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पुण्यतिथि पर विशेष : फोर्ड ट्रक से संगम पहुंची थीं बापू की अस्थियां, देखने के लिए उमड़ी थी लाखों की भीड़
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 30 Jan 2026 02:20 PM IST
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सार
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान के समन्वयक डॉ. अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने बापू और संगम नगरी के अटूट संबंधों को याद किया।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गांधी विचार एवं शांति अध्ययन संस्थान के समन्वयक डॉ. अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने बापू और संगम नगरी के अटूट संबंधों को याद किया। उन्होंने बताया की बापू अपने जीवनकाल में कुल 15 बार प्रयागराज आए और उनके इस जुड़ाव की ऐतिहासिक शुरुआत 5 जुलाई 1896 को हुई। उस समय कलकत्ता-बॉम्बे मेल से उतरकर दवा खरीदने के दौरान उनकी ट्रेन छूट गई थी।
इसी प्रवास में संगम तट पर एक लोटा जल लेते समय उन्होंने पंडे से कहा था, ‘जितनी जरूरत हो, उतना की प्रकृति से लो’ जो आज पूरे विश्व के लिए जलवायु नैतिकता का संदेश बन चुका है। बापू का यह गहरा नाता उनकी अंतिम विदाई के समय भी अटूट रहा, जब 12 फरवरी 1948 को उनकी अस्थियां विशेष ट्रेन से इलाहाबाद लाई गईं।
अस्थियों को स्टेशन से संगम तक फोर्ड ट्रक से लाया गया। जिस पर पंडित नेहरू, सरदार पटेल और उनके पुत्र देवदास गांधी सवार थे। अस्थि विसर्जन के लिए संगम में अस्थायी जेटी का निर्माण किया गया था, जहां से उनके अवशेषों को त्रिवेणी की पावन गोद में सौंपा गया। वह ऐतिहासिक फोर्ड ट्रक आज भी इलाहाबाद संग्रहालय में बापू के प्रति इस शहर की अटूट श्रद्धा के प्रतीक के रूप में सुरक्षित है।
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इसी प्रवास में संगम तट पर एक लोटा जल लेते समय उन्होंने पंडे से कहा था, ‘जितनी जरूरत हो, उतना की प्रकृति से लो’ जो आज पूरे विश्व के लिए जलवायु नैतिकता का संदेश बन चुका है। बापू का यह गहरा नाता उनकी अंतिम विदाई के समय भी अटूट रहा, जब 12 फरवरी 1948 को उनकी अस्थियां विशेष ट्रेन से इलाहाबाद लाई गईं।
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अस्थियों को स्टेशन से संगम तक फोर्ड ट्रक से लाया गया। जिस पर पंडित नेहरू, सरदार पटेल और उनके पुत्र देवदास गांधी सवार थे। अस्थि विसर्जन के लिए संगम में अस्थायी जेटी का निर्माण किया गया था, जहां से उनके अवशेषों को त्रिवेणी की पावन गोद में सौंपा गया। वह ऐतिहासिक फोर्ड ट्रक आज भी इलाहाबाद संग्रहालय में बापू के प्रति इस शहर की अटूट श्रद्धा के प्रतीक के रूप में सुरक्षित है।
