गोशाला बना मौत का अड्डा : तीन दिन से मरे पड़े थे मवेशी, कुत्ते नोचते रहे शव, एक गोवंश का सिर्फ बचा है कंकाल
फूलपुर विकास खंड प्रतापपुर के बसनेहटा गांव स्थित कान्हा गोवंश आश्रय स्थल से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें देखकर किसी का भी दिल दहल जाए। यहां तीन दिनों से चार मृत गोवंश बिना दफनाए पड़े रहे और आवारा कुत्ते उन्हें नोच-नोचकर खाते रहे। एक मृत गाय का तो सिर्फ कंकाल ही जमीन पर दिखाई दे रहा था।
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विकास खंड प्रतापपुर के बसनेहटा गांव स्थित कान्हा गोवंश आश्रय स्थल से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें देखकर किसी का भी दिल दहल जाए। यहां तीन दिनों से चार मृत गोवंश बिना दफनाए पड़े रहे और आवारा कुत्ते उन्हें नोच-नोचकर खाते रहे। एक मृत गाय का तो सिर्फ कंकाल ही जमीन पर दिखाई दे रहा था। गौसेवा को लेकर चाहे सरकार कितने भी दावे करे, लेकिन ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई गायें कुपोषण, बीमारी और लापरवाही के कारण तड़पकर दम तोड़ रही हैं। आश्रय स्थल पर चारा, पानी और समय पर इलाज की भारी कमी है। मौजूदा समय में यहां करीब 100 गोवंश हैं, लेकिन उनकी देखभाल का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं दिख रहा।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी की लापरवाही और सरकारी बजट के बंदरबांट का खामियाजा ये बेजुबान जानवर भुगत रहे हैं। मृत गोवंश को तीन दिन तक खुले में पड़े रहने देना और कुत्तों द्वारा उन्हें लगातार नोचते रहना अमानवीयता की पराकाष्ठा है।घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और वे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब गौशाला ही मौत शाला में बदल जाए, तो सवाल उठना जरूरी है कि इन बेजुबान जानवरों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है।
लगभग एक सप्ताह पूर्व प्रतापपुर ब्लॉक के बसनेहटा एवं अलावलपुर गांव स्थित कान्हा गौशाला का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण में बसनेहटा में 7 तथा अलावलपुर में 6 गोवंश अत्यंत कमजोर अवस्था में पाए गए। स्थल पर भूसा उपलब्ध नहीं था और पुवाल की कुटी भी अत्यधिक कम मात्रा में मिली। इस संबंध में दोनों ग्राम पंचायतों के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध जिलाधिकारी को पत्र प्रेषित किया गया था। अब पशुओं की मृत्यु की सूचना प्राप्त होने पर पुनः पत्र भेजा गया है। - डा. शिव नाथ, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, प्रयागराज।
कान्हा गौशाला में पशुओं के लिए आवश्यक इंतजाम
- पर्याप्त चारा व भूसा, हरा चारा, सूखा भूसा, पुवाल, दाना–चोकर आदि की नियमित उपलब्धता।
- पीने के लिए साफ़ और पर्याप्त पानी।
- बरसात, सर्दी और गर्मी से बचाव के लिए पक्का ढका हुआ शेड।
- पर्याप्त वेंटिलेशन और साफ़ फर्श।
- पशु धन प्रसार अधिकारी की नियमित विजिट।
- बीमार पशुओं के लिए अलग आइसोलेशन व्यवस्था।
- टीकाकरण, डी-वॉर्मिंग, और समय–समय पर स्वास्थ्य परीक्षण।
- गौशाला परिसर की नियमित सफाई।
- गोबर व कचरे के उचित निस्तारण की व्यवस्था।
- पशुओं की सुरक्षा के लिए बाउंड्री।
- ठंड से राहत के लिए मोटी तिरपाल और अलाव जलाने की व्यवस्था।
- रात में गार्ड या सुरक्षा कर्मी।
- आने–जाने वाले सभी पशुओं का पंजीकरण और संख्या का रिकॉर्ड।
- मृत पशुओं की जानकारी की रिपोर्टिंग।
गेट चमकता है, पर बाउंड्री वॉल गायब; कुत्तों का डेरा, पशुओं की सुरक्षा पर सवाल
विकास खंड प्रतापपुर के बसनेहटा स्थित कान्हा गौशाला में प्रवेश द्वार तो नया और चमकदार बना दिया गया है, लेकिन पूरी गौशाला के चारों ओर बाउंड्री वॉल तक नहीं है। खुले परिसर में कुत्तों का जमावड़ा बना रहता है। जिससे कमजोर और बीमार गोवंशों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बाउंड्री के नाम पर कटीले तार का घेरा बनाया गया है। बाउंड्री न होने से रात में गौशाला पूरी तरह असुरक्षित रहती है। कई बार कुत्तों द्वारा नवजात और कमजोर पशुओं को नुकसान पहुँचाने की घटनाएँ भी सामने आ चुकी हैं। बावजूद इसके प्रबंधन की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। गौशाला में पहले से ही चारे और पुवाल की कमी की शिकायतें मिल रही थीं, ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी स्थितियों को और चिंताजनक बना रही है।