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दत्तात्रेय होसबले बोले : राष्ट्र निर्माण के लिए घर से बाहर निकले युवा, पंच परिवर्तन को बनाए जीवन का मंत्र

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 25 Jan 2026 06:50 PM IST
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सार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसवाले ने युवाओं का आह्वान किया है कि वे राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए पंच परिवर्तन को आत्मसात करें।

Dattatreya Hosabale said: Youth should come out of their homes for nation building
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसवाले ने युवाओं का आह्वान किया है कि वे राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए पंच परिवर्तन को आत्मसात करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को सच्चे अर्थों में पुनः जगदगुरु बनाने के लिए युवाओं को घरों से बाहर निकलकर समाज के लिए कार्य करना होगा। सरकार्यवाह ने यह विचार रविवार को मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के एमपी हॉल में ‘राष्ट्र पुनर्निर्माण में युवाओं की भूमिका’ विषय पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

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सरकार्यवाह ने अपने संबोधन में कहा कि देश हमें सबकुछ देता है, ऐसे में हमें भी देश को कुछ देना सीखना होगा। यही हर युवा का मूल मंत्र होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत महान था या नहीं, इस बहस से ऊपर उठकर अब हमें यह सोचना है कि हम भारत को महान कैसे बना सकते हैं। उन्होंने शिक्षा, व्यापार और उद्योग समेत हर क्षेत्र में भारतीयता के दर्शन पर बल दिया।
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भारत की उदार संस्कृति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने कभी किसी राष्ट्र के दमन के लिए शक्ति का संचय नहीं किया। श्रीराम का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि लंका विजय के बाद भी प्रभु राम ने राज्य विभीषण को सौंप दिया और स्वयं अयोध्या लौट आए। यही त्याग और परोपकार भारत की मूल पहचान है। उन्होंने आर्य बाहर से आए जैसे भ्रमों को सिरे से नकारते हुए कहा कि आर्य भारत के ही मूल निवासी हैं।

सरकार्यवाह का प्रमुख संदेश एवं आह्वान:

ऊंच-नीच का त्याग : समाज में समरसता लाने के लिए भेदभाव छोड़ना अनिवार्य है।
पर्यावरण और नागरिकता : भावी पीढ़ी को अच्छा नागरिक बनाना और प्रकृति की रक्षा करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है।
कर्तव्य परायणता : अच्छी बातें सुनने में सरल लेकिन अपनाने में कठिन होती हैं, जिस दिन युवा इन्हें स्वीकार कर लेंगे, लक्ष्य स्वतः प्राप्त हो जाएगा।
सांस्कृतिक एकता : भारत की सांस्कृतिक अखंडता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।

जिज्ञासा सत्र में छात्रों का किया मार्गदर्शन:

कार्यक्रम के दौरान जिज्ञासा सत्र का भी आयोजन हुआ, जिसमें मेडिकल कॉलेज, ट्रिपल आईटी और एम एन आई टी सहित विभिन्न संस्थानों के छात्रों ने ‘विकसित भारत’ और ‘अखंड भारत’ जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे। दत्तात्रेय होसवाले ने तार्किक रूप से उनकी शंकाओं का समाधान किया। इंदौर की स्वच्छता का उदाहरण देते हुए उन्होंने प्रयागराज के युवाओं को चुनौती दी कि यदि युवा संकल्प लें, तो प्रयागराज भी स्वच्छता में शीर्ष पर पहुंच सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एमएनआईटी के निदेशक प्रो. रमाशंकर वर्मा ने की। मंच पर सह प्रांत संघ चालक प्रो. राणा कृष्ण पाल और ट्रिपल आईटी के निदेशक मुकुल सुतावडे उपस्थित रहे। सम्मेलन में अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन, क्षेत्र प्रचारक अनिल, प्रांत प्रचारक रमेश, प्रो. राजा राम यादव, डा. आनंद शंकर सिंह, डा. एमजे त्रिपाठी और विभिन्न कॉलेजों के करीब 1500 छात्र उपस्थित रहे।

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