राज्यपाल ने कहा : मूकबधिर बच्चों की कलाकृतियों से बनाएं पुस्तक, अधिक से अधिक स्कूलों में पहुंचाएं
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल व इलाहाबाद संग्रहालय की अध्यक्ष आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को इलाहाबाद संग्रहालय में सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक गैलरी का लोकार्पण किया।
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उत्तर प्रदेश की राज्यपाल व इलाहाबाद संग्रहालय की अध्यक्ष आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को इलाहाबाद संग्रहालय में सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक गैलरी का लोकार्पण किया। इसके बाद उन्होंने संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं और अनुभव वीथिका का अवलोकन किया। संग्रहालय के क्यूरेटर डॉ. संजू मिश्रा ने उन्हें संग्रहालय में संरक्षित दुर्लभ धरोहरों और प्रदर्शित सामग्री की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान प्रदेश के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। संग्रहालय के निदेशक ने राज्यपाल का स्वागत किया।
राज्यपाल ने संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में मूकबधिर व दिव्यांग बच्चों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों को चॉकलेट और स्कूल बैग वितरित किए और पांच शिक्षिकाओं को पौधे भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। बच्चों की बनाई गई कलाकृतियों की सराहना करते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक चित्र के साथ उसके इतिहास और विषय-वस्तु का विवरण जोड़कर एक पुस्तक तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक अधिक से अधिक विद्यालयों तक पहुंचाई जाए ताकि अन्य बच्चे भी इससे प्रेरणा ले सकें।
उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उसे मंच देना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि झुग्गी-झोपड़ी के बच्चों को बैंड का प्रशिक्षण देकर उन्हें सरकारी आयोजनों में भागीदारी दिलाई गई, जहां उन्होंने प्रथम स्थान भी प्राप्त किया। बाद में उसपर एक किताब तैयार करवाई गई, जिसे मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास भेजवाई। इस पहल से प्रेरित होकर अन्य स्थानों पर भी ऐसे कार्य किये गये। ऐसी पहलें आगे चलकर स्टडी विद इनकम का माध्यम बन सकती हैं और बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होंगी।
अच्छी और बुरी दोनों बातों का नियमित करेंगे निरीक्षण
राज्यपाल ने शिक्षकों से कहा कि वे मेधावी विद्यार्थियों को कमजोर छात्रों के साथ जोड़ें, ताकि वे उन्हें पढ़ाकर आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों की अच्छी हैंडराइटिंग भी बेहतर अंक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने अधिकारियों को निरंतर निरीक्षण करने की सलाह देते हुए कहा कि जब छत पर उगी घास तक नजर नहीं आएगी तो गंदगी और कमियां कैसे दिखेंगी। इसलिए अच्छी और बुरी दोनों बातों का नियमित निरीक्षण आवश्यक है।
उन्होंने बच्चों को इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने पर बल देते हुए कहा कि 'वंदे मातरम' का अर्थ, उसका इतिहास और उसे किसने लिखा, इसकी जानकारी विद्यार्थियों को अवश्य दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रयोगात्मक गतिविधियों और संग्रहालय जैसे संस्थानों के माध्यम से बच्चे अधिक प्रभावी ढंग से सीखते हैं, इसलिए ऐसे आयोजन लगातार होते रहने चाहिए।
राज्यपाल ने बच्चों को अच्छी तरह पढ़ने, स्वस्थ रहने और भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अच्छा जीवन बनाना प्रत्येक बच्चे के अपने हाथ में है। अंत में उन्होंने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए कहा, आप सभी भारत के अंगरक्षक बनिए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।