशा और लोगों के भाव बदले हैं। लोग भय से मुक्त हुए हैं।

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स्वामी राघवाचार्य महाराज और स्वामी दामोदर दास ने कहा कि पहली बार ऐसा अवसर आया है जब रामानंदाचार्य के प्राकट्य उत्सव पर सीएम उपस्थित हुए हैं। स्वामी राघवाचार्य ने कहा कि जब से सीएम योगी की सरकार आई है, गुंडे और माफिया के लिए दो ही जगह रह गई है, जेल जाएं या यमराज के यहां। हम सभी गंगा तट पर यही मनाते हैं कि भविष्य में योगी को प्रधानमंत्री के रूप में देखें।


खाक चौक व्यवस्था समिति के प्रधानमंत्री संतोषाचार्य महाराज उर्फ सतुआ बाबा ने कहा कि सीएम योगी ने सनातन का सूर्य भगवा किया। यह योगी का दौर है, यहां विकास की नदियां बहेंगी। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, दीपक पटेल, पीयूष रंजन निषाद, गुरु प्रसाद मौर्या, पूर्व सांसद विनोद सोनकर और डॉ. रीता बहुगुणा जोशी आदि मौजूद रहे।



भक्ति को दक्षिण से पूरब की तरफ लाए रामानंदाचार्य

स्वामी दिनेशाचार्य महाराज ने कहा कि भक्ति के जितने आचार्य हैं, सब दक्षिण के हैं। सिर्फ जगद्गुरु रामानंदाचार्य महाराज हैं जो भक्ति को दक्षिण से पूर्व तक लेकर आए। समाज बंट रहा है, कट रहा है, छंट रहा है। आज से 700 वर्ष पूर्व भी भारत की स्थिति ऐसी ही थी। धर्म व संप्रदाय के नाम पर लोगों को बांटा जा रहा था। रामानंदाचार्य ने अलग-अलग मोतियों को इकट्ठा कर उन्हें एक सूत्र में पिरोया। ब्राह्मण, क्षत्रिय, नाई, महिलाओं समेत सभी वर्ग के लोगों को शिष्य बनाया।

पूर्व की सरकारों के दौरान धारा में लालपन हुआ करता था, आचमन की इच्छा नहीं होती थी

स्वामी विद्या चैतन्य ने कहा कि एक वक्त था कि पावन गंगा जल के लिए साधु-संत आंदोलन करते थे। यहां की धारा में लालपन हुआ करता था। आज गंगा की पवित्र धारा को देखो तो स्नान व पीने की इच्छा होती है। पूर्व की सरकारों में आचमन की इच्छा भी नहीं होती थी। स्वामी वैदेही वल्लभदेवाचार्य महाराज ने कहा कि गंगाजल इतना साफ व स्वच्छ हाे चुका है कि एक सुई को भी गंगा में डाल दिया जाए तो ढूंढ़ा जा सकता है।

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